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Saturday, December 1, 2018

उपेन्द्र कुशवाहा जी को बार बार बीजेपी और जदयू द्वारा बेइज्जत करने के बाबजूद भी,आज उपेन्द्र कुशवाहा जी आशा भरी नजरों से बीजेपी की ओर ही उम्मीद लिए बैठे हैं, किया उपेन्द्र जी को महागठबंधन में शामिल किया जाना चाहिए पर हमारी राय ?

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उपेन्द्र कुशवाहा जी को बार बार बीजेपी और जदयू द्वारा बेइज्जत करने के बाबजूद भी,आज उपेन्द्र कुशवाहा जी
आशा भरी नजरों से बीजेपी की ओर ही उम्मीद लिए बैठे
हैं, किया उपेन्द्र जी को महागठबंधन में शामिल किया जाना चाहिए पर  बाबुल इनायत की राय?



उपेन्द्र कुशवाहा भारतीय राजनीति में अभी अपने कारणों से उस हाशिए पर चलें गये हैं, वो अब ना घर के बचे ना घाट के, लगातार 1 माह से उपेन्द्र कुशवाहा का चल रहा राजनीतिक ड्रामा देखकर यही लग रहा है, वो सही निर्णय लेने में पुरी तरह से असक्षम हैं।

और हों भी क्यो ना जो पार्टी ही बैशाखी पर खड़ा हो,जिसका अपना कोई जनाधार ही नहीं हो, कभी बीजेपी के वोटबैंक बल पर संसद बन जाते हों,तो कभी महागठबंधन के इंतजार में।

मुझे समझ में नहीं आता, इतनी फहजिहत के बाबजूद जो व्यक्ति अभी भी फोन के इंतजार में हो, तो किया महागठबंधन में आने के बाद वो लम्बे समय तक चल सकतें हों, ऐसा देखकर मुझे ये लग रहा हैं की कुशवाहा जी को मंत्री प्रेम ज्यादा हैं, कही महागठबंधन में जाने
के बाद, राजद के वोट से ये और उनके उम्मीदवार जितने सीट मिले महागठबंधन में जीतकर, यदि बीजेपी की सरकार केन्द्र में बनें तो, मंत्री लोभ में फरार ना हो जाए।

क्योकि मैं जो समझ जो पा रहा हूँ, 30नवम्बर को जब 10 बजें एयरपोर्ट पर पत्रकार बंधु ने पुछा,आज तो 30 तारीख
हैं तो कहते हैं,दो घंटा बचा हैं, फिर 1 नवंबर को कहते हैं 6
तारीख़ को फैसला हैं, उम्मीद नहीं छोड रहें हैं।

बीजेपी से ये अपने आप में बडा सवाल है,  बात रहीं महागठबंधन की तों ये तय हैं की मैं लिखकर दे रहा हूं, यदि उपेन्द्र कुशवाहा राजद के वोट से 4 भी सांसद बना लिया तो, 2020 में सिरदर्द साबित होना तय हैं, पहले ये विधानसभा में सीट ज्यादा मांगेगा , उसके बाद बोलेगा मुख्यमंत्री उससे नहीं चला तो, उपमुख्यमंत्री नहीं दिये तो अलविदा कह देगा।

माझी जी अभी से ही 2 उपमुख्यमंत्री का जाप जप रहें हैं ,  एक माझी के पार्टी से उपमुख्यमंत्री होगा ,एक कांग्रेस फिर कुशवाहा जी कहां जायेंगे।

  मतलब नया नौटंकी होना तय हैं , .....

तो क्यो ना अभी ही पुरी तरह से क्लीयर करके गठबंधन किया जाए, नहीं माने तो हमारे हिसाब से अकेला ही छोड दिया जाए, क्योंकि कुशवाहा पार्टी का जनाधार बिहार में कितना है,सभी को पता हैं , और कुशवाहा किनका वोट काटेगा, ज्यादा वो भी पता हैं , ये अपनी राय हैं !!!!!!!

मैं महागठबंधन के पक्ष में हूं, लेकिन नये पार्टीयों के आने से तकलीफ आम जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं की होती है , 5 साल झंडा राजद का वो ढोते हैं , सांसद दुसरे पार्टी के लोग बन जातै हैं , और अंत में वो पार्टी वाले ... गठबंधन भी तोड़कर चलें जातें हैं !!!!

कुशवाहा जी को माझी की तरह बोलना होगा ....…... महागठबंधन में बिहार के मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को ही मानता हूं और आगे भी ये भी हमारे मुख्यमंत्री रहेंगे , तब ही गठबंधन हो तो बात नहीं तो फिर रहिए ,झटका खाने को तैयार रहिए। ........

ये हमारी अपनी राय हैं , वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है !!!!
#babulinayat