Wednesday, October 10, 2018

विभाजनकारी संघी पाठशाला के संकीर्ण विचार के छात्र नरेंद्र मोदी ने कल हरियाणा में दीनबंधु सर छोटूराम को नीचा दिखाया।

विभाजनकारी संघी पाठशाला के संकीर्ण विचार के छात्र नरेंद्र मोदी ने कल हरियाणा में दीनबंधु सर छोटूराम को नीचा दिखाया। प्रधानमंत्री की सोच पर तरस आता है। फेंकू और कृत्रिम स्वभाव के धनी मोदी जी ने हरियाणवी बोली में भाषण की शुरुआत करी। वैसे ये हर प्रदेश में जाकर वहाँ की भाषा में शुरुआती दो-तीन वाक्य बोलते है तो बड़े बनावटी लगते है।
ख़ैर, कल प्रधानमंत्री मोदी ने सर छोटूराम के संपूर्ण व्यक्तित्व को उन्हें “जाटों का मसीहा” बताकर समेट दिया। मुझे इस बात पर सख़्त आपत्ति है। ये विषैले संघी लोग कमेरे और श्रमशील वर्गों के महापुरुषों को अब उनकी जाति तक ही सीमित करने की साज़िश रचने लग गए है। महापुरुष किसी जाति विशेष के नहीं होते। अगर मोदी जी सर छोटूराम को केवल जाटों का मसीहा समझते हैं तो वो देश के करोड़ों ग़रीब किसान मजदूरों के नेता का कद छोटा कर रहे हैं। अरे मोदी जी, आपके शरणार्थी संघी गुरु उनके पैरों की धूल भी नहीं है।
दीनबंधु चौधरी छोटूराम सिर्फ़ जाटों के मसीहा नहीं थे, बल्कि वे समस्त किसान क़ौम, कमेरे और कामगारों के मसीहा थे। ऐसी शख़्सियत को सिर्फ़ जाटों का मसीहा कहना, उनकी तौहीन करने वाली बात है।
मोदी जी, दलित और पिछड़े लोगों ने उन्हें 'दीन बंधु' माना जबकि अंग्रेज़ों ने उन्हें 'सर' की उपाधि दी थी। वो उनके काम की वजह से था, ना कि जाति की वजह से। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि उनकी वजह से अविभाजित पंजाब प्रांत में न तो मोहम्मद अली जिन्ना की चल पायी और ना ही हिंदू महासभा की। वो उस पंजाब प्रान्त की सरकार के मंत्री थे जिसका आज दो तिहाई हिस्सा पकिस्तान में है। उन्हें सरकार का मुखिया बनने का अवसर मिला तो उन्होंने कहा कि तत्कालीन पंजाब प्रांत में मुसलमानों की आबादी 52 प्रतिशत थी। इसलिए उन्होंने किसी मुसलमान को ही मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश की और खुद मंत्री बने रहे. इसलिए ही उन्हें 'रहबर-ए-हिन्द' की उपाधि दी गयी थी।
मोदी जी, ऐसी महान शख़्सियत को एक क्षेत्र और जाति के दायरों में ही सीमित करने की कोशिश मत किजीए।


पीएम मोदी की रैली में जबरदस्त हूटिंग। हजारों नौजवानों ने 'मोदी- गो बैक' के नारे लगा कर भाषण में डाला व्यवधान।


#पीएम मोदी की रैली में जबरदस्त हूटिंग
#हजारों नौजवानों ने 'मोदी- गो बैक' के नारे लगा कर भाषण में डाला व्यवधान
#इधर मोदी का भाषण चलता रहा , उधर पीछे पंडाल खाली हो गया
#पूरे प्रदेश से प्राइवेट स्कूलों की बसों में ढ़ो कर लाने के बाद भी भीड़ 25 हजार ही पहुंची
#हरियाणा के तीन सांसद- केंद्रीय मंत्री राव इंद्र जीत सिंह , अश्विनी चोपड़ा व राजकुमार सैनी रैली से रहे नदारद

सांपला (रोहतक) । रहबरे-आजम व किसानों के मसीहा चौधरी छोटूराम की जयंती के मौके पर सांपला में आयोजित रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बुरी तरह हूटिंग हो गई । किसी प्रधानमंत्री की ऐसी हूटिंग पहले शायद ही कभी हुई हो । पिछले चार साल के शासनकाल के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की सार्वजनिक रूप से ऐसी छिछालेदारी देश में शायद कहीं भी नहीं हुई । मोदी जी का पूरा भाषण ही हूटिंग की भेंट चढ़ गया ।

गौरतलब है कि मोदी जी का भाषण शुरू होने तक सब कुछ एकदम शांत था और भीड़ एकदम अनुशासनबद्ध तरीके से बैठी हुई थी । मोदी जी के भाषण के लिए खड़े होते ही लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट और 'मोदी-मोदी' के नारों से उनका स्वागत किया । लग रहा था कि अभी भी हरियाणा में मोदी जी का जादू बरकरार है । मोदी जी ने शुरूआत में 'सर छोटूराम , अमर रहें -अमर रहें' के नारे लगवाये , जिसका लोगों ने खूब गर्मजोशी से जवाब दिया । इसके बाद मोदी जी ने सर छोटूराम के गुणगान शुरू किये और किसानों की भलाई के लिए किए गये उनके कामों को गिनाने लगे । अचानक प्रेस गैलरी के पीछे से शोर शराबा सुनाई देने लगा । हजारों की तादाद में नौजवान दोनों हाथ हिला हिला कर कहने लगे , हमें नहीं सुनना आपका भाषण । बीजेपी नेता समझ नहीं पा रहे थे कि अचानक यह क्या झमेला शुरू हो गया ? इन नौजवानों के शोर के कारण किसी को मोदी जी का भाषण पल्ले नहीं पड़ रहा था । लेकिन मोदी जी ने भी हूटिंग से विचलित हुए बिना अपना भाषण जारी रखा । उन्होंने न तो कोई राजनीतिक बातें हीं की और न किसी की आलोचना करने का प्रयास ही किया । उनका पूरा भाषण सर छोटूराम , सरदार पटेल और किसानों की समस्याओं पर ही केंद्रित रहा ।
बीजेपी के कुछ नेताओं ने मोदी का विरोध कर रहे नौजवानों को शांत कराने का प्रयास किया , लेकिन ये नौजवान पूरे समय खड़े ही रहे और समझाने क् उन पर कोई असर नहीं हुआ । उन्होंने कुर्सियों पर बैठने का उपक्रम तक नहीं किया । प्रेस गेलरी के पीछे मौजूद पुलिस कर्मी मूक दर्शक बने रहे और उन्होंने विरोध करने वालों को खदेड़ने का कोई प्रयास नहीं किया। यदि नारेबाजी व हूटिंग करने वाले की तादाद कम होती तो पुलिस उन्हें दबोच भी लेती , लेकिन हजारों लोगों की भीड़ को खदेड़ने के उपक्रम में हालात खराब होने का अंदेशा था । पंडाल में भगदड़ मचने की अाशंका के चलते पुलिस शांत बनी रही। अगर भगदड़ मच जाती तो बहुत लोगों की जानें जा सकती थीं । स्टेज और हूटिंग करने वालों के बीच में सिर्फ वीआईपीज , सरकारी अधिकारियों व प्रैस संवाददाताओं की गैलरियां ही थीं । हूटिंग करने वालों के लगातार खड़े रहने और शोर मचाने के कारण पंडाल में पीछे बैठे लोगों को कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था । इस वजह से पीछे की कुर्सियों पर बैठे लोग उठ कर पंडाल से बाहर जाने लगे । नतीजा यह हुआ कि मोदी जी का भाषण खत्म होने से पहले ही आधा पंडाल खाली हो चुका था ।

मोदी जी के भाषण के खत्म हो जाने और उनके स्टेज से चले जाने के बाद भी कुछ देर तक ये हुड़दंगी नौजवान शोर मचाते रहे ।

वैसे भाषण देते समय मोदी के चेहरे के भाव लगातार रंग बदलते रहे। हुडदंगी नोजवानों की भीड़ के शोरशराबे व नारेबाजी के कारण वे बैचेन जरूर दिखे, लेकिन उन्होंने संयम बनाए रखा और हुडदंगियों को धमकाने या चेतावनी देने की कोई कोशिश नहीं की और अपना भाषण जारी रखा। लेकिन स्टेज पर बैठे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की हालत देखने लायक थी। वे बेबसी से हाथ मलते रहे और कुछ नहीं कर सके। बीजेपी के तमाम आला नेताओं के चेहरे आज के इस नजारे को देखकर उतरेहुए नजर आये परंतु कुछ ऐसे नेता भी थे, जिनके चेहरे खिले हुए दिखाई दिए।

सबसे बुरी हालत पुलिस व गुप्तचर एजेंसियोंके आला अधिकारियों की दिखाई दी, जिनकी जिम्मेदारी हुड़दंगियों पर निगाह रखने की थी। गुप्तचर एजेंसियों के जासूसों को भनक तक नहीं लगी और हजारों की तादाद में हुडदंगी स्टेज के इतने करीब तक पहुंच गये। अगले एकाध दिन मे रोहतक जिले के बड़े अधिकारियों तथा गुप्तचर एजेंसियों के अफसरों पर आज के घटनाक्रम को लेकर गाज गिरने की पूरी संभावना है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में इतनी बड़ी तादाद में हुडदंगियों का निर्विध्न पहुंचना सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ी चूक है।

लगता है कि राज्य सरकार को रैली में कम भीड़ आने की संभावना पहले से ही दिखाई दे गई थी। इसलिए रैली के लिए बहुत छोटा पंडाल लगाया गया था। पंडाल में बैठने के लिए सभी के हेतू कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी। कुर्सियों की संख्या और पंडाल के क्षेत्रफल के हिसाब से इस पंडाल में बीस हजार से ज्यादा भीड़ नहीं जुट सकती। परंतु पंडाल से बाहर भी तकरीबन पांचेक हजार लोग मौजूद थे। इस हिसाब से पच्चीस से तीस हजार की भीड़ रैली में आई थी जो कि मोदी जी के कद के हिसाब से बहुत कम है और भीड़ के हिसाब से रैली फ्लॉप कही ज् सकती है। ये भीड़ भी प्राइवेट स्कूलों की सैंकड़ों बसों को कब्जे में लेकर ढ़ोई गई थी। पूरे प्रदेश भर से लोगों को ढ़ो कर लाया गया था। खुद मोदी जी ने अपने भाषण के अंत में कहा कि पंजाब, हरियाणा व राजस्थान से आये सभी लोगों का रैली में आने के लिए धन्यवाद। यानि मोदी जी भी मानते हैं कि ये भीड़ तीन राज्यों की थी। वैसे दिल्ली की बसें भी भीड़ लेकर रैली में आई हुईं दिखीं।

वैसे प्रधानमंत्री के साथ बैठने का मौका सिर्फ चंद लोगो को ही मिल पाया। केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्रसिंह व कृष्णपाल, मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर, हरियाणा के कृषिमंत्री ओमप्रकाश, हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेवनारायण आर्य, हिमाचल के राज्यपाल देवव्रत और जम्मू काश्मीर के राज्पाल सतपाल मलिक ही मंच पर विराजमान हो सके। हरियाणा सरकार के बाकी सभी मंत्रियों व विधायकों को एक अलग मंच पर बैठाया गया। हरियाणा के वित्त मंत्री अभिमन्यु ने भी पीएम के मंच पर चढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन एसपीजी के कमांडोज ने उन्हें हाथ पकड़कर पीछे कर दिया और स्टेज पर न चढ़ने दिया। वैसे हरियाणा बीजेपी के तीन लोकसभा सदस्यों की आज की रैली में गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। ये हैं केंद्रीय मंत्री व गुरूग्राम के लोकसभा सदस्य इंद्रजीत सिंह, करनाल के सांसद और पंजाब केसरी संपादक अश्विनी चोपड़ा तथा कुरूक्षेत्र सांसद राजकुमार सैनी।
#babulinayat

Thursday, October 4, 2018

किसान सड़क पर क्यों ? थोड़ा लम्बा लेख है। फिर भी पढ़िए।

4 साल 4 महीने बीतने के बाद आखिर में सरकार ने किसानों को MSP का झुनझुना पकड़ा दिया है। जो यथार्थ के धरातल पर महज एक जुमला साबित हुआ है। अभी तक सिर्फ पूंजीपतियों के फायदे के लिए देश मे फसलों का पर्याप्त उत्पादन होने के बावजूद भी भारी-भरकम रकम खर्च करके विदेशो से खाद्य उत्पादों का आयात किया जा रहा था। आयात करने वाले बीजेपी को चंदा देने वाले मोटे सेठ लोग थे। मोदी जी अपने इन्ही वित्तपोषकों के चुनावी चंदे की क़िस्त चुकाने विदेश जाते हैं।

याद कीजिये मोज़ाम्बिक से दाल, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से गेहूं, आलू, ब्राज़ील से राॅ शुगर, मेक्सिको और अफ्रीका से सरसों, सोयाबीन और यहां तक कि पाकिस्तान से प्याज़ और शक्कर का आयात किया गया था।

इन्ही पूंजीपतियों के फायदे के लिए अनाजों,दालों पर इम्पोर्ट ड्यूटी हटाकर या कम कर आयात सस्ता किया गया। जबकि देश का किसान अपनी उपज घोषित सरकारी मूल्य से भी कम दामो में मंडी में बेचने को मजबूर किया गया। कोई आरटीआई एक्सपर्ट हो तो कृषि और वाणिज्य मंत्रालय से सूचना प्राप्त कर पुष्टि कर सकता है।

देश मे इस साल 4.5 मिलियन टन दाल का उत्पादन हुआ है,जबकि कुल घरेलू मांग 3.2 मिलियन टन है। इसके बावजूद भारत सरकार के केंद्रीय वाणिज्य एवम उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशक ने इसी 11 जून को आदेश पारित किया है कि 31 अगस्त तक म्यांमार एवम अफ्रीकी देशों से 199891 मीट्रिक टन अरहर दाल,149964 मीट्रिक टन मूंगदाल,149982 मीट्रिक टन उड़द दाल मंगा लिए जाए। यह आदेश मोदी जी के वर्ष 2016 के म्यांमार एवम अफ्रीकी देशों की यात्रा के दौरान किये गए समझौतों के अनुपालन में दिए गए थे।

पिछले साल बाजरे का समर्थन मूल्य 1405 रु घोषित किया था।1100- 1200 के बीच बिका।इस साल के लिए 1900 रु से ऊपर तय किया है तो मंडी में 1150 रु में बिक रहा है।

इस साल दाल का समर्थन मूल्य 5050 रु प्रति कुंतल था जबकि किसान खुले बाजार में 4000 रु प्रति कुंतल बेचने पर मजबूर हुआ है।

गेँहू का समर्थन मूल्य 1735 रु प्रति कुंतल था लेकिन किसान का गेँहू मंडी में 1450 - 1530 रु कुंतल में गया।

अभी तक देश के गन्ना किसानों का 22 हजार करोड़ रु भुगतान नही हुआ औऱ दूसरी तरफ पाकिस्तान से चीनी मंगा ली गयी।

लागत मूल्य में बाजीगरी कर अब न्यूनतम समर्थन मूल्य का डेढ़ गुना दाम देने की बात से किसानों को गुमराह किया गया। मंडी और व्यापारियों के चक्रव्यूह को भेदना इतना आसान होता तो किसान अपने फसली उत्पाद औऱ दूध सड़को पर न फेंक रहा होता। दूध के नाम पर याद आया ,तनिक सहकारी डेयरी में पशुपालकों द्वारा बेचे गए दूध के दाम तो चेक कीजिये। पिछले दो साल की तुलना में अब पौने रेट मिल रहे हैं,जबकि पशु आहार के दाम ड्योढ़े हो चुके हैं।

पूंजीवादियों की पोषक इस सरकार ने पहले खाद ,यूरिया की 50 किलो की बोरी का वजन 5 किलो घटा कर 45 किलो कर दिया फिर दाम बढ़ा दिए।

डीजल के बढ़े दामो का सीधा प्रभाव खेती की लागत पर पड़ता है। कीटनाशकों के दाम भी आसमान छू रहे हैं।

कभी शक्कर,चिप्स, कोल्डड्रिंक के दाम घटते सुने हैं ? नही न,इसी से सरकारी नीतियों में किसानों पर व्यापारियों की महत्ता का अंदाजा लगा लीजिये।

धन्नासेठ उद्योगपतियों को कर्जमाफी और अन्नदाता किसानों को गोली लाठी ? अब ये नही चलेगा। एक झूठे ने 2014 से पहले हर चुनावी रैली और पोस्टरों में झूठे वायदे कर जनता को ठग लिया था। अब नही ठग पायेगा। गाँव वाले बड़े परपंची होते हैं। टाइम भी खूब है। जबाब मिलेगा !
#babulinayat

Sunday, September 30, 2018

एक संस्था ने बिहार में चुनाव पूर्व, सर्वे किया है किन्तु सर्वे का प्रस्तुतीकरण चतुराई से इस प्रकार किया गया है कि राजद लहर को दबा दिया जाये और एन डी ए लहर को बतलाया जा रहा है,
मेरा विश्लेषण उसी सर्वे का इस प्रकार है: सर्वे में बतलाया गया है कि केवल 46% ही चाहते है नितीश कुमार दुबारा सी एम् बने लेकिन उसी सर्वे में यह नहीं बतलाया गया है कि 54% लोग अब नितीश कुमार को अगला सी एम् नहीं चाहते है, जिसे सर्वे वालों ने नहीं बतलाया है, इसी प्रकार से सर्वे में बतलाया गया है कि बिहार में केवल 34% लोग ही नीतिश कुमार के काम से संतुष्ट है और 66% बिहार के लोग नितीश के काम काज से नाराज है, यह नहीं बतलाया गया है,
भाइयों सत्य यही है कि राजद की अगली सरकार बनेगी, बिहार में राजद लहर है, सर्वे अच्छा प्रयास है किन्तु प्रस्तुतिकरण में सुधार की जरुरत है, मैं बतला दूँ बिहार में अभी श्री तेजस्वी यादव प्रथम स्थान पर लोगो की पसंद बने हुए है उपचुनाव का परिणाम लोगो को याद है।
#babulinayat #TejashwiForNextCm

Thursday, September 27, 2018

माननीय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जी रिटायर होने से पहले दनादन बैटिंग कर रहे हैं।

माननीय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जी रिटायर होने से पहले दनादन बैटिंग कर रहे हैं। इतने महत्वपूर्ण 8 फैसले न जाने क्यों रिटायरमेंट के आखिरी 4 दिनों के लिए रोक कर रखे गए थे ? SC/ST के प्रमोशन में आरक्षण के फैसले के साथ ये क्रीमी लेयर वाली नई बहस छिड़वा दी गयी,जबकि संविधान में कहीं भी क्रीमी लेयर शब्द का जिक्र तक नही है। आधार जरूरी नही है लेकिन पैन जरूरी है। अरे,कहना क्या चाहते हो ? पब्लिक अभी भी कन्फ्यूज है। एडल्ट्री 497 एक ऐसा कानून था जिसमे कोई औरत अपने पति की मर्जी के बिना किसी से सेक्स संबन्ध स्थापित नही कर सकती थी,यदि पति की मर्जी से सेक्स करती तो जिसके साथ संबन्ध स्थापित करती उसे सजा होती। ये क्रांतिकारी फैसला है। अब औरतें आसानी से अपने पति को नपुंसक कहकर अपनी मन मर्जी कर सकती हैं। प्यार मोहब्बत के नाम पर कोई भी जोड़ा अब आराम से शहर के किसी होटल में कुछ घण्टो के लिए कमरा बुक करवा सकता है। इसके लिए पति पत्नी होने की कोई बाध्यता नही है। पुलिस कुछ नही कर पायेगी। वाइफ स्वैपिंग अभिजात्य वर्ग तक सीमित था अब हसबैंड स्वैपिंग का कल्चर सामाजिक स्वीकृति पायेगा। गली गली डीएनए टेस्ट वाली लैब खुल जाएंगी,क्योंकि जब कोई भी माता पिता अपनी औलाद को किसी दूसरे की बता देंगे,तो वो अपने पिता को पिता कैसे साबित करेंगे ? उच्चतम न्यायालय के 377 यानी होमो सैक्सुअलटी के निर्णय के बाद फेसबुक पर चिकने ब्लू पेज और ग्रुप्स की भरमार हो गयी है। लगता है कुछ दिन बाद बाकायदा इसके लिए sms या कॉल भी आनी शुरू हो जाएंगी। लिव इन रिलेशनशिप के फैसले से जेंडर फ्रीडम मिला है। गोबर पाथने वाली लड़की भी इसके मायने समझने लगी है। खुदा करे,इन सभी फैसलों के फायदे हमारे पड़ोसी को जरूर मिलें। अपने घर मे ये सब अच्छा नही लगता। मेट्रो कल्चर अब गाँव कस्बे में भी मोबाइल के जरिये पहुंच जाएगा। विकास कह सकते हैं। अब लगे हाथ राम मंदिर पर भी मालिकाने हक़ का फैसला आ जाये तो सभी गंगा नहा लें। हमारे यहाँ माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करने की परंपरा रही है। सरकार भी सहमत है, यदि न होती तो फैसलों के विरुद्ध संसद मे अध्यादेश ले आती। इसलिए सभी निर्णय सराहनीय है। आप भी चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जी के सेवानिवृत्त होने के बाद उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी ही दीजिये। वैसे भजन मंडली चाहे तो ट्रिपल तलाक की तर्ज पर इन सभी फैसलों का क्रेडिट मोदी जी को दे सकती है। भेड़चाल है मित्रों, इसी बहाने रॉफेल घोटाला,चौकीदार चोर सब भूल जाइए। मीडिया भी तो यही कर रही है। आप भी इसी बहस में उलझ जाइये। किसी के रोकने से कोई नही रुकता है !

#babulinayat #SC 

Tuesday, August 21, 2018

“ईदुल-अज़हा” के अवसर पर कुच्छ सावधानियाँ बरतने की ज़रूरत है!





#EidulAzha
“ईदुल-अज़हा” के अवसर पर कुच्छ सावधानियाँ बरतने की ज़रूरत है!
1. क़ुर्बानी ज़रूर करें लेकिन किसी भी तरह का कोई गैर क़ानूनी काम न करें और ना ही किसी ऐसे जानवर की क़ुर्बानी करें जिसकी इजाजत आप को राज्य सरकार या केन्द्र सरकार ना देती हो(प्रतिबन्धित हो),
2. प्रसाशन को पूरा सहयोग करें, किसी भी हाल में क़ानून को अपने हाथ में ना लें, देश एक व्यवस्था (क़ानून, constitution) के तहत चल रहा है उस कान्सटीटूशन को मज़बूत करें, भंग ना करें।
3.आपसी सौहार्द हर हाल में बनाए रखें, त्योहार तो तीन दिन में खत्म होजाएगा, समाज में हमें रहना है उसमें खठास ना आने पाए उसका ख्याल रखें।
4. क़ुर्बानी खुले में बिलकुल ना करें, करने के बाद उसके बचे हुए हिस्से को(जो प्रयोग में ना लाए जाते हैं) उन्हें अच्छी तरह दफ़न करें, इस बात का पूरा खयाल रखें के कोई जानवर इसे बाहर या सड़कों पर ना लेजा सके।
5. पूरी तरह सतर्क रहें, असमाजिक तत्त्वों से होशियार रहें, नज़र चौकन्नी रखें, धार्मिक स्थलों की भी निगरानी करें ताकि कोई असमाजिक तत्त्व किसी के भी धार्मिक स्थल पर कुच्छ अप्रीय चीज़ें रख कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश ना करे।
अगर ऐसा कुच्छ भी पता चले तो तुरन्त प्रसाशन को इसकी जानकारी दें, याद रखें चाहे कुच्छ भी हो लेकिन प्रसाशन का काम अपने हाथ में ना लें ।
6. क़ुर्बानी करें लेकिन “दिखावा, बड़बोलेपन और फ़ज़ूल खर्ची” से बचें।
7. Whatsapp, Facebook, Twitter (Social Media) पर कुर्बानी का photo या Video बनाकर ना डालें।
8. हमसब इंसान हैं, हमें उपर वाले ने समझ दी है , अपनी समझ और अपनी पसन्द से धर्म को अपनाने और उसपर चलने की, समझ दी है इन्सानों को जोड़ने की तोड़ने और लड़वाने की नहीं, धर्म और समझ “एक दूसरे का सम्मान, एक-दूसरे को समझने की समझ “ प्रदान करता है, धार्मिक होने का सबसे बड़ा प्रमान यही है।

आईये हमसब मिल कर अहद करें...त्योहार मिलजुल कर एक-दूसरे को सम्मान देते हूए एंव प्यार-खुशियां बांटते हुए मनाऐंग ।
#EidulAdha #babulinayat #BabulinayatRjd

Wednesday, August 15, 2018

15 अगस्त

15 अगस्त 1947 को हो गए थे आजाद हम,
आजादी के 72 साल बाद भी क्या,
समझ पाए आजादी का मतलब हम,
पहले ब्रिटिश शासन के तहत,
जकड़े थे गुलामी के बेड़ियों में,
आज संविधान लागू होने के बाद भी,
जाति-पाति के कारण हो गए हैं,
अपने ही देश में गुलाम हम,
पहले रंग-भेद के जरिए गोरों ने हमको बाँटा था,
आज हमारे अपनो ने ही,
बाँट दिए जातिवाद और धर्मवाद के नाम पर हम,
जो भारत पहचान था कभी,
एकता, अखण्डता और विविधता का,
वो भारत ही झेल रहा है दंश अब आन्तरिक खंडता का,
बाँधा था जिन महान देशभक्त नेताओं ने,
अपने बलिदानों से एकता के सूत्र में हमें,
अपने ही कर्मों से अब उनकी आत्माओं को,
दे रहे हैं लगातार त्राश हम,
जातिवाद, आरक्षण और धर्मवाद ने,
बुद्धि हमारी को भ्रमाया है,
राजनेताओं ने अपने हित की खातिर,
हमको आपस में लड़वाया है,
बहुत हुआ सर्वनाश अपना,
कुछ तो खुद को समझाओं अब,
देश पर हुए शहीदों की खातिर,
समझो आजादी का मतलब अब।
जय हिन्द, जय भारत।
#HappyIndependentDay #Babulinayat

Sunday, August 5, 2018

बंद कमरों में रहने वाली मुज़फ़्फ़रपुर की लड़कियाँ भी सुरक्षित नहीं थीं। लड़कियाँ कहाँ जाएँगी? हमने ऐसा समाज बना डाला है जिसमें लड़कियाँ न घर में सुरक्षित हैं न सड़कों पर। छोटी बच्चियों के साथ जो कुछ हुआ उसकी कल्पना करके ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बेहोश करने की दवा देकर उन्हें समाज में रसूख रखने वालों के पास भेजा जाता था जहाँ उनके साथ रेप किया जाता था। जिस देश में लड़कियों के साथ इतना घिनौना व्यवहार किया जा रहा है, उसे जेंडर से जुड़े सवालों से भागना नहीं चाहिए। सरकार को कई सवालों का जवाब देना है:

--जिस ब्रजेश कुमार ने लड़कियों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया, उसे आरोप के सामने आने के बाद भी टेंडर कैसे दे दिया गया?

कुछ सवाल तो समाज के लिए भी हैं:

--रेपिस्टों को इतनी हिम्मत कहाँ से मिलती है कि वे सीबीआई जाँच की घोषणा सुनने के बाद मुस्कुराते नज़र आते हैं? क्या समाज ने रेप को उतना बड़ा मुद्दा समझा है जितना समझा जाना चाहिए था?

--रेपिस्टों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन करने वाली पार्टियों का समर्थन क्यों किया जाता है? रेपिस्टों के पक्ष में रैली निकालने वालों को समाज अलग-थलग क्यों नहीं करता?

यह बहुत अच्छी बात है कि देश के कई हिस्सों में लोग मुज़फ़्फ़रपुर की लड़कियों को न्याय दिलाने की माँग करते हुए सड़कों पर उतरे। न्याय की डगर लंबी और कठिन ज़रूर है, लेकिन एक दिन मंज़िल ज़रूर मिलेगी।
#Babulinayat

Saturday, August 4, 2018

किसी नेता के शामिल हो जाने भर से कोइ प्रोटेस्ट नकली नही हो जाता ।ऐसे विरोध प्रदर्शन को सिर्फ वोट बैंक की राजनीति कहकर खारिज कर देना भी एक तरह की राजनीति ही हैं साथ ही न खुद कुछ करना और न दुसरे को करने देना बाली कहावत ही चरितार्थ होती है।

सवाल लड़कियों के न्याय का है,सुरक्षित देश और समाज का है।ऐसे मुद्दों पर हर किसी को अपने अपने तरीके से आवाज बुलंद करना चाहिये ,चाहे वो नेता हो या अभिनेता या मिडिया या आम आदमी।अगर आपको लगता है कि नेता ऐसे मुद्दों को सिर्फ अपने वोट बैंक में इजाफा करने के लिये उठा रहा है तो कौन सा प्रोटेस्ट में साथ देने भर से आपका वोट उसे ट्रांसफर हो जायेगा।कम से कम समाजहित से जुड़े मुद्दे पर एक साथ आवाज तो बुलंद किया ही जा सकता है वोट भले ही सब अपने अपने पसंदीदा नेता या दल को दें।

वैसे भी मुजफ्फरपुर बालिका गृह जैसे जघन्यतम कांड पर मिडिया और सिविल सोसाएटी का जो रुखा रवैया रहा ,उससे इनके सेलेक्टिव अप्रोच का तो खुलासा हुआ ही,साथ ही यह भी पता चला कि ये किसके इशारे पर खामोश रहे।अव्वल तो देखिये विपक्ष के जन्तर मन्तर पर आज के कैंडिल मार्च को मिडिया 2019 की तैयारी बता रहा।

सिर्फ सोशल मिडिया ही इस कांड पर अपने तरीके से दबाव बनाता रहा । ओर खाश तौर से तेजस्वी यादव जी का धन्यवाद जो बच्चियों की सुरक्षा की खातिर इस पूरे कांड का राष्ट्रीय स्तर पर पर्दाफाश करने का काम किया।नितीश कुमार ऐसे ही आज अचानक शर्मसार नही हुये ,ये हमारे-आपके और कुछ चुनिंदा नेताओं के सक्रियता के कारण ही हुआ है नही तो शर्म से सर पहले ही झुक जाना चाहिये था।और कौन नही जानता कि ब्रिजेश ठाकुर किसके दम पर खुलेआम ठठा रहा था ।
मुजफ्फरपुरबालिकागृहकांड
Babilinayat


Thursday, July 26, 2018

एनडीए भगाओ बेटी बचाओ साइकिल यात्रा 28 जुलाई 2018

“बेटी सुरक्षा संवाद”को हो जाइये तैयार। "भाई तेज-तेजस्वी आ रहे आपके द्वार।। संस्कृतिक धरती गया से 28 जुलाई को सुबह 10 बजे साईकिल मार्च में शामिल होकर देश/प्रदेश के बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिये एक प्रण करें।हर बहन को सुरक्षित रखना हम सभी का सामाजिक, नैतिक एबं मानवीय दायित्व है।।

चलेगी साईकिल उड़ेगा धूल।
न रहेगी तीर,न रहेगा फूल।।




CycleMarch4Girls
Babulinayat

Tuesday, July 24, 2018

28 जुलाई से तेजस्वी की साइकिल यात्रा


दरअसल, आरजेडी आगामी 28 जुलाई यानी बिहार विधानसभा मानसून सत्र के बाद एनडीए भगाओ, बेटी बचाओ साइकिल यात्रा निकालने जा रहा है. बता दें कि, साइकिल यात्रा की शुरुआत बिहार के गया से तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होगी.

वहीं,राजद अररिया बिहार के युवा नेता बाबुल इनायत की मानें, तो गैंगरेप और राज्य में बढ़ते अपराध के खिलाफ बुद्ध की धरती गया से तेजस्वी यादव के नेतृत्व में एनडीए भगाओ, बेटी बचाओ साइकिल मार्च ऐतिहासिक होगी.तेजस्वी यादव गया से साइकिल पर सवार होकर पटना पहुंचेंगे. आरजेडी ने इस यात्रा को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है. करीब 115 किलोमीटर इस यात्रा को सफल बनाने के बाद आरजेडी के पटना, जहानाबाद और गया जिले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की लगातार बैठक हो रही है.
साइकिल मार्च में युवा आरजेडी के 5 हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे. इसके लिए हर स्तर पर तैयारी जारी है. इसके लिए गया, जहानाबाद और पटना शहर में विभिन्न जगह तोरण द्वार, होर्डिंग, बैनर, पोस्टर भी लगाए जायेंगे.
मालूम हो कि, आगामी 28 जुलाई को 10 बजे दिन में गया के गांधी मैदान से साइकिल यात्रा की शुरुआत होगी. 28 जुलाई को जहानाबाद में रात्रि विश्राम होगा.
फिर 29 जुलाई को जहानाबाद से रैली शुरू होगा और रात्रि विश्राम मसौढ़ी में होगा. फिर 30 जुलाई को साइकिल यात्रा से पटना पहुंचकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राज्यपाल सत्यपाल मलिक को ज्ञापन सौंपेंगे.