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Thursday, October 11, 2018

Thursday, September 27, 2018

माननीय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जी रिटायर होने से पहले दनादन बैटिंग कर रहे हैं।

माननीय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जी रिटायर होने से पहले दनादन बैटिंग कर रहे हैं। इतने महत्वपूर्ण 8 फैसले न जाने क्यों रिटायरमेंट के आखिरी 4 दिनों के लिए रोक कर रखे गए थे ? SC/ST के प्रमोशन में आरक्षण के फैसले के साथ ये क्रीमी लेयर वाली नई बहस छिड़वा दी गयी,जबकि संविधान में कहीं भी क्रीमी लेयर शब्द का जिक्र तक नही है। आधार जरूरी नही है लेकिन पैन जरूरी है। अरे,कहना क्या चाहते हो ? पब्लिक अभी भी कन्फ्यूज है। एडल्ट्री 497 एक ऐसा कानून था जिसमे कोई औरत अपने पति की मर्जी के बिना किसी से सेक्स संबन्ध स्थापित नही कर सकती थी,यदि पति की मर्जी से सेक्स करती तो जिसके साथ संबन्ध स्थापित करती उसे सजा होती। ये क्रांतिकारी फैसला है। अब औरतें आसानी से अपने पति को नपुंसक कहकर अपनी मन मर्जी कर सकती हैं। प्यार मोहब्बत के नाम पर कोई भी जोड़ा अब आराम से शहर के किसी होटल में कुछ घण्टो के लिए कमरा बुक करवा सकता है। इसके लिए पति पत्नी होने की कोई बाध्यता नही है। पुलिस कुछ नही कर पायेगी। वाइफ स्वैपिंग अभिजात्य वर्ग तक सीमित था अब हसबैंड स्वैपिंग का कल्चर सामाजिक स्वीकृति पायेगा। गली गली डीएनए टेस्ट वाली लैब खुल जाएंगी,क्योंकि जब कोई भी माता पिता अपनी औलाद को किसी दूसरे की बता देंगे,तो वो अपने पिता को पिता कैसे साबित करेंगे ? उच्चतम न्यायालय के 377 यानी होमो सैक्सुअलटी के निर्णय के बाद फेसबुक पर चिकने ब्लू पेज और ग्रुप्स की भरमार हो गयी है। लगता है कुछ दिन बाद बाकायदा इसके लिए sms या कॉल भी आनी शुरू हो जाएंगी। लिव इन रिलेशनशिप के फैसले से जेंडर फ्रीडम मिला है। गोबर पाथने वाली लड़की भी इसके मायने समझने लगी है। खुदा करे,इन सभी फैसलों के फायदे हमारे पड़ोसी को जरूर मिलें। अपने घर मे ये सब अच्छा नही लगता। मेट्रो कल्चर अब गाँव कस्बे में भी मोबाइल के जरिये पहुंच जाएगा। विकास कह सकते हैं। अब लगे हाथ राम मंदिर पर भी मालिकाने हक़ का फैसला आ जाये तो सभी गंगा नहा लें। हमारे यहाँ माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करने की परंपरा रही है। सरकार भी सहमत है, यदि न होती तो फैसलों के विरुद्ध संसद मे अध्यादेश ले आती। इसलिए सभी निर्णय सराहनीय है। आप भी चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जी के सेवानिवृत्त होने के बाद उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी ही दीजिये। वैसे भजन मंडली चाहे तो ट्रिपल तलाक की तर्ज पर इन सभी फैसलों का क्रेडिट मोदी जी को दे सकती है। भेड़चाल है मित्रों, इसी बहाने रॉफेल घोटाला,चौकीदार चोर सब भूल जाइए। मीडिया भी तो यही कर रही है। आप भी इसी बहस में उलझ जाइये। किसी के रोकने से कोई नही रुकता है !

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