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Saturday, June 10, 2023

आप सवाल पूछते है लालूवाद क्या है.? आज जवाब लीजिए।-आडवाणी की रथयात्रा रोक कर पूरे देश की साम्प्रदायिक ताकतों को चुनौती देना लालूवाद है।-मण्डल की लड़ाई के लिए बिहार जैसे पिछड़े राज्य में सामाजिक न्याय स्थापित करना लालूवाद है।-नालंदा का अतीत समेटकर गुज़ारा करने वाले राज्य में 6 विश्विद्यालय खोलना लालूवाद है।-कमेरा वर्ग को उनके ताकत का अहसास करवाने के लिए कुर्ते के ऊपर बनियान पहनकर जनसभा करना लालूवाद है।-कुम्हार वर्ग को सशक्त करने के लिए रेलवे में बिकने वाली चाय को मिट्टी की कुल्हड़ में अनिवार्य करना लालूवाद है।-एकलव्य का अँगूठा माँगने वाले देश में दलित-पिछड़े-आदिवासी समाज के बच्चों के लिए “पढ़ो या मरो” का नारा देकर चरवाहा विद्यालय खोलना लालूवाद है।-भारतीय वर्ण व्यवस्था में जातिगत अन्याय का प्रतिकार कर समतामूलक समाज की परिकल्पना लालूवाद है।-विदेशी बताकर विरोध झेलती इंदिरा गांधी की बहू के लिए चट्टान की भाँति अड़ जाना लालूवाद है।-सामन्तवाद के सीने पर लात रख के बिहार का मुस्तक़बिल संवार देना लालूवाद है।-वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल होते रहे बिहार के अल्पसंख्यक समाज को मुख्यधारा का हिस्सा बनाना ही लालूवाद है।-90 के दशक में बिहार के विश्विद्यालयों के लिए 156 करोड़ का बज़ट लालूवाद की गवाही देते हैं।-सिर पर मैला ढोने की अमानुषिक प्रथा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करवाना लालूवाद है।-महिलाओं के लिए माहवारी के दिनों में दो दिनों के अवकाश का प्रावधान करना लालूवाद है।- ताड़ी कर माँफ कर के ताड़ी बेचने वाले पासी समाज को सशक्त करना लालूवाद है। दरअसल, बिहार की जीवनधारा में समाजवादी विचारधारा रखने वाला हर व्यक्ति लालूवादी है। सामन्तवादी, सांप्रदायिक ताकतों से लोहा लेते हुए दलित-पिछड़े-आदिवासी समाज के हक के लिए लड़ने वाला प्रत्येक इंसान लालूवादी है। लालूजी के अलंबरदारों के लिए लालूवाद एक विचारधारा है। पूरे देश को सद्भावना दिवस की शुभकामनाएं।

आप सवाल पूछते है लालूवाद क्या है.? 
आज जवाब लीजिए।

-आडवाणी की रथयात्रा रोक कर पूरे देश की साम्प्रदायिक ताकतों को चुनौती देना लालूवाद है।

-मण्डल की लड़ाई के लिए बिहार जैसे पिछड़े राज्य में सामाजिक न्याय स्थापित करना लालूवाद है।

-नालंदा का अतीत समेटकर गुज़ारा करने वाले राज्य में 6 विश्विद्यालय खोलना लालूवाद है।

-कमेरा वर्ग को उनके ताकत का अहसास करवाने के लिए कुर्ते के ऊपर बनियान पहनकर जनसभा करना लालूवाद है।

-कुम्हार वर्ग को सशक्त करने के लिए रेलवे में बिकने वाली चाय को मिट्टी की कुल्हड़ में अनिवार्य करना लालूवाद है।

-एकलव्य का अँगूठा माँगने वाले देश में दलित-पिछड़े-आदिवासी समाज के बच्चों के लिए “पढ़ो या मरो” का नारा देकर चरवाहा विद्यालय खोलना लालूवाद है।

-भारतीय वर्ण व्यवस्था में जातिगत अन्याय का प्रतिकार कर समतामूलक समाज की परिकल्पना लालूवाद है।

-विदेशी बताकर विरोध झेलती इंदिरा गांधी की बहू के लिए चट्टान की भाँति अड़ जाना लालूवाद है।

-सामन्तवाद के सीने पर लात रख के बिहार का मुस्तक़बिल संवार देना लालूवाद है।

-वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल होते रहे बिहार के अल्पसंख्यक समाज को मुख्यधारा का हिस्सा बनाना ही लालूवाद है।

-90 के दशक में बिहार के विश्विद्यालयों के लिए 156 करोड़ का बज़ट लालूवाद की गवाही देते हैं।

-सिर पर मैला ढोने की अमानुषिक प्रथा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करवाना लालूवाद है।

-महिलाओं के लिए माहवारी के दिनों में दो दिनों के अवकाश का प्रावधान करना लालूवाद है।

- ताड़ी कर माँफ कर के ताड़ी बेचने वाले पासी समाज को सशक्त करना लालूवाद है। 

दरअसल, बिहार की जीवनधारा में समाजवादी विचारधारा रखने वाला हर व्यक्ति लालूवादी है। सामन्तवादी, सांप्रदायिक ताकतों से लोहा लेते हुए दलित-पिछड़े-आदिवासी समाज के हक के लिए लड़ने वाला प्रत्येक इंसान लालूवादी है। लालूजी के अलंबरदारों के लिए लालूवाद एक विचारधारा है। पूरे देश को सद्भावना दिवस की शुभकामनाएं।

Wednesday, July 4, 2018

5 Julay Rjd स्थापना दिवस राष्ट्रीय जनता दल

पार्टी विचारधारा:- राष्ट्रीय जनता दल सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के आधार पर समाज को विकसित करने की प्रतिबद्धता रखनेवाले लोगों और समुदायों की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतिनिधि है. स्थापना के बाद से ही राष्ट्रीय जनता दल लगातार समाज के सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की आवाज के रूप में काम कर रहा है. राष्ट्रीय जनता दल समाजवादी राजनीति पर काम करने और प्रचार करने में विश्वास रखता है. पार्टी भूमिहीन श्रमिकों, किसानों, किसानों के अन्य कमजोर समूहों और प्रगतिशील लोगों के साथ ही समाज के अन्य वर्गों के एकताबद्ध नेटवर्क का विकास कर रही है. गांधीवादी मूल्यों से प्रेरणा लेकर समाजवादी नेताओं की महान परंपरा में राजद सांप्रदायिकता के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता के साथ खड़ा है. पार्टी का मानना है कि सत्याग्रह /अहिंसक प्रतिरोध सहित शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आन्दोलन का अधिकार लोगों का मौलिक अधिकार है.
एक राजनीतिक संगठन के रूप में राजद स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण जिन्हें लोग जेपी या लोकनायक के रूप में आदर और प्यार से याद करते हैं, के मार्गदर्शक विचारों का पालन करता है. महान समाजवादी दूरदर्शी लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नक्शेकदम पर चलते हुए, राजद का दृढ़ विश्वास है कि ‘सार्वभौम, समाजवादी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य’ के संवैधानिक आदर्शों को वास्तविक अर्थों में धरातल पर उतारने के लिए जमीनी स्तर पर सतर्कता और संघर्ष की आवश्यकता होती है. लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की विचारोत्तेजक पंक्तियों “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” और “करो या मरो” का शानदार ढंग से किया गया पाठ राजद के लिए गरीबों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और सामाजिक रूप से कमजोर समाज के अन्य वर्ग के लोगों के सामाजिक उत्थान के संघर्ष के लिए एक प्रेरणा है.
राजद एक आधुनिक और प्रगतिशील दृष्टिकोण के साथ एक सक्रिय राजनीतिक दल के रूप में उभरा है और इसका इतिहास अब तक धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और सभी के लिए एक समावेशी विकास के सिद्धांतों से जुड़ा हुआ है.

                                        बाबुल इनायत
                                       9507860937
                   सोशल मीडिया प्रभारी, राजद अररिया बिहार
                                       
Babulinayat

Tuesday, June 26, 2018

नीतीश कुमार को गठबंधन में नो एंट्री तेजस्वी यादव।


तेजस्वी अपनी जगह अटल-अविचल हैं। कहीं किन्हीं को कोई कन्फ़्यूज़न नहीं होना चाहिए। यही स्पष्टता और तेवर बरकरार रहे! गाभिन बात बोलने के लिए नीतीश को छोड़ दीजिए। गोलमटोल बोलना और गच्चा देना उनकी युएसपी है, तेजस्वी की पहचान भिड़ाभिड़ी वाली है, वही इनकी ताक़त है। सुनिए, तेजस्वी ने इस बार ठोक-बजा के बोल दिया है, अब इधर ताकाझांकी की गुंजाइश क्षीण है।
"हमारे सामने राहुल गाँधी जी की जो बात हुई, उन्होंने कहा कि राजद और हम एक लॉन्ग टर्म प्लान बना रहे हैं और उस पर हम लोग काम कर रहे हैं। तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। अब जनता दल (युनाइटेड) के लोग भी कहते हैं कि कांग्रेस ने गंवा दिया मौक़ा। त्यागी जी ने भी तो बोला, कई बार उन्होंने बोला, तो ये बात आई कहाँ से? तो इसलिए एक बात जान लीजिए, हमारे चाचा जहाँ भी रहेंगे, जिस गठबंधन में भी रहेंगे, उस गठबंधन की नैया डुबोने का काम करेंगे। अब वो पलटी मारें, न मारें हमलोग क्या...उसके लिए हम क्यूं चिंतित रहें? आप इ बात बताइए न यहाँ तो जबतक राष्ट्रीय जनता दल में हमलोग हैं, हमलोग उनको कभी भी स्वीकार नहीं कर सकते हैं। एक बात, कोई भी कहीं से भी किसी भी प्रकार का दबाव हो, हमलोग दबाव जो है, उसमें आने वाले नहीं हैं। और जो जनता की जो माँग है, जनता की जो बात है, हम उसको सुनने का काम करेंगे; जो जनता कह रही है। जनता यही कह रही है कि नीतीश जी के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जिन्होंने बिहार के मैंडेट के साथ खिलवाड़ करने का काम किया, जिन्होंने 2 लाख ऑनलाइन तलवारें बटवाने का काम किया, जो कलम की बात नहीं करते। जिन्होंने एससी-एसटी क़ानून को ख़त्म करने का काम किया, आज नीतीश कुमार जी वहाँ हैं। जो लोग नागपुरिया क़ानून को लागू करना चाहते हैं, आज नीतीश जी वहाँ हैं और एक भी मसले पे उन्होंने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी। ये बात आपलोग ध्यान से सुन लीजिए। क्या कांग्रेस के लोग चाहेंगे कि जिन्होंने एससी-एसटी क़ानून को ख़त्म करवाने का काम किया, जो पार्टनर जो सहयोग करता रहा, ऐसे लोग..."
- तेजस्वी यादव
                                           बाबुल इनायत
                                          9507860937
         सोशल मीडिया प्रभारी, राष्ट्रीय जनता दल अररिया बिहार
                                      Babulinayat4Rjd


Wednesday, June 13, 2018

लालू प्रसाद यादव अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा ब्लॉक बनवाए,सबसे ज्यादा प्राथमिक विद्यालय खोले,सबसे ज्यादा यूनिवर्सिटी की स्थापना की। बाबुल इनायत

सबसे अधिक ब्लॉक लालू ने बनाए, सबसे ज़्यादा प्राथमिक विद्यालय लालू ने खोले, सबसे ज़्यादा युनिवर्सिटी की स्थापना लालू ने की। कामकाजी महिलाओं के लिए माहवारी के दिनों में विशेष कष्ट का ख़याल करते हुए विशेषावकास का प्रावधान लालू ने किया। आधी आबादी को लेकर बहुत संज़ीदे रहते थे। उनके साथ काम करने वाली महिला ब्यूरोक्रेट्स कभी असहज नही हुईं। महिलाओं के प्रति बड़ा ही मर्यादित नज़रिया व आचरण रखते हैं लालू प्रसाद। पर, यही बात पूर्व मुख्यमंत्री केबी सहाय या मौजूदा मुख्यमंत्री के लिए पक्के तौर पर नहीं कह सकते। कुछ ब्यूरोक्रेट्स तो कहते हैं कि उनकी गेज़ बड़ा ही अनकंफर्टेबल कर देती।

रमणिका गुप्ता कहती हैं कि “जेंडर के आधार पर मुझे बिहार विधानसभा गालियां कई बार खानी पड़ीं। एक बार मैं कोई मुद्दा उठाते हुए टेबल पर चढ़ गयी तो एक नेता चिल्लाये, "नाच नचनिया नाच"। ऐसे कई अनुभव रमणिका अपने राजनीतिक जीवन के दौरान के बताती हैं। रमणिका यह भी जोड़ती हैं, "मेरी सीट के तब पीछे ही बैठने वाले लालू प्रसाद ऐसी ओछी टिप्पणियों से दूर रहते थे”।

लालू प्रसाद से पहले बिहार में कोई मुख्यमंत्री ही नहीं हुआ जो इतना भी संवेदनशील हो कि हर माह विशेष कष्ट के दिनों में कामकाजी महिलाओं के लिए दो दिन के विशेष अवकाश का प्रावधान करे। बहुधा मीडियानिर्मित धारणाप्रधान समाज में पुष्पित-पल्लवित महिलाएं भूल जाती हैं कि महीने के विशेष कष्ट के दिनों में उनका विशेष ख़याल करते हुए लालू ने सत्ता में आने के दो साल के अंदर सेवारत खवातीन के लिए यह व्यवस्था कर दी। लालू को गरियाने से पहले ज़रा गूगल कर लें कि जो काम लालू ने आज से 25 साल पहले कर दिया था, वो काम आज भी इस देश के कितने सूबों के मुख्यमंत्री कर पाए हैं? यह तो सरासर कृतघ्नता है। कम-से-कम वो तो ‘गंवार’ सीएम रहे लालू का मज़ाक उड़ाना बंद कर दें। उन्हें तो क़ायदे से उनका शुक्रगुज़ार होना चाहिए।

लालू जी कम-से-कम पहनावे-ओढ़ावे के मामले में किसी दिखावे-ढकोसले में कोई बहुत यक़ीन नहीं करते। उनका अपना शऊर है, अपना अंदाज़ है। वो तो लु़ंगी-बनियान में भी यूं ही सहज रहते हैं, इंटरव्यू भी ऐसे ही देते हैं, यही उनका याकि अधिकांश बिहारी परिवारों में पहनने-ओढ़ने का तौर-तरीक़ा है। गांधीजी को क्या कहिएगा कि आदमी नंगधड़ंग था, अशालीन था, अशिष्ट था! (पर, प्रेम कुमार मणि जी के मन में ऐसी खलिश और रंजिश है कि तेजस्वी की तारीफ़ करते हुए भी वो लालू को निशाने पर ले लेते हैं। उन्हें लालू प्रसाद के पहनावे-ओढ़ावे से भी दिक्कत है। अब कोई बताए कि अस्वस्थ हालत में कोई प्रैस से आए कपड़े पहनकर बिस्तर पर लेटकर स्वास्थ्य लाभ करता है? घर में लोग कैसे रहते हैं?)

लालू जी ने तो एक सभा में कुर्ते को खोलकर, बनियान निकालकर कुर्ता पहना, फिर उसके ऊपर बनियान। और, कहा कि अब बिहार में यही होगा। जो नीचे थे, वो अब ऊपर आएंगे, वक़्त का चक्का अब घुमेगा। जब वो यह कहते थे, तो इस अपील का गज़ब का असर होता था।


                          बाबुल इनायत
                         9507860937
सोशल मीडिया प्रभारी राष्ट्रीय जनता दल अररिया बिहार
लालुबिहारकेलाल  बाबुलइनायत BabulInayat Rjd SocialMedia Araria

Tuesday, June 12, 2018

उन्हें लालू आखिर अखरता कियूं है? बाबुल इनायत

उन्हें लालू आखिर अखरता क्यों है ???
वजह दरअसल ये है :
जिस बिहार में लालू यादव के पहले विधानसभा और लोकसभा में आधे से ज्यादे अगड़ी जातियों का बोलबाला था, लालू यादव ने उसे आधे से कम पर लाकर खड़ा कर दिया। नहीं समझें ?
तो आईए आंकडा देखिए -
वर्ष 1980 और 1985 में उच्च जाति के विधायकों की संख्या 118 और 105 थी। वहीं पिछड़ी जाति के विधयकों की संख्या 96 और 90 थी।
लेकिन, जब लालू का आगमन हुआ, तो इस उच्च जातियों के एकाधिकार का मानों पतन शुरू हो गया !
देखिए कैसे :-
1990 में लालुजी की सरकार बनी तो उस वक़्त पिछड़ी जाति के विधायकों की संख्या 117 हो गई और उच्च जाति के विधायकों की संख्या 105 पर आ गई।
यानी कि अपने आने के साथ ही पहली बार बिहार के इतिहास में पहली बार बिहार की बहुसंख्य आबादी के पिछड़ों की सरकार बहुमत में आयी।
अब ये कारवाँ थमा नहीं उल्टा बढ़ता गया। और साथ ही लालू यादव उच्च जातियों के आंखों की चुभन बनता गया।
सामाजिक चेतना इतनी जग चुकी थी लालुजी की दूसरी बार सरकार 1995 में दूसरी बार सरकार बनीं तो उच्च जातियों के विधायकों की संख्या मात्र 56 होके रह गई, और पिछड़ी जातियों के विधयक की संख्या 161 पहुंच गई !
सिलसिला ऐसा शुरू हुआ लालू युग से, कि लालू बाद उच्च जाति कभी बिहार की गद्दी पर बैठ नहीं पाई।
देखा जाए तो वोजि लालू ही हैं जिन्होंने "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी" को लागू करके दिखा दिया !!
आपकी दीर्घायु हों लालुजी।
स्वाभिमान जगाने वाले को नेता ही कहते हैं।
आप नेता हैं और रहेंगे ! ~

Friday, June 1, 2018

लालू प्रसाद यादव विज्ञान ही नही बल्कि इतिहास, भूगोल,संस्कृत,शाश्त्र ओर गणित भी है। बाबुल इनायत

उपचुनाव में जीत के बाद तेजस्वी यादव ने कहा लालू एक विचार है विज्ञान है। इस पर विपक्षी कुछ कहे ना कहे लेकिन आजतक चैनल की एक एंकर मोहतरमा को यह सुन बहुत पीड़ा हुई और उन्हीं के ग्रुप के पोर्टल के एक कोई द्विवेदी महोदय है (हो सकता है ज्ञान उसको शायद एक वेद का भी ना हो लेकिन है तो जन्मजात द्विवेदी) उसको भी तकलीफ के साथ हंसी आ रही थी। तो सुनिए......
● लालू विज्ञान है क्योंकि उन्होंने इन जैसों के मनोविज्ञान को ध्वस्त ही नहीं अपितु चकनाचूर किया।
● लालू विज्ञान है क्योंकि उन्होंने इनके सामाजिक और राजनीतिक वर्चस्व को समाप्त किया।
● लालू विज्ञान है क्योंकि 25 वर्ष से परेशान और प्रताड़ित करने के बावजूद यह शख्स अब भी रीढ़ की हड्डी के दम पर खड़ा होकर, लट्ठ गाड़कर इनकी आँखों में आँखों और मुँह में उंगली डाल दांत गिनने की काबिलियत रखता है।
● लालू विज्ञान है क्योंकि तथाकथित भ्रष्टाचारी होने के बावजूद भी वह विगत 28 वर्ष में से 22 वर्ष से राजा बना बैठा है और कोई माई का लाल उसका बाल भी बांका नहीं कर सका है।
● लालू विज्ञान है क्योंकि देश की तमाम बड़ी से बड़ी जांच एजेंसीया पिछले 22 साल से उनके घर आँगन, खेत-खलिहान से लेकर रसोई और बेड को खोद और खंगाल चुकी है. पूछताछ कर चुकी है, गिरफ्तार कर चुकी है लेकिन इस गुदड़ी के लाल का कुछ नहीं बिगाड़ सकी।
● लालू विज्ञान है क्योंकि उसे गिरफ्तार करने के लिए सेना बुलाई जाती है।
● लालू विज्ञान है क्योंकि अबतक स्वयं घोषित मेरिट वाले यह नहीं जान पाए है कि गंवार, ग्वाला, जोकर, देहाती और अवयस्थित होने के बावजूद ये सभी मेरिटधारी मिलकर भी आरक्षण लागु करवाने वाले इस विचार को ख़त्म कर सकें।
● लालू विज्ञान है क्योंकि इतना बड़ा परिवार होने के बावजूद, जेल जाने के बावजूद, मानसिक तनाव झेलने के बावजूद, CBI-ED-IT की धमकियों के बावजूद, मनुवादी पूर्वाग्रह से ग्रस्त मीडिया के कुछ लोगों के नकारात्मक प्रचार के बावजूद, अनेकों बीमारियाँ होने के बावजूद, अपने चेलों और सहयोगियों से धोखा खाने के बावजूद, सबसे बड़ी पार्टी होने और एक अवसरवादी द्वारा खंजर घोपने के बावजूद, अपने सभी बेटों-बेटियों और रिश्तेदारों पर केस होने के बावजूद, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, राजनीतिक प्रताड़ना के बावजूद यह माटी का लाल, शेरों का शेर आज भी अकेले जातिवादी संघ और उनके अनेकों संगठनों से अकेले बहादुरी से लड़ रहा है।
● लालू विज्ञान है क्योंकि जिस आडवानी को देश में कोई गिरफ्तार नहीं कर पाया उसे इस भैंस चराने वाले ग्वाल ने नकेल डाल जेल में डाल दिया था।
● लालू विज्ञान है क्योंकि इनके 15 वर्ष के राज में कभी कोई दंगा नहीं हुआ।
● लालू विज्ञान है क्योंकि इन्होने मात्र कुछ वर्ष में बिहार में अबतक की सबसे ज़्यादा 7 यूनिवर्सिटी खुलवाई।
● लालू विज्ञान है क्योंकि इन्होने आजादी के बाद रेलवे को सबसे ज्यादा मुनाफा दिया। उनकी कार्यशैली और प्रबंधन गुणों को लेकर विश्व के प्रतिष्ठित Management Institutes ने research ही नहीं अपितु इन्हें व्याख्यान देने के लिए बुलाया।
● लालू विज्ञान है क्योंकि जिन वंचितों, उपेक्षितों और उत्पीड़ितों को कोई चारपाई पर नहीं बैठाता था वो उन्हें सरकारी कार्यालयों में देखकर उठने ही नहीं लगा बल्कि उन्हें कुर्सी देने लगा।
● लालू विज्ञान है कि उन्होंने जूते सिलने वाले को, पत्थर तोडने वाली को, चूहे पकड़ने वाले को, मछली पकड़ने वाले को, ताड़ी तोड़ने वाले को, मिट्ठी खोदने वाले को, कूड़ा बीनने वाले को, गाय-भैंस चराने वाले को, खेतीबाड़ी और पशुपालन करने वाले को, सभी मेहनतशील और कमेरे वर्गों के लोगों को जीता-जिताकर पंचायतों से लेकर देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा और राज्यसभा भेजा और भेज रहे है।
लिखने को बहुत है लेकिन कितना लिखे बस इतना ही समझ लीजिये..
और हाँ अंत में लालू विज्ञान ही नहीं बल्कि इतिहास, भूगोल, संस्कृत, शास्त्र और गणित भी है. दिल्ली के वातानुकूलित केबिनों में बैठकर आप उस विज्ञान को ना समझ सकते है ना देख सकते है. उसके लिए आपको गाँव की पगडंडियों और खेल-खलिहानों की खाक छाननी पड़ेगी।
बाबुल इनायत
9507860937
सोशल मीडिया प्रभारी,राष्ट्रीय जनता दल अररिया बिहार