Thursday, July 5, 2018

राष्ट्रीय जनता दल 22 वीं स्थापना दिवस

समाजवादी समर की उपज है हमारी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल,आपातकाल के आग में तपे लालू जी के तप का प्रतिफल है राजद।

राजद एक राजनीतिक पार्टी मात्र नही,न ही इस दल का उद्देश्य केवल चुनाव में बहुमत लेकर सरकार बनाना है,बल्कि यह तो 90 के दशक में बिहार में सामाजिक क्रांति की सूत्रधार है,यह दल उनकी आवाज है जिनकी आवाज आज तक अवरोधित थी,राजद समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की अभिव्यक्ति है, राजद बिहार का वह दल है जिसने समाजवादी धारा को प्रवाहित करने का काम पूरे देश मे किया,राजद अकलियतों की आवाज है,राजद शोषितों की शान है,वंचितो का अधिकार है,सामंतीयो की शामत है,राजद एक दल नही एक विचारधारा है,जिसके आधार में लोहिया व जयप्रकाश के विचार स्थापित है।


यह पार्टी न होती तो  गरीब वंचित शोषित आज समाज की मुख्यधारा में न होता,पार्टी के 22 वीं स्थापना दिवस की सभी कार्यकर्ताओं को दिल से मुबारकबाद।
मुझे गर्व है मैं राजद का समर्थक हूँ।


                              बाबुल इनायत
                             9507860937
         सोशल मीडिया प्रभारी राष्ट्रीय जनता दल अररिया बिहार
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Wednesday, July 4, 2018

5 Julay Rjd स्थापना दिवस राष्ट्रीय जनता दल

पार्टी विचारधारा:- राष्ट्रीय जनता दल सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के आधार पर समाज को विकसित करने की प्रतिबद्धता रखनेवाले लोगों और समुदायों की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतिनिधि है. स्थापना के बाद से ही राष्ट्रीय जनता दल लगातार समाज के सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की आवाज के रूप में काम कर रहा है. राष्ट्रीय जनता दल समाजवादी राजनीति पर काम करने और प्रचार करने में विश्वास रखता है. पार्टी भूमिहीन श्रमिकों, किसानों, किसानों के अन्य कमजोर समूहों और प्रगतिशील लोगों के साथ ही समाज के अन्य वर्गों के एकताबद्ध नेटवर्क का विकास कर रही है. गांधीवादी मूल्यों से प्रेरणा लेकर समाजवादी नेताओं की महान परंपरा में राजद सांप्रदायिकता के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता के साथ खड़ा है. पार्टी का मानना है कि सत्याग्रह /अहिंसक प्रतिरोध सहित शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आन्दोलन का अधिकार लोगों का मौलिक अधिकार है.
एक राजनीतिक संगठन के रूप में राजद स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण जिन्हें लोग जेपी या लोकनायक के रूप में आदर और प्यार से याद करते हैं, के मार्गदर्शक विचारों का पालन करता है. महान समाजवादी दूरदर्शी लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नक्शेकदम पर चलते हुए, राजद का दृढ़ विश्वास है कि ‘सार्वभौम, समाजवादी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य’ के संवैधानिक आदर्शों को वास्तविक अर्थों में धरातल पर उतारने के लिए जमीनी स्तर पर सतर्कता और संघर्ष की आवश्यकता होती है. लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की विचारोत्तेजक पंक्तियों “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” और “करो या मरो” का शानदार ढंग से किया गया पाठ राजद के लिए गरीबों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और सामाजिक रूप से कमजोर समाज के अन्य वर्ग के लोगों के सामाजिक उत्थान के संघर्ष के लिए एक प्रेरणा है.
राजद एक आधुनिक और प्रगतिशील दृष्टिकोण के साथ एक सक्रिय राजनीतिक दल के रूप में उभरा है और इसका इतिहास अब तक धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और सभी के लिए एक समावेशी विकास के सिद्धांतों से जुड़ा हुआ है.

                                        बाबुल इनायत
                                       9507860937
                   सोशल मीडिया प्रभारी, राजद अररिया बिहार
                                       
Babulinayat

क्या कांग्रेस के दबाव में तेजस्वी को महागठबंधन में नीतीश को दोबारा एंट्री देनी चाहिए




जब कांग्रेस के शासनकाल में 1989 का भयावह दंगा हुआ, तो लालू प्रसाद ने अलौली (खगड़िया) की एक सभा में कहा था कि कांग्रेस को उखाड़ कर बंगाल की खाड़ी में फेंक देंगे। यह उस वक़्त की कांग्रेस की गाभिन नीति के विरुद्ध एकदम ठीक तेवर था। आज सियासी हालात कुछ और हैं। कांग्रेस की जगह पर बीजेपी को रख दीजिए। लेकिन, यह नहीं भूलना चाहिए किसी भी विश्लेषक को लालू अपने उरूज पर तभी तक थे जब तक वो कांग्रेस के आगे नतमस्तक नहीं हुए और अपनी शर्तों पर सियासत करते रहे।
इधर पिछले दो महीने से यह सुगबुगाहट है कि कांग्रेस सरपंच बनने की अपनी ख़ानदानी आदत और पुश्तैनी बीमारी से लाचार होकर राजद पर धीरे-धीरे यह दबाव बना रही है कि आगामी चुनाव में वो नीतीश की पिछली बेहयाई को भूलकर उन्हें साथ ले ले। ज्योंहि तेजस्वी ने दूरगामी राजनीति के लिहाज से यह आत्मघाती क़दम उठाया कि न सिर्फ़ उनके परंपरागत वोटर्स में ग़लत संदेश जाएगा, बल्कि उनका मनोबल भी चकनाचूर होगा। किसी तरह के दबाव के आगे नहीं झुकने वाले ही बेहतर निगोशिएट कर पाते हैं। अभी से अगर तेजस्वी किसी स्वनामधन्य सलाहकार के चक्कर में पड़कर उलटपुलट डिसीजन लिए, तो उन पर न सिर्फ़ “एकात्म कुर्सीवाद” (अजित अंजुम का ईज़ाद किया हुआ टर्म है) का आरोप लगेगा, बल्कि बड़ी लगन से बेहद कम अवधि में अर्जित अपनी विश्वसनीयता भी खो देंगे। उत्थान मुश्किल होता है, पतन की राह तो हमेशा से आसान रही है। ख़याल रहे कि कांग्रेस का इतिहास ही है कि वो कभी किसी क्षेत्रीय दल या नेता को फलते-फूलते नहीं देखना चाहती। ठीक है कि अभी भाजपा ने पूरे देश में कहर बरपाया हुआ है, मगर अपने वुजूद को कांग्रेस के इशारे पर कहीं किसी में विलीन कर देना सिवाय मूर्खतापूर्ण डिसीजन के और कुछ नहीं कहा जाएगा।
बहुत कम लोगों को पता है कि पिछले विधानसभा चुनाव के ठीक बीच में लालूजी को एक बड़े पत्रकार ने यूं ही बातचीत में कहा कि बिल्कुल सही वक़्त पर देशहित में सही फ़ैसला आपने लिया, सरकार तो आपके गठबंधन की ही बनने जा रही है, कहीं कोई शकोसुबहा नहीं है; पर स्पीकर का पद मत छोड़िएगा। लेकिन, लालूजी ने उस बात को बहुत हल्के में लिया कि हां, वो कोई मसला नहीं है, 20 से पहले कहां जाएगा। इतना भरोसा था उन्हें नीतीश जी पर।
अब मुझे नहीं मालूम कि किस तज़ुर्बे के आधार पर दिलीप मंडल जी नीतीश की फिर से गठबंधन में एंट्री की वकालत कर रहे हैं। कम-से-कम पिछले बीस वर्षों से तो नीतीश जी की राजनीति के पैटर्न, स्टाइल और वर्क कल्चर को फॉलो कर ही रहा हूँ और कुछ पिताजी की सियासी सक्रियता की वजह से भी अंदर की बात पता चल जाती थी। इस आदमी के बारे में यूं ही हवा में नहीं कह दिया जाता कि कभियो इ पलट के काट ले सकता है। इतिहासे है इनका। अब मैं आपके सामने दिलीप जी के प्रस्ताव को यहाँ एज इट इज़ रख दे रहा हूँ, “मेरी राय है कि नीतीश को गठबंधन में ले लेना चाहिए. बाकी बाद में देखना चाहिए कि क्या करना है. नीतीश को सीट कम देनी चाहिए. बीजेपी भी 8 सीट ही दे रही है. तेजस्वी भी इतनी ही दे दें.”
इस नहले पे दहला मार दिया है या यूं कहें कि अच्छा मज़ाक किया है महेंद्र यादव जी ने, “नीतीश को अगर आरजेडी ने फिर साथ ले लिया तो शरद यादव का क्या होगा.. नीतीश साथ आना चाहते हैं तो उनके सामने कुछ शर्तें रखी जानी चाहिए- 1. नीतीश पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ें और शरद यादव को दें। 2. आरसीपी जैसों से राज्यसभा सीट खाली कराके शरद यादव और अली अनवर को दें। 3. मुख्यमंत्री पद छोड़ें, और शरद यादव अनुमति दें तो उपमुख्यमंत्री बनें। 4. स्पीकर आरजेडी का बनवाएं। 5. लोकसभा चुनाव में सीटों का बँटवारा लालू जी और शरद जी करें, और स्वाभाविक रूप से जेडीयू में टिकट शरद यादव बांटें।”
ऐसा है कि बिहार की राजनीति सर्कस नहीं है और यहाँ की जनता कोई फुटबॉल नहीं कि जब जिसको मन हो आके किक लगा दे कभी सेंटर से कभी फॉरवर्ड से। जैसे बड़ी चालाकी से महागठबंधन में सटकर जीत के नीतीश भाग गए अपने पुराने यार के पास, वैसे ही लोकसभा की सीटें भी सटकर जीत लेंगे और फिर मोदी-शाह अपने डंडे से इनको हांक के अपने टेंट में लेके चले जाएंगे। हां, इस पूरे खेल में सेल्फ गोल करने का किसी का मन हो तो कौन क्या करे! यहाँ की जनता का न्यायबोध ज़बरदस्त है, कोई ख़ुद को ढेर क़ाबिल समझने लगता है और उसे फॉर ग्रांटेड लेता है कि जैसे मन होगा वैसे हांक लेंगे या जोत देंगे, तो उसे बढ़िया से ठिकाने भी लगा देती है। बाक़ी,
जम्हूरियत में कम-से-कम इतनी आज़ादी तो है
के हमको ख़ुद करना है अपने क़ातिलों का इंतख़ाब। (शायद जिगर या कैफ़ी)
मोदी-शाह वाले एनडीए में अपनी डांवाडोल स्थिति को भांपते हुए, 19 में फिनिश होने के खतरे को आंक कर बिहार में मज़बूत विपक्ष को देख ललचाए नीतीश कुमार का कल बयान आया कि नोटबन्दी से सिर्फ़ ग़रीबों का नुकसान हुआ। आगामी लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर होता नुकसान देख जनाब का यह बयान आया है। नीतीश इतने बड़े महामूर्ख तो हैं नहीं कि उन्हें तब समझ में नहीं आया जब समर्थन कर रहे थे। गांव में लोग कहते हैं कि ढेर क़ाबिल आदमी तीन जगह माखता है। दम धरिए, अभी तो इनकी दुर्गति शुरू हुई है! बहुत कुछ भुगतना बाक़ी है। आरएसएस अभी इनका नाक रगड़वाए बगैर इन्हें छोड़ेगा नहीं।
इसके पहले 15 मार्च को भी दिलीप जी ने नीतीश कुमार के प्रति रहम बरतने का मंतव्य प्रकट किया था। तब भी दिलीप मंडल जी का कुछ इसी से मिलता-जुलता प्रस्ताव था- “नीतीश कुमार पल्टी मारें, तो तेजस्वी यादव को दिल बड़ा कर लेना चाहिए”। मैं तेजस्वी को इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज़ करने का अयाचित परामर्श देने का दुस्साहस करता हूँ। हज़ार बार कह चुका हूँ कि लालू-विरोध ही नीतीश जी की एकमात्र युएसपी है, वो लालू प्रसाद का विरोध करना छोड़ दें, तो उनके पास अपना बचेगा क्या सिवाय सिफ़र के?
अलौली (खगड़िया) में एक जगह है हरिपुर, कुर्मी बाहुल क्षेत्र। नीतीश जी को तब भी वहाँ प्रचार के लिए बुलाया जाता था जब अविभाजित जनता दल था और तब भी जब वो जनता दल (जॉर्ज) को समता पार्टी का रूप दे चुके थे।
एक बार लालू प्रसाद के ख़िलाफ़ बोलते-बोलते वो बहक गए यह सोचते हुए कि सजातीय लोगों का इलाक़ा है, यहाँ कौन क्या कहेगा। उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद मुंज हैं जिनकी जड़ में मट्ठा डालके हम तहसनहस कर देंगे”। इतना सुनना था कि लालूजी के दल के कुर्मी जाति, पासवान जाति और यादव जाति (यादव बहुत कम संख्या में हैं उस इलाक़े में) से संबद्ध लोग ईंटा-पत्थर मंच पर फेंकना चालू कर दिए। अपना ऊबाऊ-झेलाऊ भाषण बीच में ही छोड़छाड़कर उन्हें भागना पड़ा, बमुश्किल उन्हें हैलीपैड तक पहुंचाया गया।
इस प्रसंग का ज़िक्र इसलिए कर रहा हूँ की नीतीश कुमार के मन में लालू प्रसाद के लिए किस कदर ज़हर घुला हुआ है। इसलिए, सियासी रूप से कमज़ोर होने पर नीतीश जी की रोनी सूरत पर मत जाइए। ज़रा सा वो ताक़तवर होंगे कि भस्मासुर की तरह आपही के माथे पर हाथ धरने के लिए परपरिया रौदा ( चिलचिलाती धूप) में आपको दौड़ते रहेंगे। इसलिए,सावधान! अब सियासत भावुकता से नहीं चलेगी कि नीतीश के पास भावना है ही नहीं। व्यक्तिगत जीवन में भी और सामाजिक-राजनैतिक जीवन में भी भयंकर रूप से क्रूर आदमी हैं। कैसे भूल जाते हैं लोग कि उपेंद्र कुशवाहा की वयोवृद्ध मां समेत पूरे परिवार को सामान सहित रात में आवास से फेंकवा दिया, पासवान को तो नेस्तनाबूद करके ही छोड़ दिया, सतीश कुमार, दिग्विजय और जॉर्ज को ख़ून के आंसू रुला दिए, उदयनारायण और जीतनराम को लगातार ज़लील किया। महागठबंधन बनने से पहले ख़ुद लालू की पार्टी को चकनाचूर कर देने से बाज नहीं आए।
नीतीश ख़त्म हो रहे हों, तो एकदम ख़त्म हो जाने दीजिए। वह व्यक्ति न दया का पात्र है न कोई सहानुभूति डिज़र्व करता है। ऐसे शातिर-धूर्त-चालू-तिकड़मी लोगों को दूध-लावा नहीं चढ़ाया करते, नहीं तो काटने पर ट्वीटर पर मत कोस कर ट्रेंड कराया कीजिए कि नीतीश ट्वायलेट चोर है। उस आदमी को खाद-पानी देके पालिए-पोसिएगा तो एक दिन फिर डंसेगा ही। लालूजी की सब बात भूल जाइए, बस उनकी एक पसंदीदा लोकोक्ति याद रखिए:

जब कांग्रेस के शासनकाल में 1989 का भयावह दंगा हुआ, तो लालू प्रसाद ने अलौली (खगड़िया) की एक सभा में कहा था कि कांग्रेस को उखाड़ कर बंगाल की खाड़ी में फेंक देंगे। यह उस वक़्त की कांग्रेस की गाभिन नीति के विरुद्ध एकदम ठीक तेवर था। आज सियासी हालात कुछ और हैं। कांग्रेस की जगह पर बीजेपी को रख दीजिए। लेकिन, यह नहीं भूलना चाहिए किसी भी विश्लेषक को लालू अपने उरूज पर तभी तक थे जब तक वो कांग्रेस के आगे नतमस्तक नहीं हुए और अपनी शर्तों पर सियासत करते रहे।
इधर पिछले दो महीने से यह सुगबुगाहट है कि कांग्रेस सरपंच बनने की अपनी ख़ानदानी आदत और पुश्तैनी बीमारी से लाचार होकर राजद पर धीरे-धीरे यह दबाव बना रही है कि आगामी चुनाव में वो नीतीश की पिछली बेहयाई को भूलकर उन्हें साथ ले ले। ज्योंहि तेजस्वी ने दूरगामी राजनीति के लिहाज से यह आत्मघाती क़दम उठाया कि न सिर्फ़ उनके परंपरागत वोटर्स में ग़लत संदेश जाएगा, बल्कि उनका मनोबल भी चकनाचूर होगा। किसी तरह के दबाव के आगे नहीं झुकने वाले ही बेहतर निगोशिएट कर पाते हैं। अभी से अगर तेजस्वी किसी स्वनामधन्य सलाहकार के चक्कर में पड़कर उलटपुलट डिसीजन लिए, तो उन पर न सिर्फ़ “एकात्म कुर्सीवाद” (अजित अंजुम का ईज़ाद किया हुआ टर्म है) का आरोप लगेगा, बल्कि बड़ी लगन से बेहद कम अवधि में अर्जित अपनी विश्वसनीयता भी खो देंगे। उत्थान मुश्किल होता है, पतन की राह तो हमेशा से आसान रही है। ख़याल रहे कि कांग्रेस का इतिहास ही है कि वो कभी किसी क्षेत्रीय दल या नेता को फलते-फूलते नहीं देखना चाहती। ठीक है कि अभी भाजपा ने पूरे देश में कहर बरपाया हुआ है, मगर अपने वुजूद को कांग्रेस के इशारे पर कहीं किसी में विलीन कर देना सिवाय मूर्खतापूर्ण डिसीजन के और कुछ नहीं कहा जाएगा।
बहुत कम लोगों को पता है कि पिछले विधानसभा चुनाव के ठीक बीच में लालूजी को एक बड़े पत्रकार ने यूं ही बातचीत में कहा कि बिल्कुल सही वक़्त पर देशहित में सही फ़ैसला आपने लिया, सरकार तो आपके गठबंधन की ही बनने जा रही है, कहीं कोई शकोसुबहा नहीं है; पर स्पीकर का पद मत छोड़िएगा। लेकिन, लालूजी ने उस बात को बहुत हल्के में लिया कि हां, वो कोई मसला नहीं है, 20 से पहले कहां जाएगा। इतना भरोसा था उन्हें नीतीश जी पर।
अब मुझे नहीं मालूम कि किस तज़ुर्बे के आधार पर दिलीप मंडल जी नीतीश की फिर से गठबंधन में एंट्री की वकालत कर रहे हैं। कम-से-कम पिछले बीस वर्षों से तो नीतीश जी की राजनीति के पैटर्न, स्टाइल और वर्क कल्चर को फॉलो कर ही रहा हूँ और कुछ पिताजी की सियासी सक्रियता की वजह से भी अंदर की बात पता चल जाती थी। इस आदमी के बारे में यूं ही हवा में नहीं कह दिया जाता कि कभियो इ पलट के काट ले सकता है। इतिहासे है इनका। अब मैं आपके सामने दिलीप जी के प्रस्ताव को यहाँ एज इट इज़ रख दे रहा हूँ, “मेरी राय है कि नीतीश को गठबंधन में ले लेना चाहिए. बाकी बाद में देखना चाहिए कि क्या करना है. नीतीश को सीट कम देनी चाहिए. बीजेपी भी 8 सीट ही दे रही है. तेजस्वी भी इतनी ही दे दें.”
इस नहले पे दहला मार दिया है या यूं कहें कि अच्छा मज़ाक किया है महेंद्र यादव जी ने, “नीतीश को अगर आरजेडी ने फिर साथ ले लिया तो शरद यादव का क्या होगा.. नीतीश साथ आना चाहते हैं तो उनके सामने कुछ शर्तें रखी जानी चाहिए- 1. नीतीश पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ें और शरद यादव को दें। 2. आरसीपी जैसों से राज्यसभा सीट खाली कराके शरद यादव और अली अनवर को दें। 3. मुख्यमंत्री पद छोड़ें, और शरद यादव अनुमति दें तो उपमुख्यमंत्री बनें। 4. स्पीकर आरजेडी का बनवाएं। 5. लोकसभा चुनाव में सीटों का बँटवारा लालू जी और शरद जी करें, और स्वाभाविक रूप से जेडीयू में टिकट शरद यादव बांटें।”
ऐसा है कि बिहार की राजनीति सर्कस नहीं है और यहाँ की जनता कोई फुटबॉल नहीं कि जब जिसको मन हो आके किक लगा दे कभी सेंटर से कभी फॉरवर्ड से। जैसे बड़ी चालाकी से महागठबंधन में सटकर जीत के नीतीश भाग गए अपने पुराने यार के पास, वैसे ही लोकसभा की सीटें भी सटकर जीत लेंगे और फिर मोदी-शाह अपने डंडे से इनको हांक के अपने टेंट में लेके चले जाएंगे। हां, इस पूरे खेल में सेल्फ गोल करने का किसी का मन हो तो कौन क्या करे! यहाँ की जनता का न्यायबोध ज़बरदस्त है, कोई ख़ुद को ढेर क़ाबिल समझने लगता है और उसे फॉर ग्रांटेड लेता है कि जैसे मन होगा वैसे हांक लेंगे या जोत देंगे, तो उसे बढ़िया से ठिकाने भी लगा देती है। बाक़ी,
जम्हूरियत में कम-से-कम इतनी आज़ादी तो है
के हमको ख़ुद करना है अपने क़ातिलों का इंतख़ाब। (शायद जिगर या कैफ़ी)
मोदी-शाह वाले एनडीए में अपनी डांवाडोल स्थिति को भांपते हुए, 19 में फिनिश होने के खतरे को आंक कर बिहार में मज़बूत विपक्ष को देख ललचाए नीतीश कुमार का कल बयान आया कि नोटबन्दी से सिर्फ़ ग़रीबों का नुकसान हुआ। आगामी लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर होता नुकसान देख जनाब का यह बयान आया है। नीतीश इतने बड़े महामूर्ख तो हैं नहीं कि उन्हें तब समझ में नहीं आया जब समर्थन कर रहे थे। गांव में लोग कहते हैं कि ढेर क़ाबिल आदमी तीन जगह माखता है। दम धरिए, अभी तो इनकी दुर्गति शुरू हुई है! बहुत कुछ भुगतना बाक़ी है। आरएसएस अभी इनका नाक रगड़वाए बगैर इन्हें छोड़ेगा नहीं।
इसके पहले 15 मार्च को भी दिलीप जी ने नीतीश कुमार के प्रति रहम बरतने का मंतव्य प्रकट किया था। तब भी दिलीप मंडल जी का कुछ इसी से मिलता-जुलता प्रस्ताव था- “नीतीश कुमार पल्टी मारें, तो तेजस्वी यादव को दिल बड़ा कर लेना चाहिए”। मैं तेजस्वी को इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज़ करने का अयाचित परामर्श देने का दुस्साहस करता हूँ। हज़ार बार कह चुका हूँ कि लालू-विरोध ही नीतीश जी की एकमात्र युएसपी है, वो लालू प्रसाद का विरोध करना छोड़ दें, तो उनके पास अपना बचेगा क्या सिवाय सिफ़र के?
अलौली (खगड़िया) में एक जगह है हरिपुर, कुर्मी बाहुल क्षेत्र। नीतीश जी को तब भी वहाँ प्रचार के लिए बुलाया जाता था जब अविभाजित जनता दल था और तब भी जब वो जनता दल (जॉर्ज) को समता पार्टी का रूप दे चुके थे।
एक बार लालू प्रसाद के ख़िलाफ़ बोलते-बोलते वो बहक गए यह सोचते हुए कि सजातीय लोगों का इलाक़ा है, यहाँ कौन क्या कहेगा। उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद मुंज हैं जिनकी जड़ में मट्ठा डालके हम तहसनहस कर देंगे”। इतना सुनना था कि लालूजी के दल के कुर्मी जाति, पासवान जाति और यादव जाति (यादव बहुत कम संख्या में हैं उस इलाक़े में) से संबद्ध लोग ईंटा-पत्थर मंच पर फेंकना चालू कर दिए। अपना ऊबाऊ-झेलाऊ भाषण बीच में ही छोड़छाड़कर उन्हें भागना पड़ा, बमुश्किल उन्हें हैलीपैड तक पहुंचाया गया।
इस प्रसंग का ज़िक्र इसलिए कर रहा हूँ की नीतीश कुमार के मन में लालू प्रसाद के लिए किस कदर ज़हर घुला हुआ है। इसलिए, सियासी रूप से कमज़ोर होने पर नीतीश जी की रोनी सूरत पर मत जाइए। ज़रा सा वो ताक़तवर होंगे कि भस्मासुर की तरह आपही के माथे पर हाथ धरने के लिए परपरिया रौदा ( चिलचिलाती धूप) में आपको दौड़ते रहेंगे। इसलिए,सावधान! अब सियासत भावुकता से नहीं चलेगी कि नीतीश के पास भावना है ही नहीं। व्यक्तिगत जीवन में भी और सामाजिक-राजनैतिक जीवन में भी भयंकर रूप से क्रूर आदमी हैं। कैसे भूल जाते हैं लोग कि उपेंद्र कुशवाहा की वयोवृद्ध मां समेत पूरे परिवार को सामान सहित रात में आवास से फेंकवा दिया, पासवान को तो नेस्तनाबूद करके ही छोड़ दिया, सतीश कुमार, दिग्विजय और जॉर्ज को ख़ून के आंसू रुला दिए, उदयनारायण और जीतनराम को लगातार ज़लील किया। महागठबंधन बनने से पहले ख़ुद लालू की पार्टी को चकनाचूर कर देने से बाज नहीं आए।

नीतीश ख़त्म हो रहे हों, तो एकदम ख़त्म हो जाने दीजिए। वह व्यक्ति न दया का पात्र है न कोई सहानुभूति डिज़र्व करता है। ऐसे शातिर-धूर्त-चालू-तिकड़मी लोगों को दूध-लावा नहीं चढ़ाया करते, नहीं तो काटने पर ट्वीटर पर मत कोस कर ट्रेंड कराया कीजिए कि नीतीश ट्वायलेट चोर है। उस आदमी को खाद-पानी देके पालिए-पोसिएगा तो एक दिन फिर डंसेगा ही। लालूजी की सब बात भूल जाइए, बस उनकी एक पसंदीदा लोकोक्ति याद रखिए:

5 जुलाई राष्ट्रीय जनता दल स्थापना दिवस

5 जुलाई को राजद 22 वीं स्थापना दिवस समारोह का आयोजन राजद प्रदेश कार्यालय में हो रहा , जिसमें हमारे सभी राष्ट्रीय नेता , सभी प्रदेश पदाधिकारी भाग ले रहे , अतः जिला राजद अररिया के सभी पदाधिकारी , प्रखंड अध्यक्ष , राष्ट्रीय जनता दल के अनुषांगिक शाखा जैसे युवा राजद , छात्र राजद ... के जिला अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी 5 जुलाई को प्रदेश कार्यालय में अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर जिले की जोरदार उपस्थिति सुनिश्चित करें यही साग्रह निवेदन

राजद 22 वीं स्थापना दिवस 5 जुलाई


राष्ट्रीय जनता दल की 22वीं स्थापना दिवस 5 जुलाई 2018 को दिन के 11 बजे राजद प्रदेश कार्यालय पटना में आयोजित किया गया है।
जिसमे राजद अररिया  जिला के सभी प्रकोष्ठ के सभी पदाधिकारी एवं सभी प्रखण्ड के सभी प्रकोष्ठ के सभी पदाधिकारी आमंत्रित हैं।

                                     बाबुल इनायत
                                     9507860937
                                    Babulinayat


Swami Vivekananda Birthday


अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराने वाले युगपुरूष स्वामी विवेकानन्द जी के पुण्यतिथि पर,उन्हें शत-शत नमन व विनम्र श्रद्धांजलि!!
SwamiVivekananda


Monday, July 2, 2018

अपनी जगह यह बात सही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा-संघ से आते हैं! पर वह इस वक्त भारत के प्रधानमंत्री हैं। हम सबके प्रधानमंत्री! वह जब कभी सार्वजनिक मंच से कोई वक्तव्य देते हैं, वह प्रधानमंत्री का आधिकारिक बयान होता है! इसलिए माननीय प्रधानमंत्री को अपने दफ्तर में अच्छे, समझदार और पढ़े-लिखे भाषण-लेखक( स्पीच राइटर) रखने चाहिए! ऐसा लगता है कि उनके स्पीच राइटर भी 'संघ-परिवार' से आ गये हैं! ज्ञात-इतिहास की तारीखें और महापुरूषों के कार्यकाल तक बदल दे रहे हैं!
ऐसे 'स्पीच-राइटर' हमारे प्रधानमंत्री से ग़लत-सलत बोलवा देते हैं! दिल्ली से दावोस, पटना से मगहर, कई बार ऐसे 'भाषण-ब्लंडर' हो चुके हैं! ऐसी ग़लत-सलत तकरीरों का भाजपा के बड़बोले और झगड़ालू टीवी प्रवक्ता भी बचाव नहीं कर पाते! दो तीन दिन पहले भी यही हुआ। एक प्रमुख चैनल पर प्रधानमंत्री के मगहर भाषण पर चर्चा हो रही थी। पैनल में एक बड़बोले भाजपा प्रवक्ता भी मौजूद थे। जब सवाल उठा कि प्रधानमंत्री जी ने 11-12वीं सदी के गुरु गोरखनाथ और 15वीं सदी के कबीर के बीच मगहर में आध्यात्मिक चर्चा कैसे करा दी, भाई!
उस वक्त, भाजपा प्रवक्ता चाहकर भी कुछ बोल नहीं सका! मजे की बात है, प्रधानमंत्री जी ने गुरु गोरखनाथ और संत कबीर के समकालीन होने की बात ऐसे मंच से की, जहां गोरखनाथ के नाम से विख्यात गोरखपुर के मठ के मठाधीश और यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी भी मौजूद थे! बेचारे, क्या कहते प्रधानमंत्री को!
इसलिए प्रधानमंत्री को मेरी बात का बुरा न मानते हुए अपने 'स्पीच-राइटर' फौरन बदल देना चाहिए! यह बात मैं देशहित में कह रहा हूं! और हां, संघ परिवार के बाहर के लोगों को स्पीच राइटर बनाया जाना चाहिए! आप, हम सबके प्रधानमंत्री हैं, सर!

Tuesday, June 26, 2018

नीतीश कुमार को गठबंधन में नो एंट्री तेजस्वी यादव।


तेजस्वी अपनी जगह अटल-अविचल हैं। कहीं किन्हीं को कोई कन्फ़्यूज़न नहीं होना चाहिए। यही स्पष्टता और तेवर बरकरार रहे! गाभिन बात बोलने के लिए नीतीश को छोड़ दीजिए। गोलमटोल बोलना और गच्चा देना उनकी युएसपी है, तेजस्वी की पहचान भिड़ाभिड़ी वाली है, वही इनकी ताक़त है। सुनिए, तेजस्वी ने इस बार ठोक-बजा के बोल दिया है, अब इधर ताकाझांकी की गुंजाइश क्षीण है।
"हमारे सामने राहुल गाँधी जी की जो बात हुई, उन्होंने कहा कि राजद और हम एक लॉन्ग टर्म प्लान बना रहे हैं और उस पर हम लोग काम कर रहे हैं। तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। अब जनता दल (युनाइटेड) के लोग भी कहते हैं कि कांग्रेस ने गंवा दिया मौक़ा। त्यागी जी ने भी तो बोला, कई बार उन्होंने बोला, तो ये बात आई कहाँ से? तो इसलिए एक बात जान लीजिए, हमारे चाचा जहाँ भी रहेंगे, जिस गठबंधन में भी रहेंगे, उस गठबंधन की नैया डुबोने का काम करेंगे। अब वो पलटी मारें, न मारें हमलोग क्या...उसके लिए हम क्यूं चिंतित रहें? आप इ बात बताइए न यहाँ तो जबतक राष्ट्रीय जनता दल में हमलोग हैं, हमलोग उनको कभी भी स्वीकार नहीं कर सकते हैं। एक बात, कोई भी कहीं से भी किसी भी प्रकार का दबाव हो, हमलोग दबाव जो है, उसमें आने वाले नहीं हैं। और जो जनता की जो माँग है, जनता की जो बात है, हम उसको सुनने का काम करेंगे; जो जनता कह रही है। जनता यही कह रही है कि नीतीश जी के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जिन्होंने बिहार के मैंडेट के साथ खिलवाड़ करने का काम किया, जिन्होंने 2 लाख ऑनलाइन तलवारें बटवाने का काम किया, जो कलम की बात नहीं करते। जिन्होंने एससी-एसटी क़ानून को ख़त्म करने का काम किया, आज नीतीश कुमार जी वहाँ हैं। जो लोग नागपुरिया क़ानून को लागू करना चाहते हैं, आज नीतीश जी वहाँ हैं और एक भी मसले पे उन्होंने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी। ये बात आपलोग ध्यान से सुन लीजिए। क्या कांग्रेस के लोग चाहेंगे कि जिन्होंने एससी-एसटी क़ानून को ख़त्म करवाने का काम किया, जो पार्टनर जो सहयोग करता रहा, ऐसे लोग..."
- तेजस्वी यादव
                                           बाबुल इनायत
                                          9507860937
         सोशल मीडिया प्रभारी, राष्ट्रीय जनता दल अररिया बिहार
                                      Babulinayat4Rjd


Friday, June 22, 2018

बाबुल इनायत Babul Inayat


जो अपने कदमो की काबिलियत पर विश्वास रखते है।
वही अपने मंजिल पे पहुंचते हैं।
 
BabulInayat

Thursday, June 21, 2018

अंतरास्ट्रीय योगा दिवस

आरएसएस के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार के निर्वाण दिवस 21 जून को अंतरर्रष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन योग करने से चीन से मैट, टीशर्ट्स आयात करने वाले व्यापारी,इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी के मालिक, कमीशन खोर नेता और बाबा रामदेव जैसों का बड़ा लाभ होता है। पिछले 4 सालों में इस मेगा इवेंट के लिए अरबो रुपये बारिश में बहा दिए गए। इतने धन से सरकारी स्कूलों में व्यायाम शिक्षक नियुक्त करने बजट दे दिया जाता तो कई बेरोजगारों का कल्याण हो गया होता और आने वाली पीढ़ी योग और स्वास्थ्य के महत्व को बेहतर समझ सकती थी। खैर ,केशव बलीराम हेडगेवार को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि !
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Wednesday, June 13, 2018

लालू प्रसाद यादव अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा ब्लॉक बनवाए,सबसे ज्यादा प्राथमिक विद्यालय खोले,सबसे ज्यादा यूनिवर्सिटी की स्थापना की। बाबुल इनायत

सबसे अधिक ब्लॉक लालू ने बनाए, सबसे ज़्यादा प्राथमिक विद्यालय लालू ने खोले, सबसे ज़्यादा युनिवर्सिटी की स्थापना लालू ने की। कामकाजी महिलाओं के लिए माहवारी के दिनों में विशेष कष्ट का ख़याल करते हुए विशेषावकास का प्रावधान लालू ने किया। आधी आबादी को लेकर बहुत संज़ीदे रहते थे। उनके साथ काम करने वाली महिला ब्यूरोक्रेट्स कभी असहज नही हुईं। महिलाओं के प्रति बड़ा ही मर्यादित नज़रिया व आचरण रखते हैं लालू प्रसाद। पर, यही बात पूर्व मुख्यमंत्री केबी सहाय या मौजूदा मुख्यमंत्री के लिए पक्के तौर पर नहीं कह सकते। कुछ ब्यूरोक्रेट्स तो कहते हैं कि उनकी गेज़ बड़ा ही अनकंफर्टेबल कर देती।

रमणिका गुप्ता कहती हैं कि “जेंडर के आधार पर मुझे बिहार विधानसभा गालियां कई बार खानी पड़ीं। एक बार मैं कोई मुद्दा उठाते हुए टेबल पर चढ़ गयी तो एक नेता चिल्लाये, "नाच नचनिया नाच"। ऐसे कई अनुभव रमणिका अपने राजनीतिक जीवन के दौरान के बताती हैं। रमणिका यह भी जोड़ती हैं, "मेरी सीट के तब पीछे ही बैठने वाले लालू प्रसाद ऐसी ओछी टिप्पणियों से दूर रहते थे”।

लालू प्रसाद से पहले बिहार में कोई मुख्यमंत्री ही नहीं हुआ जो इतना भी संवेदनशील हो कि हर माह विशेष कष्ट के दिनों में कामकाजी महिलाओं के लिए दो दिन के विशेष अवकाश का प्रावधान करे। बहुधा मीडियानिर्मित धारणाप्रधान समाज में पुष्पित-पल्लवित महिलाएं भूल जाती हैं कि महीने के विशेष कष्ट के दिनों में उनका विशेष ख़याल करते हुए लालू ने सत्ता में आने के दो साल के अंदर सेवारत खवातीन के लिए यह व्यवस्था कर दी। लालू को गरियाने से पहले ज़रा गूगल कर लें कि जो काम लालू ने आज से 25 साल पहले कर दिया था, वो काम आज भी इस देश के कितने सूबों के मुख्यमंत्री कर पाए हैं? यह तो सरासर कृतघ्नता है। कम-से-कम वो तो ‘गंवार’ सीएम रहे लालू का मज़ाक उड़ाना बंद कर दें। उन्हें तो क़ायदे से उनका शुक्रगुज़ार होना चाहिए।

लालू जी कम-से-कम पहनावे-ओढ़ावे के मामले में किसी दिखावे-ढकोसले में कोई बहुत यक़ीन नहीं करते। उनका अपना शऊर है, अपना अंदाज़ है। वो तो लु़ंगी-बनियान में भी यूं ही सहज रहते हैं, इंटरव्यू भी ऐसे ही देते हैं, यही उनका याकि अधिकांश बिहारी परिवारों में पहनने-ओढ़ने का तौर-तरीक़ा है। गांधीजी को क्या कहिएगा कि आदमी नंगधड़ंग था, अशालीन था, अशिष्ट था! (पर, प्रेम कुमार मणि जी के मन में ऐसी खलिश और रंजिश है कि तेजस्वी की तारीफ़ करते हुए भी वो लालू को निशाने पर ले लेते हैं। उन्हें लालू प्रसाद के पहनावे-ओढ़ावे से भी दिक्कत है। अब कोई बताए कि अस्वस्थ हालत में कोई प्रैस से आए कपड़े पहनकर बिस्तर पर लेटकर स्वास्थ्य लाभ करता है? घर में लोग कैसे रहते हैं?)

लालू जी ने तो एक सभा में कुर्ते को खोलकर, बनियान निकालकर कुर्ता पहना, फिर उसके ऊपर बनियान। और, कहा कि अब बिहार में यही होगा। जो नीचे थे, वो अब ऊपर आएंगे, वक़्त का चक्का अब घुमेगा। जब वो यह कहते थे, तो इस अपील का गज़ब का असर होता था।


                          बाबुल इनायत
                         9507860937
सोशल मीडिया प्रभारी राष्ट्रीय जनता दल अररिया बिहार
लालुबिहारकेलाल  बाबुलइनायत BabulInayat Rjd SocialMedia Araria