Wednesday, April 10, 2019
Babul Inayat: न किसी यादव सम्मेलन में गया, न भूराबाल साफ करो कह...
Babul Inayat: न किसी यादव सम्मेलन में गया, न भूराबाल साफ करो कह...: लालू यादव भारतीय लोकतंत्र का चमत्कार भी हैं और एक पहेली भी. उनके जीवन को समझिए खुद उनके नजरिए से, क्योंकि उन्होंने पहली बार अपनी आत्...
न किसी यादव सम्मेलन में गया, न भूराबाल साफ करो कहा- लालू यादव
लालू यादव भारतीय लोकतंत्र का चमत्कार भी हैं और एक पहेली भी. उनके जीवन को समझिए खुद उनके नजरिए से, क्योंकि उन्होंने पहली बार अपनी आत्मकथा लिखी है.

उन्होंने नागेंद्र तिवारी जैसे अधिकारी को याद किया जिनकी वजह से वे पटना विश्वविद्यालय का चुनाव जीत पाये वरना दबंगों ने तो बैलेट बॉक्स तक नालियों और कचरे के डब्बे में डाल दिया था. उन्होंने आगे लिखा है कि भीख मांगते गरीब ब्राह्मण को देख कर भी मुझे बुरा लगता है.
एबीवीपी और आरएसएस को लालू यादव ने कभी पसंद नहीं किया. आरएसएस के लोग जेपी आंदोलन में कांग्रेस विरोधी लहर में रोटी तो सेंकना चाहते थे लेकिन आंदोलन के प्रति ईमानदार नहीं थे. जेपी के जेल भरो अभियान में लालू यादव ने उन्हें पूरी-जलेबी के भोज का लालच देकर भी जेल ले जाने की कोशिश की, लेकिन वे लोग रास्ते से ही भाग गए. उन्होंने लिखा कि ये लोग खोखली प्रतिबद्धता वाले लोग हैं.
चारा घोटाले पर भी उन्होंने अपना पक्ष रखा है. पत्रकार ए.जे. फिलिप के पत्र हवाले से उन्होंने यह बात सामने रखी कि जिस घोटाले का भंडाफोड़ करने का श्रेय उन्हें मिलना चाहिए उसके बदले उन्हें जेल में डाल दिया गया. लालू यादव ने पूरी कहानी बता कर यह भी दावा किया है कि उन्होंने वीपी सिंह को मण्डल लागू करने का सुझाव दिया था.
उन्होंने बहुत विस्तार से वीपी सिंह और देवीलाल के बीच प्रतिद्वंदिता का जिक्र किया है. उन्होंने ही इसके काट के रूप में वीपी सिंह को मण्डल लागू करने के सुझाव दिया और उसका गुणा-गणित समझाया, जबकि वे देवीलाल गुट के आदमी माने जाते थे. उन्होंने शरद यादव और रामविलास पासवान द्वारा श्रेय लेने के दावे को झूठी कहानी बताया. लालू यादव ने अपनी महत्वकांक्षाओं को किताब में छुपाया नहीं कि वे किसी भी कीमत पर सत्ता पाना चाहते थे. मंत्री बनने के लिए वे और नीतीश कुमार अपना सबसे अच्छा कुर्ता-पायजामा पहन कर प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास घूमा करते थे.
लालू यादव ने लिखा कि वे सिद्धांतों में कम और काम करने में ज्यादा यकीन करते हैं. उन्होंने अपने मुख्यमंत्री के पहले कार्यकाल में कई बार चौंकाने वाले फैसले लिए. एक बार तो वो हेट पहनकर रात में पुलिस के साथ ईंट के भट्टा पर पहुँच गए. वहाँ से अक्सर गरीब महिलाओं के यौन शोषण की खबरें आती रहती थी.
उन्होंने रात को ही छापा मार कर एक महिला को आजाद कराया और डीएम से कहकर उसको नौकरी भी दिलवाई. सामंतों ने गंगा नदी पर भागलपुर और पीरपैंती के बीच 80 किलोमीटर तक कब्जा करके ‘जल एस्टेट’ बना लिया था और मछुआरों से मछली मारने के एवज में टैक्स वसूलते थे. लालू यादव ने इस दबदबे को खत्म किया.
दरअसल लालू यादव को ऐसा बिहार मिला था जो सामंतों के कब्जे में था. सत्ता-संसाधन के हर क्षेत्र पर सवर्णों का कब्जा था. इस व्यवस्था को एक दिन में नहीं बदला जा सकता था. इसलिए लालू यादव तात्कालिक असर के लिए ‘अजीबोगरीब’ फैसले लेते थे, जिसे विरोधी नाटक का नाम देते थे.
वे रात को दलित बस्तियों में पहुंच जाते और दरवाजा खटखटा कर उनका हालचाल पूछते कि कोई तंग तो नहीं कर रहा. इस वजह से शोषक जातियों में डर फैला और वंचितों में बराबरी का एहसास हुआ. बाद के दिनों में यही बराबरी का एहसास था जिस पर नीतीश कुमार ने ‘विकास’ की फसल बोयी. एक बार तो उनहोंने एक ताड़ी इकट्ठा करने वाले को मंच पर भाषण देने के लिए बुला लिया. मंच पर बैठे सीपीआई के लोग इस ‘तमाशे’ से नाराज हो गए.
लालू यादव ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया था कि शिकायत दर्ज कराने आए गरीबों को सबसे पहले सम्मानपूर्ण थाने में बैठने की जगह दी जाय. उन्होंने अमीरों के लिए आरक्षित पटना क्लब को आम आदमी के लिए भी खोल दिया. उन्होंने कहा कि डोम, चमार जैसी जातियां रोड पर शादी करने को मजबूर है उनको भी पटना क्लब में शादी पार्टी करने का मौका मिले.
जब लाल कृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करना था तब लालू यादव रात भर नहीं सोये. उनकी पहली योजना लीक हो गयी थी और आडवाणी ने अपना रास्ता बदल लिया था. दूसरी योजना के तहत उन्होंने सुबह 4 बजे पत्रकार बनकर गेस्ट हाउस में फोन किया और कर्मचारी के हाथों आडवाणी जी के फोन का रिसीवर नीचे रखवा कर गिरफ्तारी का जाल बुन दिया. आडवाणी जी को भनक भी न लगी.
इस किताब में नीतीश कुमार मुख्य तौर पर लालू यादव के निशाने पर रहे हैं. नीतीश कुमार को लेकर इस किताब में बहुत कुछ है. कई अध्यायों में उनका जिक्र तो है ही साथ ही एक अलग चैप्टर भी है ‘छोटा भाई नीतीश’ नाम से. उस बात का जिक्र भी है जिसमें नितीश दुबारा लालू के साथ गठबंधन में वापस आना चाहते थे. अपने ऊपर जातिवादी होने के आरोप पर वे कहते हैं कि नीतीश और अन्य विरोधी नेता अपनी जाति के सम्मेलन में शामिल होते रहे हैं, लेकिन मैं आज तक किसी यादव सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ हूं.
अपने रेल मंत्री के कार्यकाल को लालू यादव ने सबसे सुखद माना है. रेलवे को घाटा से निकालने की पूरी कहानी उन्होंने लिखी है. अंतिम अध्याय उन्होंने तेजस्वी यादव पर केन्द्रित किया है. तेजप्रताप और मीसा भारती का जिक्र यदा कदा ही हुआ है. इस प्रकार उन्होंने सीधे-सीधे तेजस्वी के पक्ष में अपना राजनैतिक वसीयतनामा लिख दिया.
किताब में बार-बार इस बात का जिक्र मिलेगा कि कैसे कुलीन मीडिया ने उनकी छवि को गलत तरीके से पेश किया. इसलिए उन्होंने अपनी जनता से सीधा संवाद करने के लिए पटना में बड़ी-बड़ी रैलियां आयोजित की. उन्होंने अपनी गलतियों को भी ईमानदारी से स्वीकार किया है कि राजनीतिक सफलताओं ने मुझे अहंकारी बना दिया था. मैं लोगों से दूर हो गया था. बाद में उन्होंने इसमें सुधार किया.
लालू प्रसाद यादव की आत्मकथा ‘गोपालगंज से रायसीना’ प्रकाशित होते ही चर्चा में आ गयी. यह किताब उन्होंने पत्रकार नलिन वर्मा के साथ मिल कर लिखी है. 235 पेज की यह किताब रूपा पब्लिकेशन्स से हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुई है. इसकी प्रस्तावना सोनिया गांधी ने लिखी है. 36 तस्वीरों के सहारे भी उनके जीवन के विविध रंग इस किताब में देखे जा सकते हैं. प्रस्तावना और उपसंहार के अलावा इसमें तेरह अध्याय हैं.
(लेखक जेएनयू से ‘उपेक्षित जीवन के विविध आयाम’ विषय पर पीएचडी कर रहे हैं.)
Thursday, April 4, 2019
नीतीश कुमार जी आपने बिहारी भावनाओं का कत्ल कर दिया। राजद को जनता का सबसे अधिक प्यार मिला बावजूद इसके लालू जी ने आपको नेतृत्व का अवसर दिया : बाबुल इनायत
नीतीश कुमार जी आपने बिहारी भावनाओं का कत्ल कर दिया। राजद को जनता का सबसे अधिक प्यार मिला बावजूद इसके लालू जी ने आपको नेतृत्व का अवसर दिया : बाबुल इनायत
आपने नैतिकता का गला घोंट दिया और जनादेश का अपमान किया. आप नैतिक रूप बहुत ही कमजोर पड़ चुके हैं.
आपके 2019 के लोकसभा चुनाव में जनता के बीच जाकर जनादेश मांगने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. आपके चेहरे से नकाब उतर चुका है. जनता - जनार्दन आपको पहचान चुकी है. इस बार आम जनमानस आपको सबक सिखाने के लिए तैयार है.
बिहार की जनता साधारण अपमान बर्दाश्त नहीं करती. आपने तो जनादेश के साथ हैवानियत की है. इसका परिणाम आपको इस बार देखने को मिल जाएगा.
जय हिंद , जय बिहार , जय राजद , जय महागठबंधन.
Sunday, March 31, 2019
पुलवामा अटैक से 40 सैनिको की शहादत वाले दिन से लेकर अब तक प्रधान प्रचारक मोदी की एक दर्जन से ऊपर रैलियां हो चुकी हैं।
पुलवामा अटैक से 40 सैनिको की शहादत वाले दिन से लेकर अब तक प्रधान प्रचारक मोदी की एक दर्जन से ऊपर रैलियां हो चुकी हैं। फिर भी जनता में बीजेपी के पक्ष में कोई माहौल नही बन पा रहा है। स्टार प्रचारक योगी और अमित शाह की रैलियों में खाली कुर्सियां और खाली मैदान भक्तों को मायूस कर रहे हैं।
आज प्रधान चौकीदार का मेगा इवेंट भी टीवी पर लाइव चलता रहा लेकिन टीवी देखने वाले आईपीएल पर ज्यादा चर्चा करते पाए गए। कल अखबार में मुख्य पेज पर छापा जाएगा,लेकिन अब लोग हेडिंग पढ़कर पन्ना पलटने लगे हैं। करोड़ो रु की ये प्रयोजित नौटंकी भी फ्लॉप हो गई। यकीन न हो तो भक्तों की वाल चेक कर लीजिए।
आज के दिन सोशल मीडिया पर दो लोगों की फोटो बहुत वायरल हो रही हैं। एक मे ओएनजीसी को बरबाद करने वाला संबित पात्रा उड़ीसा में गरीब की झोपड़ी में बैठ कर मिट्टी से बने चूल्हे से बनाया गया भोजन कर रहा है। ये तस्वीर और इसका वीडियो प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्वला गैस योजना की पोल खोलती है। रैलियो में मोदी जी इन योजनाओं की सफलता के कितने भी दावे करें,किंतु यथार्थ के धरातल पर यही सच है,जो संबित पात्रा ने दिखाया है।
दूसरी तस्वीर मथुरा की सांसद हेमा मालिनी की है। कटे हुए गेहूँ की फसल काटने की एक्टिंग करके फोटो में खिलखिला रही हैं। सांसदी का अपना मजा भी है इसलिए ये एक्टिंग भी लाजमी है। एक आरटीआई से पता चला है कि मोदी सरकार ने हेमा मालिनी को 70 करोड़ की एक जमीन मात्र पौने दो लाख में बेच दी है।
छत्तीसगढ़ के भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का दामाद 50 करोड़ के घोटाले में फरार है, और रमन सिंह कह रहे है मैं भी चौकीदार हूँ। रॉबर्ट बाड्रा को जेल भेजने का भोंपू बजाने वाले अपने जीजा की करतूत पर शांत हैं।
पिछले 5 साल में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति 3 गुना और उनकी पत्नी की 16 गुना बढ़ गयी है। पुत्र जय शाह तो सम्पत्ति बढ़ाने के सभी पुराने रिकार्ड तोड़ चुके हैं। इसको भृष्टाचार न मानिए ये सब राष्ट्रवाद माना जाता है।
खैर इसको भी जाने दीजिए और एक बहुत महत्वपूर्ण बात सुनिए, इस चुनाव में बीजेपी को हर लोकसभा में 25 हजार से 1 लाख वोटों का नुकसान है लेकिन पत्तलकारों को एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर लिखने बोलने को ऊपर से मनाही है। शायद ये भारत का पहला ऐसा चुनाव है जिसमे सत्ता के विरुद्ध बनी स्वाभाविक एंटी इनकम्बेंसी लहर को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सात चरण में चुनाव कराने वाला चुनाव आयोग कह रहा है कि 50% VVPAT पर्ची गिनने से नतीजों में पाँच दिन देर होगी। फिर VVPAT का मतलब ही क्या रह गया ? पहले भी बैलेट पेपर डेढ़ दिन में गिन लिए जाते थे,तो अब पर्चियां क्यों नहीं गिनी जा सकती ? टी एन शेषन को इसी वजह से लोग आज भी भूले नही हैं। चुनाव आयोग तो खत्म ही समझिये, सुप्रीम कोर्ट से कुछ आस बची है।
एक और जरूरी बात जान लीजिए। इसे लेसन नम्बर 8 भी कह सकते हैं। वो रोज़ एक सराब, खराब टाइप का चुटकुला छोड़ेंगे और आप सब उस पर नए चुटकुले बनाने की योग्यता दिखाएँगे। सवालों को भटकाने का ये सबसे आसान तरीक़ा है। विपक्ष को इससे बचना चाहिए।आज के लिए इतना ही ठीक है।
Http://www.babulinayat.in
आज प्रधान चौकीदार का मेगा इवेंट भी टीवी पर लाइव चलता रहा लेकिन टीवी देखने वाले आईपीएल पर ज्यादा चर्चा करते पाए गए। कल अखबार में मुख्य पेज पर छापा जाएगा,लेकिन अब लोग हेडिंग पढ़कर पन्ना पलटने लगे हैं। करोड़ो रु की ये प्रयोजित नौटंकी भी फ्लॉप हो गई। यकीन न हो तो भक्तों की वाल चेक कर लीजिए।
आज के दिन सोशल मीडिया पर दो लोगों की फोटो बहुत वायरल हो रही हैं। एक मे ओएनजीसी को बरबाद करने वाला संबित पात्रा उड़ीसा में गरीब की झोपड़ी में बैठ कर मिट्टी से बने चूल्हे से बनाया गया भोजन कर रहा है। ये तस्वीर और इसका वीडियो प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्वला गैस योजना की पोल खोलती है। रैलियो में मोदी जी इन योजनाओं की सफलता के कितने भी दावे करें,किंतु यथार्थ के धरातल पर यही सच है,जो संबित पात्रा ने दिखाया है।
दूसरी तस्वीर मथुरा की सांसद हेमा मालिनी की है। कटे हुए गेहूँ की फसल काटने की एक्टिंग करके फोटो में खिलखिला रही हैं। सांसदी का अपना मजा भी है इसलिए ये एक्टिंग भी लाजमी है। एक आरटीआई से पता चला है कि मोदी सरकार ने हेमा मालिनी को 70 करोड़ की एक जमीन मात्र पौने दो लाख में बेच दी है।
छत्तीसगढ़ के भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का दामाद 50 करोड़ के घोटाले में फरार है, और रमन सिंह कह रहे है मैं भी चौकीदार हूँ। रॉबर्ट बाड्रा को जेल भेजने का भोंपू बजाने वाले अपने जीजा की करतूत पर शांत हैं।
पिछले 5 साल में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति 3 गुना और उनकी पत्नी की 16 गुना बढ़ गयी है। पुत्र जय शाह तो सम्पत्ति बढ़ाने के सभी पुराने रिकार्ड तोड़ चुके हैं। इसको भृष्टाचार न मानिए ये सब राष्ट्रवाद माना जाता है।
खैर इसको भी जाने दीजिए और एक बहुत महत्वपूर्ण बात सुनिए, इस चुनाव में बीजेपी को हर लोकसभा में 25 हजार से 1 लाख वोटों का नुकसान है लेकिन पत्तलकारों को एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर लिखने बोलने को ऊपर से मनाही है। शायद ये भारत का पहला ऐसा चुनाव है जिसमे सत्ता के विरुद्ध बनी स्वाभाविक एंटी इनकम्बेंसी लहर को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सात चरण में चुनाव कराने वाला चुनाव आयोग कह रहा है कि 50% VVPAT पर्ची गिनने से नतीजों में पाँच दिन देर होगी। फिर VVPAT का मतलब ही क्या रह गया ? पहले भी बैलेट पेपर डेढ़ दिन में गिन लिए जाते थे,तो अब पर्चियां क्यों नहीं गिनी जा सकती ? टी एन शेषन को इसी वजह से लोग आज भी भूले नही हैं। चुनाव आयोग तो खत्म ही समझिये, सुप्रीम कोर्ट से कुछ आस बची है।
एक और जरूरी बात जान लीजिए। इसे लेसन नम्बर 8 भी कह सकते हैं। वो रोज़ एक सराब, खराब टाइप का चुटकुला छोड़ेंगे और आप सब उस पर नए चुटकुले बनाने की योग्यता दिखाएँगे। सवालों को भटकाने का ये सबसे आसान तरीक़ा है। विपक्ष को इससे बचना चाहिए।आज के लिए इतना ही ठीक है।
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Saturday, March 30, 2019
आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी जब मुसहर महिला को पहचान कर बोला "सुखमनी तुम यहाँ"
babulinayat.in
लालू जी की याददाश्त बहुत ग़ज़ब की है. एक बार वो जिससे मिल लेते हैं, उनका नाम और चेहरा कभी नहीं भूलते।
"एक बार लालू जी एक पब्लिक मीटिंग में गए थे। वहाँ पर एक बड़ा सा लोहे वाला माइक लटका हुआ था। एक फटी दरी लगी हुई थी। 'ऑर्गनाइज़र' भी वहाँ से नदारद थे। नेता लोग अमूमन देर से पहुंचते हैं। लालू जी थोड़ा पहले पहुंच गए।"
"जब लालू जी पहुंचे तो मुसहर लोगों के टोले में रहने वाले लोगों ने सबसे पहले लालू जी सब को देखा। वो भागते हुए वहाँ पहुंचे। एक युवती लालू जी की नज़रों को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। उसके हाथ में एक बच्चा था। लालू जी ने उसको देखते ही पूछा, 'सुखमनी तुम यहाँ कैसे? तुम्हारी शादी यहीं हुई है क्या?' फिर लालू ने उसकी दूसरी बहन का नाम ले कर पूछा कि वो कहाँ है? उसने बताया कि बगल वाले गाँव में उसकी भी शादी हुई है। लालू जी ने तुरंत अपनी जेब से पाँच सौ रुपये का नोट निकाल कर उसे देते हुए कहा कि इससे बच्चे के लिए मिठाई वग़ैरह ख़रीद लेना।"
सबको बड़ा ताज्जुब हुआ कि एक ग़रीब औरत को लालू जी न सिर्फ़ नाम ले कर बुला रहे हैं, बल्कि उसकी बहन के बारे में भी पूछ रहे हैं। लालू जी बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने से पहले जब वो पटना के वेटरिनरी कॉलेज में रहा करते थे, तो उक्त महिला वहीं पास के मुसहर टोला में रहती थी। लालू यादव जी सालों गुज़र जाने के बाद भी उसे नहीं भूले थे। ये जो लालू जी की महान शख़्सियत है, यही उनकी ताक़त है।" हर गरीब के दिलों में लालू जी का नाम बसा है।
यह वाकया शिवानंद तिवारी जी ने बीबीसी को बताया था।
आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी जब मुसहर महिला को पहचान कर बोला ..... "सुखमनी तुम यहाँ"
लालू जी की याददाश्त बहुत ग़ज़ब की है. एक बार वो जिससे मिल लेते हैं, उनका नाम और चेहरा कभी नहीं भूलते।
"एक बार लालू जी एक पब्लिक मीटिंग में गए थे। वहाँ पर एक बड़ा सा लोहे वाला माइक लटका हुआ था। एक फटी दरी लगी हुई थी। 'ऑर्गनाइज़र' भी वहाँ से नदारद थे। नेता लोग अमूमन देर से पहुंचते हैं। लालू जी थोड़ा पहले पहुंच गए।"
"जब लालू जी पहुंचे तो मुसहर लोगों के टोले में रहने वाले लोगों ने सबसे पहले लालू जी सब को देखा। वो भागते हुए वहाँ पहुंचे। एक युवती लालू जी की नज़रों को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। उसके हाथ में एक बच्चा था। लालू जी ने उसको देखते ही पूछा, 'सुखमनी तुम यहाँ कैसे? तुम्हारी शादी यहीं हुई है क्या?' फिर लालू ने उसकी दूसरी बहन का नाम ले कर पूछा कि वो कहाँ है? उसने बताया कि बगल वाले गाँव में उसकी भी शादी हुई है। लालू जी ने तुरंत अपनी जेब से पाँच सौ रुपये का नोट निकाल कर उसे देते हुए कहा कि इससे बच्चे के लिए मिठाई वग़ैरह ख़रीद लेना।"
सबको बड़ा ताज्जुब हुआ कि एक ग़रीब औरत को लालू जी न सिर्फ़ नाम ले कर बुला रहे हैं, बल्कि उसकी बहन के बारे में भी पूछ रहे हैं। लालू जी बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने से पहले जब वो पटना के वेटरिनरी कॉलेज में रहा करते थे, तो उक्त महिला वहीं पास के मुसहर टोला में रहती थी। लालू यादव जी सालों गुज़र जाने के बाद भी उसे नहीं भूले थे। ये जो लालू जी की महान शख़्सियत है, यही उनकी ताक़त है।" हर गरीब के दिलों में लालू जी का नाम बसा है।
यह वाकया शिवानंद तिवारी जी ने बीबीसी को बताया था।
Thursday, March 28, 2019
महागठबंधन के उम्मीदवार श्री सरफराज आलम का नामांकन समारोह।
अररिया चले।। अररिया चले।। अररिया चले।।
प्रिय साथी,
श्री सरफराज आलम जी आज 29 मार्च दिन के 2:00 बजे बादे नमाज जुमा नेताजी सुभाष स्टेडियम अररिया में महागठबंधन की तरफ से अपना नॉमिनेशन देंगे।
महागठबंधन प्रत्याशी माननीय सांसद सरफराज आलम जी के नामांकन समारोह में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जी विकासशील इंसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी जी अररिया नेता जी स्टेडियम में 2:00 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे आप सभी से विन्रम निवेदन है भारी संख्या में उपस्थित होकर सरफराज आलम जी का हौसला अफजाई करें धन्यवाद।
श्री सरफराज आलम जी आज 29 मार्च दिन के 2:00 बजे बादे नमाज जुमा नेताजी सुभाष स्टेडियम अररिया में महागठबंधन की तरफ से अपना नॉमिनेशन देंगे।
महागठबंधन प्रत्याशी माननीय सांसद सरफराज आलम जी के नामांकन समारोह में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जी विकासशील इंसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी जी अररिया नेता जी स्टेडियम में 2:00 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे आप सभी से विन्रम निवेदन है भारी संख्या में उपस्थित होकर सरफराज आलम जी का हौसला अफजाई करें धन्यवाद।
मोदी नही मुद्दे पे आइए। देश को बचाइए : बाबुल इनायत
आप तब भी बेरोज़गार थे और अब भी बेरोज़गार है लेकिन वह चायवाला से प्रधान सेवक एवं पकौड़ेवाला बनते हुए अब चुनाव के वक़्त फिर चौकीदार बन गया है। कहाँ है 2 करोड़ नौकरी वाला वादा??
#मोदी_नहीं_मुद्दे_पे_आइये
हर वर्ष दो करोड़ नौकरी का स्वर्ग दिखाने वाले पकौड़े तलने व चौकीदारी में भी श्रय लेने लगे!
बेरोजगारों के सपनो से इतना भद्दा मजाक?
#मोदी_नही_मुद्दे_पे_आइए। #देश_बचाइए।
SC ST Act जैसे दलित उत्थान की मूल आवश्यकताओं के साथ मनुवादी छेड़छाड़ कर दलितों के मानवाधिकार के साथ क्यों खिलवाड़ हो रहा है?
100 स्मार्ट सिटी बनाने का सपना दिखाकर एक भी शहर का एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ! स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का क्या हुआ?
#मोदी_नहीं_मुद्दे_पे_आइये
मैं कैसे यकीन कर लूं तेरी जुमलेबाजी पर
तुमने तो गंजो को भी कंघी बेच दिया।
आप बेरोज़गारी पर बात करोगे तो वो राष्ट्रवाद बतियाने लगेंगे। इन ठगों के झाँसे में नहीं आना, अपनी नौकरी की माँग पर अड़े रहना।
https://www.timesnewslive.com/2019/03/blog-post_15.html
मोदी जी 2014 के वादों पर भी बात करिए।
https://www.timesnewslive.com/2019/03/2014.html
तेजस्वी ने पूछा है कि जनादेश चोरी से बिहार में बनी पलटीमार डबल इंजन की सरकार से बिहार को क्या लाभ हुआ?
https://khabar.ndtv.com/news/bihar/modi-tell-us-his-what-promise-of-2014-fulfilled-tejaswi-yadav-2009524
राबड़ीदेवी ने पीएम मोदी की 'मैं भी चौकीदार' वाली बात पर जमकर हमला बोला है ...
https://bit.ly/2Flwi4r
Thursday, March 21, 2019
Friday, March 15, 2019
जब सत्ता के शीर्ष पर अंग्रेज़ो की चापलूसी करने वालो की नस्ले हों : बाबुल इनायत
जब सत्ता के शीर्ष पर अंग्रेज़ो की चापलूसी करने वालो की नस्ले हों ,जब सत्ता के शीर्ष पर गांधी की हत्या वाली विचारधारा काबिज़ हो,जब सत्ता के शीर्ष पर वो लोग काबिज़ हों जिनका मुल्क की आज़ादी में कोई योगदान न होकर मुखबिरी करना रहा हो,जब सत्ता के शीर्ष पर वो लोग हों जो अज़हर मसूद को कंधार तक छोड़ आने वाले पार्टी के लोग हों,जब एक जानवर के नाम पर इंसानो की हत्या करने वालो के परोक्ष समर्थक सत्ता के शीर्ष पर हों ,जब संविधान और लोकतंत्र की हत्या करने वाले सरकार में हों,जब माँ के पेट को चीर कर अजन्मे वजूद की हत्या करने वाले सरकार में हों, तो फिर अघोषित आपातकाल कोई अचंभा नही हैं, वही सवाल उठाएगा जो निष्पक्ष होगा जो लोकतंत्र की बात करेगा जो इन्साफ की बात करेगा या तो हिंसक पशु वाली मानसिकता वाली भीड़ उनको मार डालेगी या देश द्रोही कह डालेगी क्योंकि सवालो के जवाब होंगे नही ,सिर्फ जुमला बाज़ी बकलोली आतंक नफरत गुंडागर्दी के सिवा उनके पास कुछ भी नही ।
मोदी जी बेरोज़गारी पर बात करने पर आपका गला क्यों सुख जाता है : तेजस्वी यादव
मोदी जी बेरोज़गारी पर बात करने पर आपका गला क्यों सुख जाता है : तेजस्वी यादव
——————किसी भी सरकार की सफलता, गुणवत्ता व दूरदर्शिता का प्रतीक उसकी आर्थिक व सामाजिक नीतियाँ होती हैं। मोदी सरकार देश के सामाजिक स्वरूप को उधेड़-उधेड़ कर अराजकता की ओर मोड़ रही है तो दूसरी तरफ़ अपने स्टंट के ज़रिए देश के आर्थिक विकास के पहिए ही उखाड़ अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया है
रोजगार सृजन से अर्थव्यवस्था का अंदाजा लग जाता है। लेकिन यहाँ तो दो करोड़ नौकरी प्रति वर्ष का नारा लगाने वाले 5 साल में उसके सौवें भाग तक भी उस वादे को निभा नहीं पाए। NSSO की रिपोर्ट के अनुसार इन पाँच सालों में पचास साल का रोना रोने वालों के कारण रोज़गार की पिछले 45 वर्षों में सबसे बदतर स्थिति रही।
एक अन्य CMIE की रिपोर्ट के अनुसार नोटबन्दी ने असंगठित क्षेत्र से 11 करोड़ नौकरियाँ लील कर दी, जिसकी मार देश के सबसे निचले तबके के लोगों पर पड़ी। यही नहीं Make In India का शेर गुर्राने-दहाड़ने के बजाय 5 साल तक मिमियाते रहा। पूंजी निवेश लाने और रोज़गार सृजन- दोनों ही मामले में इवेंट मैनज्मेंट के सहारे काग़ज़ पर बनाया गया मेक-इन-इंडिया का शेर चारों खाने चित्त हो गया।
संगठित, असंगठित, निजी व सरकारी क्षेत्र- सभी की स्थिति बद से बदतर है। हर क्षेत्र से रोजगार के अवसर खत्म ही नहीं हो रहे बल्कि कार्यरत मानव संसाधन की छटनी भी बदस्तूर जारी है। BSNL, ONGC जैसी नवरत्न कम्पनियों को जानबूझकर नीम हकीम नीतियों से घाटे में धकेला जा रहा है, विनिवेश की ज़मीन तैयार की जा रही है।
युवाओं व बेरोजगारों को अंधेरे में रखने के लिए सरकार ने तीन-तीन बार बेरोजगारी के आँकड़े प्रकाशित होने से रोक दिया गया। हाल ही में MUDRA योजना के द्वारा करवाए गए बेरोजगारी पर एक रिपोर्ट को भी प्रकाशित होने से रोक दिया।
श्रमिक वर्ग का 80% प्रतिशत, कुल मानव संसाधन का एक चौथाई और कौशल प्राप्त कर्मियों का एक तिहाई भाग आज भी निर्धनता से जूझ रहा है। मोदी जी के आसमानी वादों के मारे करोड़ों युवा नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहे है।
छलावा पार्टी की छलिया सरकार ने भर्ती के बहाने आवेदन पत्रों की फ़ीस के नाम ही बेरोज़गार युवाओं से हज़ारों करोड़ रुपए लूट लिए। अकेले रेलवे ने बेरोजगारों के आवेदनों से अरबों कमाए है।
युवाओं का ध्यान भटकाने के लिए सामाजिक सौहार्द के साथ खिलवाड़ हो रहा है। युवाओं को काल्पनिक शत्रु दिखा कर बेरोज़गारी के सवाल से दूर किया जा रहा हैं। मोदी सरकार बेरोज़गारी पर बात करने से क्यों डरती है? युवा साथियों से आग्रह है वो अपने जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों को आगामी चुनाव में तरजीह दे। मोदी जी से 2014 के घोषणा पत्र पर सवाल जवाब करे।
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सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला की शिवहर के विधायक चेतन आनंद का पटना के एम्स में पिटाई कर दी गई यह कोई नई और पहली घटना नहीं है।इससे पहले भी चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप की भी पिटाई हो चुकी है। यह सब इसलिए खबर में आ जाता है क्योंकि यह लोग आम आदमी नहीं है तो सोचिए आम आदमी का क्या होता होगा रोजमर्रा की जिंदगी में जो खबर लोगों तक पहुंच ही नहीं पाती है।
सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला की शिवहर के विधायक चेतन आनंद का पटना के एम्स में पिटाई कर दी गई यह कोई नई और पहली घटना नहीं है।इससे पहले भ...
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बाबा साहेब की विचारधारा और संघर्ष आज भी हमें सामाजिक न्याय, समानता और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरणा देते हैं। उनके सिद्धां...
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अररिया जिला के 35 वाँ वर्षगांठ पर समस्त अररिया जिलावासियों को दिल की गहराई से मुबारकबाद पेश करता हूं। 14/01/1990 बाबुल इनायत जिला सचिव राष...

























