युवा साथियों /बुद्धिजीवियों / देश प्रेमियों.
जो लोग बचपन में ये सपना देखते के अगर आजादी से पहले मैं भी पैदा होता तो मैं भी गाँधी,नेहरू और आजाद के तरह स्वतंत्रता सेनानी हो कर अमर हो जाता, उनके लिए अच्छा मौका है..
उन्हें बता दूं के देश दुबारा गुलाम हो चुका है, संविधान का कोई मूल्य नहीं रहा..
संविधान का पहला पेज (Preamble) को ही नकार दिया गया है..
अब देश केवल गुंडों वालों स्टाइल में चलाया जा रहा है.अब संविधान नहीं रहा..
ग़ुलामी का मतलब ये नहीं के आप को आप के घर में ताला लगा कर बंद कर के ही साबित किया जाए के आप गुलाम हैं .. वैसे कश्मीर और आसाम में ऐसा भी हो चुका है.. क्या आप भी इसी इंतज़ार में हैं.??
आसाम में कर्फ्यू लगा कर आवाज़ दबा दिया गया है.. लोग रो रहे हैं.. ये लोग पूरे देश को पुकार रहे हैं.. आप को पुकार रहे हैं.
आप की बारी आए उससे पहले स्वतंत्रता सेनानी बन कर देश को 2 तानाशाह से आज़ाद करा लें. वैसे आप के प्रेशर के कारण जय चंद और मीर जाफर जैसे लोग घरों में दुबक चुके हैं..
लड़ाई बहुत मुस्किल भी नहीं है.. #बुद्धिजीवियों से अनुरोध है के अपने बच्चों को प्रोत्साहित करे इस लड़ाई के लिए. अब केवल सोशल मीडिया से काम नहीं चलेगा.
ये वक़्त आपसी मत भेद भुलाने का है, बिना कोई स्वार्थ और बैनर के इस लड़ाई को अन्जाम तक पहुंचाए।
फिर भी आप में किसी को किसी से कोई दिक्कत या किसी पे कोई शक है तो इग्नोर कीजिए और आप अलग ही सही अपने स्तर से कुछ ना कुछ बड़ा किजिये, आंदोलन किजिये..
रोड़ पे उतर जाएं तभी इतिहास आप को दिल में उतारेगी।
आज के दौर के स्वतंत्रता सेनानी बने....


