दिल्ली जाते समय गया स्टेशन पे ली गई तस्वीर
ये तस्वीरें शर्मनाक हैं. लोकतंत्र पर धब्बा हैं. लालू यादव जब जेल गए थे तो पूरी तरह तंदुरुस्त थे. अभी की हालत फोटो में देख लीजिए. ये फोटो बिहार के गया रेलवे स्टेशन पर ली गई है. सुना है कि लालू को इलाज के लिए उनके निजी खर्चे पर भी हवाई जहाज से दिल्ली लाने नहीं दिया गया. सच्चाई आप लोग पता करिए.अगर घोटाला लालू की सजा है तो इस देश में बड़े से बड़े घोटालेबाज छुट्टा घूम रहा है. अब तक राजनीति में एक शर्म-हया बाकी रहती थी, वो अब खत्म हो गई है. मैंने कहीं पढ़ा था कि जब बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी गंभीर रूप से बीमार थे और विदेश में इलाज कराने के वास्ते उनके पास पैसे नहीं थे, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री कांग्रेस के राजीव गांधी ने रास्ता निकालकर अटलजी को विदेश भेजा और इलाज कराया. अटल जी ताउम्र राजीव गांधी का ये एहसान मानते रहे और जब राजीव की हत्या हुई और रिपोर्टर अटल जी के पास इस मौत पर प्रतिक्रिया लेने पहुंचे तो अटल जी ने कहा- आप लोग कुछ भी कर लो पर मैं राजीव जी के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलूंगा. अगर आज मैं जिंदा हूं, तो सिर्फ राजीव गांधी की बदौलत.
तो ये थी हमारे देश की राजनीति और हमारा लोकतंत्र. लालू यादव को देखकर यकीन नहीं हो रहा कि धुत्त बुड़बक बोलने वाला ये शख्स जेल में कितना कमजोर और लाचार बना दिया गया है. मैं निजी तौर पर इसका सख्त विरोध करता हूं. विचारधारा और राजनीति में हम असहमत हो सकते हैं पर ये निजी दुश्मनी में नहीं बदलनी चाहिए.
एक बार फिर कह रहा हूं. अगर चारा घोटाला लालू का अपराध है तो सिर्फ एक दिन के लिए मुझे सुप्रीम कोर्ट का जज बना दीजिए. अलग-अलग पार्टियों के भक्तों के जितने भी आराध्य नेता हैं, उन सबको एक ही दिन में Suo moto लेकर जेल में ना ठूंस दिया, तो फिर ये सारी पढ़ाई-लिखाई बेकार है.
कानून और न्यायपालिका के नाम पे किसे मूर्ख बना रहे हो बे ! अगर इतना ही जिगरा है तो जरा विजय माल्या, नीरव मोदी, चोकसी जैसों को वापस ला के दिखाओ ना ! और कहां हैं शरद यादव जो पिछड़ों के मसीहा बने फिरते हैं? कहां हैं रामविलास पासवान ??
एक बार फिर कह रहा हूं. अगर चारा घोटाला लालू का अपराध है तो सिर्फ एक दिन के लिए मुझे सुप्रीम कोर्ट का जज बना दीजिए. अलग-अलग पार्टियों के भक्तों के जितने भी आराध्य नेता हैं, उन सबको एक ही दिन में Suo moto लेकर जेल में ना ठूंस दिया, तो फिर ये सारी पढ़ाई-लिखाई बेकार है.
रामविलास पासवान को शर्म नहीं आती ? जब ये आदमी खुद जेल में था तो लालू उन्हें ढांढस बंधाने औरे मिलने जेल गए थे. पासवान ने खुद कहा था कि तब उनकी आंखों में आंसू आ गए थे. कितने कृतघ्न हो तुम रामविलास पासवान ? कितने नौटंकी हो तुम शरद यादव ? और नीतीश कुमार ? जेपी आंदोलन की छड़ी पकड़कर निकले इस आदमी ने कब खुद का जमीर मार दिया, पता नहीं.
राजनीति होती रहती है, पर लोकतंत्र उससे बड़ा है. ये देश एक संप्रभु राष्ट्र है, किसी की बपौती नहीं. लालू यादव अगर बीमार हैं तो उन्हें देश का अच्छे से अच्छा इलाज मिलना चाहिए. जरूरत पड़े तो विदेश भी ले जाना चाहिए. लेकिन एक शेर को इस तरह जंजीरों में बांधकर उसे मारने की कोशिश करेंगे तो जनता सब देख रही है. और जनता माफ नहीं करती.
वह बहुत क्रूरता से फैसला देती है. घमंड ना तो सिकंदर का टिका और ना हिरण्यकश्यप का. ना धरती पर और ना आकाश में, ना मनुष्य द्वारा और ना किसी जानवर द्वारा. मौत कैसे होगी फिर ? कौन मार सकता था उसे ? फिर खंभा फाड़कर नरसिंह अवतार आए. उसे ना आसमान में मारा और ना जमीन पर, बस जंघा पर बिठा के पेट चीर दिया अपने नाखूनों से.
जनता भी नरसिंह अवतार लेती है. जिनको इस बात पर यकीन नहीं, वो इस देश के लोकतंत्र का इतिहास देख ले. ये मजाक था क्या कि दिल्ली में जनता ने अरविंद केजरीवाल जैसे नौसिखिए को आंख मूंदकर सत्ता सौंप दी थी. इसलिए डरिए. जनता न्याय करती है. तौलकर हवा में उछालती हैं और फिर तराजू के पलड़े पर रखके कांटा बराबर कर देती है.
इंतजार कीजिए..,......
बाबुल इनायत
9507860937
सोशल मीडिया प्रभारी,राजद अररिया बिहार
