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Wednesday, June 13, 2018

लालू प्रसाद यादव अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा ब्लॉक बनवाए,सबसे ज्यादा प्राथमिक विद्यालय खोले,सबसे ज्यादा यूनिवर्सिटी की स्थापना की। बाबुल इनायत

सबसे अधिक ब्लॉक लालू ने बनाए, सबसे ज़्यादा प्राथमिक विद्यालय लालू ने खोले, सबसे ज़्यादा युनिवर्सिटी की स्थापना लालू ने की। कामकाजी महिलाओं के लिए माहवारी के दिनों में विशेष कष्ट का ख़याल करते हुए विशेषावकास का प्रावधान लालू ने किया। आधी आबादी को लेकर बहुत संज़ीदे रहते थे। उनके साथ काम करने वाली महिला ब्यूरोक्रेट्स कभी असहज नही हुईं। महिलाओं के प्रति बड़ा ही मर्यादित नज़रिया व आचरण रखते हैं लालू प्रसाद। पर, यही बात पूर्व मुख्यमंत्री केबी सहाय या मौजूदा मुख्यमंत्री के लिए पक्के तौर पर नहीं कह सकते। कुछ ब्यूरोक्रेट्स तो कहते हैं कि उनकी गेज़ बड़ा ही अनकंफर्टेबल कर देती।

रमणिका गुप्ता कहती हैं कि “जेंडर के आधार पर मुझे बिहार विधानसभा गालियां कई बार खानी पड़ीं। एक बार मैं कोई मुद्दा उठाते हुए टेबल पर चढ़ गयी तो एक नेता चिल्लाये, "नाच नचनिया नाच"। ऐसे कई अनुभव रमणिका अपने राजनीतिक जीवन के दौरान के बताती हैं। रमणिका यह भी जोड़ती हैं, "मेरी सीट के तब पीछे ही बैठने वाले लालू प्रसाद ऐसी ओछी टिप्पणियों से दूर रहते थे”।

लालू प्रसाद से पहले बिहार में कोई मुख्यमंत्री ही नहीं हुआ जो इतना भी संवेदनशील हो कि हर माह विशेष कष्ट के दिनों में कामकाजी महिलाओं के लिए दो दिन के विशेष अवकाश का प्रावधान करे। बहुधा मीडियानिर्मित धारणाप्रधान समाज में पुष्पित-पल्लवित महिलाएं भूल जाती हैं कि महीने के विशेष कष्ट के दिनों में उनका विशेष ख़याल करते हुए लालू ने सत्ता में आने के दो साल के अंदर सेवारत खवातीन के लिए यह व्यवस्था कर दी। लालू को गरियाने से पहले ज़रा गूगल कर लें कि जो काम लालू ने आज से 25 साल पहले कर दिया था, वो काम आज भी इस देश के कितने सूबों के मुख्यमंत्री कर पाए हैं? यह तो सरासर कृतघ्नता है। कम-से-कम वो तो ‘गंवार’ सीएम रहे लालू का मज़ाक उड़ाना बंद कर दें। उन्हें तो क़ायदे से उनका शुक्रगुज़ार होना चाहिए।

लालू जी कम-से-कम पहनावे-ओढ़ावे के मामले में किसी दिखावे-ढकोसले में कोई बहुत यक़ीन नहीं करते। उनका अपना शऊर है, अपना अंदाज़ है। वो तो लु़ंगी-बनियान में भी यूं ही सहज रहते हैं, इंटरव्यू भी ऐसे ही देते हैं, यही उनका याकि अधिकांश बिहारी परिवारों में पहनने-ओढ़ने का तौर-तरीक़ा है। गांधीजी को क्या कहिएगा कि आदमी नंगधड़ंग था, अशालीन था, अशिष्ट था! (पर, प्रेम कुमार मणि जी के मन में ऐसी खलिश और रंजिश है कि तेजस्वी की तारीफ़ करते हुए भी वो लालू को निशाने पर ले लेते हैं। उन्हें लालू प्रसाद के पहनावे-ओढ़ावे से भी दिक्कत है। अब कोई बताए कि अस्वस्थ हालत में कोई प्रैस से आए कपड़े पहनकर बिस्तर पर लेटकर स्वास्थ्य लाभ करता है? घर में लोग कैसे रहते हैं?)

लालू जी ने तो एक सभा में कुर्ते को खोलकर, बनियान निकालकर कुर्ता पहना, फिर उसके ऊपर बनियान। और, कहा कि अब बिहार में यही होगा। जो नीचे थे, वो अब ऊपर आएंगे, वक़्त का चक्का अब घुमेगा। जब वो यह कहते थे, तो इस अपील का गज़ब का असर होता था।


                          बाबुल इनायत
                         9507860937
सोशल मीडिया प्रभारी राष्ट्रीय जनता दल अररिया बिहार
लालुबिहारकेलाल  बाबुलइनायत BabulInayat Rjd SocialMedia Araria