Tuesday, August 21, 2018

“ईदुल-अज़हा” के अवसर पर कुच्छ सावधानियाँ बरतने की ज़रूरत है!





#EidulAzha
“ईदुल-अज़हा” के अवसर पर कुच्छ सावधानियाँ बरतने की ज़रूरत है!
1. क़ुर्बानी ज़रूर करें लेकिन किसी भी तरह का कोई गैर क़ानूनी काम न करें और ना ही किसी ऐसे जानवर की क़ुर्बानी करें जिसकी इजाजत आप को राज्य सरकार या केन्द्र सरकार ना देती हो(प्रतिबन्धित हो),
2. प्रसाशन को पूरा सहयोग करें, किसी भी हाल में क़ानून को अपने हाथ में ना लें, देश एक व्यवस्था (क़ानून, constitution) के तहत चल रहा है उस कान्सटीटूशन को मज़बूत करें, भंग ना करें।
3.आपसी सौहार्द हर हाल में बनाए रखें, त्योहार तो तीन दिन में खत्म होजाएगा, समाज में हमें रहना है उसमें खठास ना आने पाए उसका ख्याल रखें।
4. क़ुर्बानी खुले में बिलकुल ना करें, करने के बाद उसके बचे हुए हिस्से को(जो प्रयोग में ना लाए जाते हैं) उन्हें अच्छी तरह दफ़न करें, इस बात का पूरा खयाल रखें के कोई जानवर इसे बाहर या सड़कों पर ना लेजा सके।
5. पूरी तरह सतर्क रहें, असमाजिक तत्त्वों से होशियार रहें, नज़र चौकन्नी रखें, धार्मिक स्थलों की भी निगरानी करें ताकि कोई असमाजिक तत्त्व किसी के भी धार्मिक स्थल पर कुच्छ अप्रीय चीज़ें रख कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश ना करे।
अगर ऐसा कुच्छ भी पता चले तो तुरन्त प्रसाशन को इसकी जानकारी दें, याद रखें चाहे कुच्छ भी हो लेकिन प्रसाशन का काम अपने हाथ में ना लें ।
6. क़ुर्बानी करें लेकिन “दिखावा, बड़बोलेपन और फ़ज़ूल खर्ची” से बचें।
7. Whatsapp, Facebook, Twitter (Social Media) पर कुर्बानी का photo या Video बनाकर ना डालें।
8. हमसब इंसान हैं, हमें उपर वाले ने समझ दी है , अपनी समझ और अपनी पसन्द से धर्म को अपनाने और उसपर चलने की, समझ दी है इन्सानों को जोड़ने की तोड़ने और लड़वाने की नहीं, धर्म और समझ “एक दूसरे का सम्मान, एक-दूसरे को समझने की समझ “ प्रदान करता है, धार्मिक होने का सबसे बड़ा प्रमान यही है।

आईये हमसब मिल कर अहद करें...त्योहार मिलजुल कर एक-दूसरे को सम्मान देते हूए एंव प्यार-खुशियां बांटते हुए मनाऐंग ।
#EidulAdha #babulinayat #BabulinayatRjd

Wednesday, August 15, 2018

15 अगस्त

15 अगस्त 1947 को हो गए थे आजाद हम,
आजादी के 72 साल बाद भी क्या,
समझ पाए आजादी का मतलब हम,
पहले ब्रिटिश शासन के तहत,
जकड़े थे गुलामी के बेड़ियों में,
आज संविधान लागू होने के बाद भी,
जाति-पाति के कारण हो गए हैं,
अपने ही देश में गुलाम हम,
पहले रंग-भेद के जरिए गोरों ने हमको बाँटा था,
आज हमारे अपनो ने ही,
बाँट दिए जातिवाद और धर्मवाद के नाम पर हम,
जो भारत पहचान था कभी,
एकता, अखण्डता और विविधता का,
वो भारत ही झेल रहा है दंश अब आन्तरिक खंडता का,
बाँधा था जिन महान देशभक्त नेताओं ने,
अपने बलिदानों से एकता के सूत्र में हमें,
अपने ही कर्मों से अब उनकी आत्माओं को,
दे रहे हैं लगातार त्राश हम,
जातिवाद, आरक्षण और धर्मवाद ने,
बुद्धि हमारी को भ्रमाया है,
राजनेताओं ने अपने हित की खातिर,
हमको आपस में लड़वाया है,
बहुत हुआ सर्वनाश अपना,
कुछ तो खुद को समझाओं अब,
देश पर हुए शहीदों की खातिर,
समझो आजादी का मतलब अब।
जय हिन्द, जय भारत।
#HappyIndependentDay #Babulinayat

Sunday, August 5, 2018

बंद कमरों में रहने वाली मुज़फ़्फ़रपुर की लड़कियाँ भी सुरक्षित नहीं थीं। लड़कियाँ कहाँ जाएँगी? हमने ऐसा समाज बना डाला है जिसमें लड़कियाँ न घर में सुरक्षित हैं न सड़कों पर। छोटी बच्चियों के साथ जो कुछ हुआ उसकी कल्पना करके ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बेहोश करने की दवा देकर उन्हें समाज में रसूख रखने वालों के पास भेजा जाता था जहाँ उनके साथ रेप किया जाता था। जिस देश में लड़कियों के साथ इतना घिनौना व्यवहार किया जा रहा है, उसे जेंडर से जुड़े सवालों से भागना नहीं चाहिए। सरकार को कई सवालों का जवाब देना है:

--जिस ब्रजेश कुमार ने लड़कियों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया, उसे आरोप के सामने आने के बाद भी टेंडर कैसे दे दिया गया?

कुछ सवाल तो समाज के लिए भी हैं:

--रेपिस्टों को इतनी हिम्मत कहाँ से मिलती है कि वे सीबीआई जाँच की घोषणा सुनने के बाद मुस्कुराते नज़र आते हैं? क्या समाज ने रेप को उतना बड़ा मुद्दा समझा है जितना समझा जाना चाहिए था?

--रेपिस्टों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन करने वाली पार्टियों का समर्थन क्यों किया जाता है? रेपिस्टों के पक्ष में रैली निकालने वालों को समाज अलग-थलग क्यों नहीं करता?

यह बहुत अच्छी बात है कि देश के कई हिस्सों में लोग मुज़फ़्फ़रपुर की लड़कियों को न्याय दिलाने की माँग करते हुए सड़कों पर उतरे। न्याय की डगर लंबी और कठिन ज़रूर है, लेकिन एक दिन मंज़िल ज़रूर मिलेगी।
#Babulinayat

Saturday, August 4, 2018

किसी नेता के शामिल हो जाने भर से कोइ प्रोटेस्ट नकली नही हो जाता ।ऐसे विरोध प्रदर्शन को सिर्फ वोट बैंक की राजनीति कहकर खारिज कर देना भी एक तरह की राजनीति ही हैं साथ ही न खुद कुछ करना और न दुसरे को करने देना बाली कहावत ही चरितार्थ होती है।

सवाल लड़कियों के न्याय का है,सुरक्षित देश और समाज का है।ऐसे मुद्दों पर हर किसी को अपने अपने तरीके से आवाज बुलंद करना चाहिये ,चाहे वो नेता हो या अभिनेता या मिडिया या आम आदमी।अगर आपको लगता है कि नेता ऐसे मुद्दों को सिर्फ अपने वोट बैंक में इजाफा करने के लिये उठा रहा है तो कौन सा प्रोटेस्ट में साथ देने भर से आपका वोट उसे ट्रांसफर हो जायेगा।कम से कम समाजहित से जुड़े मुद्दे पर एक साथ आवाज तो बुलंद किया ही जा सकता है वोट भले ही सब अपने अपने पसंदीदा नेता या दल को दें।

वैसे भी मुजफ्फरपुर बालिका गृह जैसे जघन्यतम कांड पर मिडिया और सिविल सोसाएटी का जो रुखा रवैया रहा ,उससे इनके सेलेक्टिव अप्रोच का तो खुलासा हुआ ही,साथ ही यह भी पता चला कि ये किसके इशारे पर खामोश रहे।अव्वल तो देखिये विपक्ष के जन्तर मन्तर पर आज के कैंडिल मार्च को मिडिया 2019 की तैयारी बता रहा।

सिर्फ सोशल मिडिया ही इस कांड पर अपने तरीके से दबाव बनाता रहा । ओर खाश तौर से तेजस्वी यादव जी का धन्यवाद जो बच्चियों की सुरक्षा की खातिर इस पूरे कांड का राष्ट्रीय स्तर पर पर्दाफाश करने का काम किया।नितीश कुमार ऐसे ही आज अचानक शर्मसार नही हुये ,ये हमारे-आपके और कुछ चुनिंदा नेताओं के सक्रियता के कारण ही हुआ है नही तो शर्म से सर पहले ही झुक जाना चाहिये था।और कौन नही जानता कि ब्रिजेश ठाकुर किसके दम पर खुलेआम ठठा रहा था ।
मुजफ्फरपुरबालिकागृहकांड
Babilinayat


Thursday, July 26, 2018

एनडीए भगाओ बेटी बचाओ साइकिल यात्रा 28 जुलाई 2018

“बेटी सुरक्षा संवाद”को हो जाइये तैयार। "भाई तेज-तेजस्वी आ रहे आपके द्वार।। संस्कृतिक धरती गया से 28 जुलाई को सुबह 10 बजे साईकिल मार्च में शामिल होकर देश/प्रदेश के बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिये एक प्रण करें।हर बहन को सुरक्षित रखना हम सभी का सामाजिक, नैतिक एबं मानवीय दायित्व है।।

चलेगी साईकिल उड़ेगा धूल।
न रहेगी तीर,न रहेगा फूल।।




CycleMarch4Girls
Babulinayat

Tuesday, July 24, 2018

28 जुलाई से तेजस्वी की साइकिल यात्रा


दरअसल, आरजेडी आगामी 28 जुलाई यानी बिहार विधानसभा मानसून सत्र के बाद एनडीए भगाओ, बेटी बचाओ साइकिल यात्रा निकालने जा रहा है. बता दें कि, साइकिल यात्रा की शुरुआत बिहार के गया से तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होगी.

वहीं,राजद अररिया बिहार के युवा नेता बाबुल इनायत की मानें, तो गैंगरेप और राज्य में बढ़ते अपराध के खिलाफ बुद्ध की धरती गया से तेजस्वी यादव के नेतृत्व में एनडीए भगाओ, बेटी बचाओ साइकिल मार्च ऐतिहासिक होगी.तेजस्वी यादव गया से साइकिल पर सवार होकर पटना पहुंचेंगे. आरजेडी ने इस यात्रा को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है. करीब 115 किलोमीटर इस यात्रा को सफल बनाने के बाद आरजेडी के पटना, जहानाबाद और गया जिले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की लगातार बैठक हो रही है.
साइकिल मार्च में युवा आरजेडी के 5 हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे. इसके लिए हर स्तर पर तैयारी जारी है. इसके लिए गया, जहानाबाद और पटना शहर में विभिन्न जगह तोरण द्वार, होर्डिंग, बैनर, पोस्टर भी लगाए जायेंगे.
मालूम हो कि, आगामी 28 जुलाई को 10 बजे दिन में गया के गांधी मैदान से साइकिल यात्रा की शुरुआत होगी. 28 जुलाई को जहानाबाद में रात्रि विश्राम होगा.
फिर 29 जुलाई को जहानाबाद से रैली शुरू होगा और रात्रि विश्राम मसौढ़ी में होगा. फिर 30 जुलाई को साइकिल यात्रा से पटना पहुंचकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राज्यपाल सत्यपाल मलिक को ज्ञापन सौंपेंगे.

साइकिल चलाने की प्रैक्टिस कर रहे तेजस्वी, NDA सरकार को भगाने के लिए करेंगे लंबी यात्रा


साइकिल चलाने की प्रैक्टिस कर रहे तेजस्वी, NDA सरकार को भगाने के लिए करेंगे लंबी यात्रा

 मुजफ्फपुर कांड को लेकर एक ओर तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में नीतीश सरकार पर लगातार हमला बोल रहे हैं, तो दूसरी ओर अपनी साइकिल यात्रा की भी जमकर तैयारी कर रहे हैं. इस साइकिल यात्रा को लेकर तेजस्वी यादव की एक फोटो वायरल हो रही है. जो उनके आधिकारिक आवास 5 सर्कुलर रोड के अंदर की है. जहां तेजस्वी यादव साइकिल चलाते दिख रहे हैं.

28 जुलाई से तेजस्वी की साइकिल यात्रा

दरअसल, आरजेडी आगामी 28 जुलाई यानी बिहार विधानसभा मानसून सत्र के बाद एनडीए भगाओ, बेटी बचाओ साइकिल यात्रा निकालने जा रहा है. बता दें कि, साइकिल यात्रा की शुरुआत बिहार के गया से तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होगी.
तेजस्वी यादव गया से साइकिल पर सवार होकर पटना पहुंचेंगे. आरजेडी ने इस यात्रा को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है. करीब 115 किलोमीटर इस यात्रा को सफल बनाने के बाद आरजेडी के पटना, जहानाबाद और गया जिले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की लगातार बैठक हो रही है.

Tuesday, July 17, 2018

संसद का मानसून सत्र सामने है। कांग्रेस ने बरसात में कम्बल ओढ़ने जैसा मुद्दा " महिला आरक्षण विधेयक " का बेसुरा राग अलाप दिया है। बेसुरा इसलिए कह रहा हूँ कि, कांग्रेस ने इस बिल को बिना किसी शर्त के समर्थन देने की बात कही है।
महिला आरक्षण विधेयक को समझने के लिए आपको थोड़ा पीछे ले चलते हैं। संसद में महिला आरक्षण बिल 1996 में देवेगौड़ा सरकार ने पहली बार पेश किया था और इसका कई पुरुष सांसदों ने भारी विरोध किया था। फिर साल 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में दोबारा पेश होने के बाद राज्यसभा में बिल पास हुआ लेकिन लोकसभा में आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया।
तीसरे मोर्चे के घटक समाजवादी दलों सपा, बसपा, राजद ने इस बिल के प्रारूप का विरोध किया था। उंन्होने संसद में 33% महिलाओं के प्रतिनिधित्व में दलित,आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए भी इस आरक्षण में आरक्षण की माँग की थी।
ये शर्त जायज भी है। ज्ञात हो नेताजी मुलायम सिंह, लालू जी, शरद यादव, रामविलास पासवान,मायावती सहित सभी गैर कांग्रेसी गैर भाजपाई नेताओ का ये मानना था कि, दलित, ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा होना चाहिए और 33 फीसदी आरक्षण में अलग से कोटा होना चाहिए। सवर्ण और दलित, ओबीसी महिलाओं की सामाजिक हालत में फर्क होता है और दलित, ओबीसी महिलाओं ने ज्यादा शोषण झेला है। महिला बिल के रोटेशन के प्रावधानों में विसंगतियां हैं जिसे दूर करना चाहिए और फिर बिल पास कराना चाहिए।
कांग्रेस इस बिल का बिना शर्त समर्थन क्यों करना चाहती है ? क्या जिन कारणों से इसका विरोध हुआ था ,वो अब बदल गए ?
सनद रहे, जातीय जनगणना के मामले में कांग्रेस और बीजेपी पार्टियां आपस मे मौसेरी बहने हैं। अब महिला आरक्षण बिल के गड़े मुर्दे को खोदने के पीछे इनकी क्या फिक्सिंग है ? ये समझ से परे है।
गठबंधन और सरकार की घेराबंदी का समय है। ऐसे में सामाजिक न्याय, घोटाले, मोदी चोरो ,बेरोजगारी, सीमा सुरक्षा, महिला सुरक्षा ,किसान ,जवान के मुद्दे को छोड़कर ये क्या बहनापा निभाया जा रहा है ? ये नही चलेगा।
बाबुल इनायत

Wednesday, July 11, 2018

अमित शाह नीतीश कुमार से मिलेंगे

अमित साह नीतीश जी से मिलेंगे. अनिश्चितता का माहौल समाप्त हुआ. दोनों के बीच अब एक नहीं बल्कि दो मुलाक़ात होगी. हालाँकि पहली मुलाक़ात समूह में होगी. भाजपा के नेताओं के साथ. असली मुलाक़ात तो रात में होगी. भोजन पर.
भाजपा गठबंधन के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश जी की अमित शाह से यह पहली मुलाक़ात होगी. विधान सभा के पिछले चुनाव में नीतीश जी महागठबँधन की ओर से मुख्यमंत्री के चेहरा थे. अमित साह उस चुनावी अभियान में बिहार के लोगों को चेता रहे थे. नीतीश अगर मुख्यमंत्री बनेंगे तो पाकिस्तान में दिवाली मानेगी. इसलिए पहली मुलाक़ात में पुरानी बात की याद की थोड़ी झेंप तो होगी.
लेकिन दोनों की बातचीत का असली पेंच तो बड़े भाई का दर्जा का है. बिहार में चेहरा किसका बड़ा होगा ! नीतीश कुमार का या नरेंद्र मोदी का ! बड़ा भाई कौन है, या किसका चेहरा बड़ा है, इसकी कसौटी क्या होगी ? स्वाभाविक है कि आगामी चुनावों में जो ज़्यादा सीट पर चुनाव लड़ेगा बिहार की जनता उसे ही बड़े भाई का दर्जा देगी. क्या भाजपा के लिए यह संभव है. सहज बुद्धि तो कहती है कि यह नामुमकिन है. तब नीतीश कुमार क्या रूख अपनायेंगे यह देखना दिलचस्प होगा.

Saturday, July 7, 2018

नरेंद्र मोदी को Jio के विज्ञापन में दिखने के मायने।

बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर आपका ध्यान खींच रहा हूँ । 02 मिनट से अधिक का समय नही लगेगा, पढ़ जरूर लीजिएगा
क्योकि बात वोट की नही देशहित से जुड़ी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिलायंस "JIO " के विज्ञापन में दिखने के क्या मायने है ..देश का जनमानस यह धीरे-धीरे समझने लगा है । इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया के बनाए तिलिस्म के भरोसे नरेंद्र मोदी और भाजपा की यह एक सोची-समझी रणनीति थी कि इस देश की जनता को जब चाहे मूर्ख बनाया जा सकता है और इसी अतिआत्मविश्वास (over confidence) में नरेंद्र मोदी भारी गलती कर गए और अपने महिमामंडन के नशे में ये यह तक भूल गए कि उनकी प्राथमिकता लगातार घाटे में जा रहे BSNL को संभालना है ...न कि रिलायंस की 4G सिम बेचना ।
अंबानी और अडानी जैसे फिरकापरस्त उद्योगपतियों के पैसे पर अपनी राजनीति चमका कर खुद को भारत माँ का लाल बताने वाले देश के धुरंधर प्रधानमंत्री एक के बाद एक हर क्षेत्र, हर दिशा में वर्षों से कार्यरत सरकारी ढांचों और उपक्रमों को ध्वस्त कर अपनी भारत माँ को चंद उद्योगपतियों के हाथों बेचने पर आमादा है ।
टेलीकॉम सेक्टर के जानकार ये भी संभावना जताते हैं कि जल्द ही BSNL स्वयं के लिए स्पेक्ट्रम लेने की बजाय इसी रिलायंस के स्पेक्ट्रम से शेयरिंग प्राप्त करेगा । यानि कि अब BSNL का ब्रॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं रिलायंस से उधार लेकर चलेगीं ।
लेकिन बहुत कम लोग इस बात को जानते है कि टेलीकॉम सेक्टर पहला ऐसा सेक्टर नहीं है जिसमें मोदी सरकार ने रिलायंस के प्रति अपनी गहरी स्वामिभक्ति का परिचय दिया हो । आपको बताते चलूं कि ऐसी कई करतूतें मोदी सरकार पिछले दो साल में एक बार नहीं कई बार कर चुकी है चाहे वो डिफेन्स में FDI लागू होने पर सरकार की तरफ से लाइज़निंग करने के लिए रिलायंस को नियुक्त करना हो या फिर मोदी के PM बनने के 4 महीने के भीतर ही रिलायंस के देश भर में बंद पड़े 19 हज़ार से ज़्यादा पेट्रोल पम्प्स का खुल जाना हो ।
ऐसा ही एक जिन्दा उदाहरण आपको मिलेगा ONGC के मामले में ।
पिछले वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत सरकार के एक अति महत्वपूर्ण उपक्रम तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) को दो बड़े झटके देते हुए उसे इस दयनीय हाल में ला दिया है जहाँ से शायद आने वाले दस सालों के अंदर ONGC का नामोनिशान ही मिट जाएगा ।
पहले झटके के तौर पर PM मोदी ने ONGC में निजी निवेश को मंज़ूरी दे दी और इसमें निवेश किया उनके आका मुकेश अंबानी ने ।
इसमें गौर करने वाली बात यह है कि ONGC भारत सरकार के लिए एक constant profit making body था, यानि उसकी वित्तीय स्थिति में ऐसी कहीं भी कोई समस्या नहीं जिसके चलते निजी निवेश से धन जुटाने की ज़रूरत पड़े । देखते ही देखते एक पुराने और लगातार लाभ देने वाले सरकार के इस उपक्रम से बिना कुछ किए कराए भारी मुनाफा कमाने लगी रिलायंस ! और बहाना ये बनाया गया कि इससे सरकारी खजाने को एकमुश्त 1600 करोड़ रूपए मिले ।
मित्रो यह 1600 करोड़ वो रकम है जिसका एक चौथाई यानि 400 करोड़ तो PM मोदी की एक साल की सुरक्षा में खर्च हो जाता है यानि सरकार का खजाना अचानक से कुबेर का खजाना हो गया हो ऐसी भी कोई बात नहीं थी ।
PM मोदी यहीं नहीं रुके, इस मंज़ूरी के बाद उन्होंने ONGC को और बड़ा तगड़ा झटका दिया और ONGC के सबसे बड़े सप्लाई हेड्स या फिर साधारण भाषा में यूं कहे कि सबसे बड़े ग्राहक में से एक भारतीय रेलवे को डीज़ल सप्लाई करने का काम ONGC से छीनकर मोदी ने अपने आका मुकेश अम्बानी की कंपनी "रिलायंस पेट्रोलियम " को दे दिया । अब ONGC दो तरह से पीटा जा रहा है, पहला जो काम उसके पास है उसमें से कमाए हुए पैसे में भी मुकेश अंबानी का हिस्सा दे और पुराने ग्राहकों को भी एक-एक करके रिलायन्स को सौंपा जा रहा है और ज़ाहिर है इसमें ONGC को तो कोई हिस्सा मिलना नहीं है ।
अब रही बात कि ये सारी जानकरियाँ सार्वजानिक क्यों नहीं होती ।
इस समय देश में हिंदी और गैरहिन्दी भाषी लगभग 90 से ज़्यादा चैनल्स है जिन्हें 24 hour broadcast की अनुमति प्राप्त है । ये 90 से ज़्यादा चैनल्स आज से तीन साल पहले तक 39 अलग-अलग मीडिया ग्रुप्स द्वारा संचालित किए जाते थे । आपको ये जानकर यह आश्चर्य होगा कि चैनल्स की संख्या वही है लेकिन संचालन करने वाले ग्रुप्स 39 से सिर्फ 21 रह गए है ।
ऐसा इसलिए क्योंकि इन तीन सालों में network18 नामक एक मीडिया ग्रुप ने 18 ग्रुप्स को खरीद कर अधिगृहित कर लिया । और इस network18 ग्रुप के मालिक का नाम है " मुकेश अंबानी"
यानि जो न्यूज़ चैनल्स पर हर शाम आपको गाय, गोबर, गौमूत्र, लवजिहाद, ISIS, पाकिस्तान, चीन और मंदिर मस्जिद दिखाया जाता है जिसे देखकर आपका खून खौल उठता है वो कोई जोश नहीं बल्कि एक तरह का ड्रग्स है जो आपकी भावनात्मक नसों में घोला जा रहा है ताकि आप के अन्दर अपने ही देश को लूटने वाले चंद गद्दार तथाकथित राष्ट्रवादियों और उद्योगपतियों को देखने और देखकर प्रतिकार करने की क्षमता देश के लोगों में न रह पाए ।
यूँ समझ लीजिए ईस्ट इंडिया कंपनी-II का जन्म इस बार भारत के अंदर ही हुआ है और इसे सुरक्षा देने वाली "खाकी चड्डी" पहनी पुलिस तो है ही ।
नोट : अगर मेरी बात पर विश्वास नही हो रहा है, तो किसी ONGC और रेलवे में ऊंचे पद पर जाब करने वाले से पूछ लीजिएगा,यकीन हो जाएगा।
यदि आपको लगता है कि देश को बचाना है तो 5 लोगो को शेयर जरुर करें .

Thursday, July 5, 2018

राष्ट्रीय जनता दल 22 वीं स्थापना दिवस

समाजवादी समर की उपज है हमारी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल,आपातकाल के आग में तपे लालू जी के तप का प्रतिफल है राजद।

राजद एक राजनीतिक पार्टी मात्र नही,न ही इस दल का उद्देश्य केवल चुनाव में बहुमत लेकर सरकार बनाना है,बल्कि यह तो 90 के दशक में बिहार में सामाजिक क्रांति की सूत्रधार है,यह दल उनकी आवाज है जिनकी आवाज आज तक अवरोधित थी,राजद समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की अभिव्यक्ति है, राजद बिहार का वह दल है जिसने समाजवादी धारा को प्रवाहित करने का काम पूरे देश मे किया,राजद अकलियतों की आवाज है,राजद शोषितों की शान है,वंचितो का अधिकार है,सामंतीयो की शामत है,राजद एक दल नही एक विचारधारा है,जिसके आधार में लोहिया व जयप्रकाश के विचार स्थापित है।


यह पार्टी न होती तो  गरीब वंचित शोषित आज समाज की मुख्यधारा में न होता,पार्टी के 22 वीं स्थापना दिवस की सभी कार्यकर्ताओं को दिल से मुबारकबाद।
मुझे गर्व है मैं राजद का समर्थक हूँ।


                              बाबुल इनायत
                             9507860937
         सोशल मीडिया प्रभारी राष्ट्रीय जनता दल अररिया बिहार
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