जिस देश की पुलिस जंग लगा तमंचा या गांजे की पुड़िया की फर्जी बरामदगी दिखाकर किसी को भी जेल भेज देती है,उस देश की पुलिस से आप ट्रैफिक चालान काटने में ईमानदारी की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ? शुरुआत में एम वी एक्ट में बड़े बड़े चालान बड़ी ईमानदारी से काटे जाएंगे। इतना ज्यादा कि जनता में ट्रैफिक चालान के नाम पर दहशत फैल जाएगी। महानगरों में फोटोयुक्त ई- चालान और छोटे शहरों,कस्बों में नाम,जाति,धर्म चेक करके एमवी एक्ट की धाराएं तय की जाएंगी। असली खेल तो 3 महीने बाद शुरू होगा। पूरा का पूरा सिस्टम सरकार के इस फैसले से अपार हर्षित है। याद रखिये ये उसी देश की पुलिस है,जो फर्जी केस बनाने और फर्जी एनकाउंटर के लिए कुख्यात है। दरोगा लोगों की तो निकल पड़ी। आम पब्लिक के लिए तो ये सब भी राष्ट्रवाद की श्रेणी में आ गया है। नियमो का पालन कीजिये और चालान से बचिए,जैसे नैतिक वाक्य भी खूब बोले जा रहे हैं। गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल पर बात करना या न करना कैसे साबित करोगे ? प्रदूषण प्रमाणपत्र से लेकर चप्पल पहन कर गाड़ी चलाने,नम्बर प्लेट के मानक जैसे तमाम पेंच हैं जिनके बारे में पब्लिक को पता ही नही है। जिसको नापना होगा उसके पास हजार तरीके हैं। आप अपनी नैतिकता का अचार बना कर रखे रहिये। सऊदी अरब के कड़े नियमो का हवाला देकर भारत से तुलना करने वालों का इस पोस्ट पर विशेष स्वागत है ! लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने के लिए इसीतरह के छोटे छोटे प्रयोग कर जनता की सहन शक्ति परखी जाती है। अभी आप नही समझ रहे हैं !
Thursday, September 5, 2019
Wednesday, September 4, 2019
आज बिहार लेनिन बाबू जगदेव की पुण्यतिथि है।
जगदेव बाबू ने कहा था, "जिस लड़ाई की बुनियाद आज मैं डाल रहा हूं, वह लम्बी और कठिन होगी। इसमें पहली पीढ़ी के लोग मारे जाएंगे, दूसरी पीढ़ी के लोग जेल जाएंगे तथा तीसरी पीढ़ी के लोग राज करेंगे। जीत अंततोगत्वा हमारी ही होगी"।
वो कितना सच कहते हैं, "दस प्रतिशत शोषकों के जुल्म से छुटकारा दिलाकर नब्बे प्रतिशत शोषितों को नौकरशाही और जमीनी दौलत पर अधिकार दिलाना ही सामाजिक न्याय है।"
उनके इंकलाबी नारों को कौन भूल सकता है:
"सौ में नब्बे शोषित हैं, शोषितों ने ललकारा है
धन-धरती और राजपाट पे नब्बे भाग हमारा है।"
"पहली पीढ़ी के लोग मारे जाएंगे, दूसरी पीढ़ी के लोग जेल जाएंगे, और तीसरी पीढ़ी के लोग राज करेंगे।"
ज़ाहिर सी बात है कि जगदेव बाबू मारे गए, लालू जी जेल में हैं, और हम तीसरी पीढ़ी के लोग संघर्षरत हैं, ज़माना बदलेगा।
बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि जिस रामाश्रय सिंह ने बिहार लेनिन आदरणीय जगदेव प्रसाद कुशवाहा जी को लाठियों से पीट-पीटके मार दिया, सड़क पर घसीटा, प्यास लगने पर मुंह पर पेशाब कर दिया था, उसी गुंडे रामाश्रय सिंह को नीतीश जी ने संसदीय कार्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री बना दिया था। इतना ही नहीं, नीतीश जी ने रामाश्रय सिंह की प्रतिमा भी लगवा दी। ये कोयरी-कुर्मी के कैसे हितैषी नेता हैं भाई?
इसलिए, सत्ता में भले समाज की पीठ में छूरा भोंकने वाले बैठ जाएँ, शोषकों के ख़िलाफ़ शोषितों की लड़ाई जारी रहेगी।
अमर शहीद जगदेव बाबू को शत-शत नमन!
जगदेव बाबू ने कहा था, "जिस लड़ाई की बुनियाद आज मैं डाल रहा हूं, वह लम्बी और कठिन होगी। इसमें पहली पीढ़ी के लोग मारे जाएंगे, दूसरी पीढ़ी के लोग जेल जाएंगे तथा तीसरी पीढ़ी के लोग राज करेंगे। जीत अंततोगत्वा हमारी ही होगी"।
वो कितना सच कहते हैं, "दस प्रतिशत शोषकों के जुल्म से छुटकारा दिलाकर नब्बे प्रतिशत शोषितों को नौकरशाही और जमीनी दौलत पर अधिकार दिलाना ही सामाजिक न्याय है।"
उनके इंकलाबी नारों को कौन भूल सकता है:
"सौ में नब्बे शोषित हैं, शोषितों ने ललकारा है
धन-धरती और राजपाट पे नब्बे भाग हमारा है।"
"पहली पीढ़ी के लोग मारे जाएंगे, दूसरी पीढ़ी के लोग जेल जाएंगे, और तीसरी पीढ़ी के लोग राज करेंगे।"
ज़ाहिर सी बात है कि जगदेव बाबू मारे गए, लालू जी जेल में हैं, और हम तीसरी पीढ़ी के लोग संघर्षरत हैं, ज़माना बदलेगा।
बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि जिस रामाश्रय सिंह ने बिहार लेनिन आदरणीय जगदेव प्रसाद कुशवाहा जी को लाठियों से पीट-पीटके मार दिया, सड़क पर घसीटा, प्यास लगने पर मुंह पर पेशाब कर दिया था, उसी गुंडे रामाश्रय सिंह को नीतीश जी ने संसदीय कार्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री बना दिया था। इतना ही नहीं, नीतीश जी ने रामाश्रय सिंह की प्रतिमा भी लगवा दी। ये कोयरी-कुर्मी के कैसे हितैषी नेता हैं भाई?
इसलिए, सत्ता में भले समाज की पीठ में छूरा भोंकने वाले बैठ जाएँ, शोषकों के ख़िलाफ़ शोषितों की लड़ाई जारी रहेगी।
अमर शहीद जगदेव बाबू को शत-शत नमन!
Friday, July 5, 2019
राष्ट्रीय जनता दल 23 वाँ स्थापना दिवस
तारीख 05 जुलाई 1997 को सामाजिक न्याय के नए अध्याय की शुरुआत हुई थी। इसी दिन राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना हुई थी। 05 जुलाई 2019 को राजद अपने स्वर्णिम 23 वें वर्ष में प्रवेश कर गया।
इतने वर्षों में न श्री लालू यादव जी झुके, न राजद परिवार झुका। सामाजिक न्याय, दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक के कल्याण का संघर्ष आज भी जारी है।
इस ऐतिहासिक सफर में फासीवादी ताकतें, सामंती, ब्राह्मणवादी, गरीब विरोधी लोगों ने हर संभव झुकाने की कोशिश की। हम लड़ते रहे, जीतते रहे।
हमारी विचारधारा की नींव इतनी मजबूत है कि कोई हमे हिला नहीं सका। हम प्रतिबद्ध हैं। हम लक्ष्य प्राप्त करेंगे। आज हमारा दौर संघर्ष का है। संघर्ष कभी बेकार नहीं जाता।
हम इस देश के भीतर, बिहार के भीतर सामाजिक न्याय की परिकल्पना को साकार करेंगे। जरूरत है सिर्फ आप सभी राजद के सिपाही, सामाजिक न्याय के पक्षधर लोग अपना हौसला बनाएं रखें।
राजद ने आज 23 वें वर्ष में प्रवेश किया है। यह कठिन तपस्या का परिणाम है। हमे सफलता - असफलता सब मिली। राजद ने इतिहास लिखा है। सभी अनुभवों से सीखकर हम आगे भी इतिहास लिखेंगे। राजद समझौता की पार्टी नहीं है। यह विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध जनता की पार्टी है। आइए नए सुबह के लिए राजद को और मजबूत बनाएं, राजद से जुड़ें, राजद को प्यार दें। लालू जी के सपनों को साकार करें।
- बाबुल इनायत
इतने वर्षों में न श्री लालू यादव जी झुके, न राजद परिवार झुका। सामाजिक न्याय, दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक के कल्याण का संघर्ष आज भी जारी है।
इस ऐतिहासिक सफर में फासीवादी ताकतें, सामंती, ब्राह्मणवादी, गरीब विरोधी लोगों ने हर संभव झुकाने की कोशिश की। हम लड़ते रहे, जीतते रहे।
हमारी विचारधारा की नींव इतनी मजबूत है कि कोई हमे हिला नहीं सका। हम प्रतिबद्ध हैं। हम लक्ष्य प्राप्त करेंगे। आज हमारा दौर संघर्ष का है। संघर्ष कभी बेकार नहीं जाता।
हम इस देश के भीतर, बिहार के भीतर सामाजिक न्याय की परिकल्पना को साकार करेंगे। जरूरत है सिर्फ आप सभी राजद के सिपाही, सामाजिक न्याय के पक्षधर लोग अपना हौसला बनाएं रखें।
राजद ने आज 23 वें वर्ष में प्रवेश किया है। यह कठिन तपस्या का परिणाम है। हमे सफलता - असफलता सब मिली। राजद ने इतिहास लिखा है। सभी अनुभवों से सीखकर हम आगे भी इतिहास लिखेंगे। राजद समझौता की पार्टी नहीं है। यह विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध जनता की पार्टी है। आइए नए सुबह के लिए राजद को और मजबूत बनाएं, राजद से जुड़ें, राजद को प्यार दें। लालू जी के सपनों को साकार करें।
- बाबुल इनायत
Sunday, May 5, 2019
हम एक है, हम साथ है, बिहार के बेहतर कल के लिए।।
कल पांचवे चरण का मतदान है। यह आपका अधिकार है। आप इसे दंगाई, नफरत के पैरोकार, चोर, लुटेरे, संघी, फसादी, गोधरा के दोषी, तड़ीपार, गुजराती व्यापारी, रफाल के घोटालेबाज, सृजन का आरोपी, बालिका गृह कांड के जिम्मेदार, पलटूवा, छुलछुल मोदीया के भाषणों और जाल में फंस के बर्बाद करने की भूल नहीं करना।
जरा भी कोई भटकाने की कोशिश करे तो लालू जी के उस तौलिए को याद कर लीजिएगा जो उनके कंधे पर होता है। सालों - साल गाँव - गाँव, गली - गली उन्होंने आपके लिए पसीना बहाया। अपने उस तौलिए से पसीना पोछ लिया और फिर सामाजिक न्याय के लिए लड़ने निकल पड़े।
जब भी कोई भटकाए तो याद कर लीजिएगा लालू जी ने कितनी सादगी से आपके घरों में बैठकर सत्तू खाया। कैसे मुनिया, बेटी को दुलारा, कैसे आपके हक के लिए संघर्ष किया।
आज भी वे आपके लड़ाई और संघर्ष के प्रति बीमारी के बावजूद भी गंभीर हैं। आप उन्हें अपना प्यार दीजिए। आपका प्यार, समर्थन उन्हें ताकत देगा।
आप तेजस्वी के भी उस छोटे गमछा को भी याद कीजिएगा जो उन्होंने अपने कंधे पर रखा है। यह गमछा इस बात का परिचायक है कि हम धूप में खटने वाले लोग हैं, हम मेहनत और संघर्ष में विश्वास करते हैं। आप सब बस एक बार अपने आंखों के सामने लालू जी, राबड़ी जी, तेजस्वी का चेहरा अपने आंखों के सामने रखिए और कल वोट दीजिए।
राजद को जम के, गरदा उड़ा के वोट करें। महागठबंधन को धमाकेदार जीत दें। दंगाईयों को हराकर उनके अस्तित्व का दफन करें।
हम एक है, हम साथ है।
बिहार के बेहतर कल के लिए।।
जय राजद, जय बिहार, जय महागठबंधन।
जरा भी कोई भटकाने की कोशिश करे तो लालू जी के उस तौलिए को याद कर लीजिएगा जो उनके कंधे पर होता है। सालों - साल गाँव - गाँव, गली - गली उन्होंने आपके लिए पसीना बहाया। अपने उस तौलिए से पसीना पोछ लिया और फिर सामाजिक न्याय के लिए लड़ने निकल पड़े।
जब भी कोई भटकाए तो याद कर लीजिएगा लालू जी ने कितनी सादगी से आपके घरों में बैठकर सत्तू खाया। कैसे मुनिया, बेटी को दुलारा, कैसे आपके हक के लिए संघर्ष किया।
आज भी वे आपके लड़ाई और संघर्ष के प्रति बीमारी के बावजूद भी गंभीर हैं। आप उन्हें अपना प्यार दीजिए। आपका प्यार, समर्थन उन्हें ताकत देगा।
आप तेजस्वी के भी उस छोटे गमछा को भी याद कीजिएगा जो उन्होंने अपने कंधे पर रखा है। यह गमछा इस बात का परिचायक है कि हम धूप में खटने वाले लोग हैं, हम मेहनत और संघर्ष में विश्वास करते हैं। आप सब बस एक बार अपने आंखों के सामने लालू जी, राबड़ी जी, तेजस्वी का चेहरा अपने आंखों के सामने रखिए और कल वोट दीजिए।
राजद को जम के, गरदा उड़ा के वोट करें। महागठबंधन को धमाकेदार जीत दें। दंगाईयों को हराकर उनके अस्तित्व का दफन करें।
हम एक है, हम साथ है।
बिहार के बेहतर कल के लिए।।
जय राजद, जय बिहार, जय महागठबंधन।
Friday, April 12, 2019
अररिया भाजपा प्रत्याशी प्रदीप सिंह का विवादित ऑडिओ वायरल।
सच्चाई छुप नही सकती है बनावट के उसूलों से,
खुश्बू आ नही सकती है कागज के फूलों से!
मित्रों ये हैं हमारे जिले के भाजपा सांसद प्रत्याशी प्रदीप कुमार सिंह, अपने प्रचार हेतु एक कार्यकर्ता से इनकी फोन पर हुई बात रिकॉर्ड हो गया और वायरल हो गया। बातचीत में इन्होंने सीधे सीधे अपने क्षेत्र के यदुवंशियों को सरेआम गाली दिया है। अपने कार्यकर्ता से कहा है कि हिंदुत्व के नाम पर हंगामा खड़ा करना है 25-50 मोटरसाईकल लेकर, जो वोट नही दे उनके गां* फूला दो।
आप इस वीडियो को देखिये और आपको स्वतः पता चल जायेगा कि भाजपा से तमाम बुद्धिजीवी वर्ग क्यों नफरत करते हैं। बातचीत का कुछ हिस्सा स्थानीय भाषा मे है इसीलिए मैं इसे हिंदी में वर्णित कर रहा हूं। अररिया की जनता इस सायकल चोर से दूर रहे और एक भी यदुवंशियों का वोट इस कायर को न जाये। इनका जेनऊ लीला बहुत है जानेंगे तो और बौखला जायेंगे। फिर भी एक तथ्य जरूर बताऊंगा इनके बारे में जिससे आपको पता चल जायेगा कि कितना नीच सोच रखते हैं भाजपाई!
अब बातचीत का अंश, सांसद प्रत्याशी के दूत अपने एक समर्थक को फोन घुमाते हैं..
दूत- हेलो! कमलेश भैया?
कमलेश - हाँ!
दूत- प्रदीप चचा बात करना चाहते हैं आपसे।
कमलेश- हे रखो अभी..
इसी बीच दूत सांसद प्रत्याशी को फोन पकड़ा देता है..
प्रत्याशी- कमलेश जी?
कमलेश - हाँ, प्रणाम!
प्रत्याशी-खुश रहिये। कमल खिलेगा कि नही?
कमलेश-खिलेगा जरूर, इस बार नही खिलेगा तो कब खिलेगा?
सांसद-जो बोले लालटेन उसको कहो भारत माता की जय ..
कमलेश खिलखिलाकर- हां, जय..हाहाहा..
प्रत्याशी- मारो साले को जो लालटेन बोलता है, गां* तोड़ देना है साले का..
कमलेश- हां, सही बात है.. हाहाहा..
प्रत्याशी-गौर से सुनो कमलेश, जितने नवयुवक हो न तुमलोग...गमछा पट्टा भगवा वाला..
कमलेश-हां हां..
प्रत्याशी- माथा में तिलक...कम से कम 25-50 मोटरसायकल लेकर पूरा हिंदूवाद वाला छवि बनाना है , एकदम लोगों में फैलाना है कि हिन्दू की रक्षा करना है, हिन्दू को बचाना है और नही तो अररिया को पाकिस्तान बनने नही देना है..
कमलेश सिर्फ हां में हां मिलाता है।
प्रत्याशी- पूरा ये सब हंगामा करना है, भारत तेरे टुकड़े नही होने देंगे..
कमलेश-हां..
प्रत्याशी- अयोध्या बाबू कहाँ हैं?
कमलेश-वो पटना गये हैं कल ही। परसों आ जाएंगे।
प्रत्याशी-तब तुम बैठे मत रहना, अलग जगह पर घूमते रहो।
कमलेश- हां , एकदम!
प्रत्याशी-यादवे सब इस बार उनको वोट देगा।
कमलेश-हां, इसबार वो लोग का मोटिव पेलल(तगड़ा और स्पष्ट) है..
प्रत्याशी-पेलते रहिये..
दूत फोन लेता है- आपके पास नम्बर है न इनका बात करते रहिएगा। .. हां हां..
अब आप ही बताईये कैसे समर्थन दे अररिया की जनता ऐसे जाहिल सांसद प्रत्याशी को? इस बार चोर और दंगाइयों को साफ करना है, अररिया के भी यदुवंशी इनको वोट न दें , इन्हें इनकी असली जगह पर भेज दें। समाज को बचाना है तो ऐसे साम्प्रदायिक जहरीले सांप का डंक ही तोड़ना होगा।
आक थू..
खुश्बू आ नही सकती है कागज के फूलों से!
मित्रों ये हैं हमारे जिले के भाजपा सांसद प्रत्याशी प्रदीप कुमार सिंह, अपने प्रचार हेतु एक कार्यकर्ता से इनकी फोन पर हुई बात रिकॉर्ड हो गया और वायरल हो गया। बातचीत में इन्होंने सीधे सीधे अपने क्षेत्र के यदुवंशियों को सरेआम गाली दिया है। अपने कार्यकर्ता से कहा है कि हिंदुत्व के नाम पर हंगामा खड़ा करना है 25-50 मोटरसाईकल लेकर, जो वोट नही दे उनके गां* फूला दो।
आप इस वीडियो को देखिये और आपको स्वतः पता चल जायेगा कि भाजपा से तमाम बुद्धिजीवी वर्ग क्यों नफरत करते हैं। बातचीत का कुछ हिस्सा स्थानीय भाषा मे है इसीलिए मैं इसे हिंदी में वर्णित कर रहा हूं। अररिया की जनता इस सायकल चोर से दूर रहे और एक भी यदुवंशियों का वोट इस कायर को न जाये। इनका जेनऊ लीला बहुत है जानेंगे तो और बौखला जायेंगे। फिर भी एक तथ्य जरूर बताऊंगा इनके बारे में जिससे आपको पता चल जायेगा कि कितना नीच सोच रखते हैं भाजपाई!
अब बातचीत का अंश, सांसद प्रत्याशी के दूत अपने एक समर्थक को फोन घुमाते हैं..
दूत- हेलो! कमलेश भैया?
कमलेश - हाँ!
दूत- प्रदीप चचा बात करना चाहते हैं आपसे।
कमलेश- हे रखो अभी..
इसी बीच दूत सांसद प्रत्याशी को फोन पकड़ा देता है..
प्रत्याशी- कमलेश जी?
कमलेश - हाँ, प्रणाम!
प्रत्याशी-खुश रहिये। कमल खिलेगा कि नही?
कमलेश-खिलेगा जरूर, इस बार नही खिलेगा तो कब खिलेगा?
सांसद-जो बोले लालटेन उसको कहो भारत माता की जय ..
कमलेश खिलखिलाकर- हां, जय..हाहाहा..
प्रत्याशी- मारो साले को जो लालटेन बोलता है, गां* तोड़ देना है साले का..
कमलेश- हां, सही बात है.. हाहाहा..
प्रत्याशी-गौर से सुनो कमलेश, जितने नवयुवक हो न तुमलोग...गमछा पट्टा भगवा वाला..
कमलेश-हां हां..
प्रत्याशी- माथा में तिलक...कम से कम 25-50 मोटरसायकल लेकर पूरा हिंदूवाद वाला छवि बनाना है , एकदम लोगों में फैलाना है कि हिन्दू की रक्षा करना है, हिन्दू को बचाना है और नही तो अररिया को पाकिस्तान बनने नही देना है..
कमलेश सिर्फ हां में हां मिलाता है।
प्रत्याशी- पूरा ये सब हंगामा करना है, भारत तेरे टुकड़े नही होने देंगे..
कमलेश-हां..
प्रत्याशी- अयोध्या बाबू कहाँ हैं?
कमलेश-वो पटना गये हैं कल ही। परसों आ जाएंगे।
प्रत्याशी-तब तुम बैठे मत रहना, अलग जगह पर घूमते रहो।
कमलेश- हां , एकदम!
प्रत्याशी-यादवे सब इस बार उनको वोट देगा।
कमलेश-हां, इसबार वो लोग का मोटिव पेलल(तगड़ा और स्पष्ट) है..
प्रत्याशी-पेलते रहिये..
दूत फोन लेता है- आपके पास नम्बर है न इनका बात करते रहिएगा। .. हां हां..
अब आप ही बताईये कैसे समर्थन दे अररिया की जनता ऐसे जाहिल सांसद प्रत्याशी को? इस बार चोर और दंगाइयों को साफ करना है, अररिया के भी यदुवंशी इनको वोट न दें , इन्हें इनकी असली जगह पर भेज दें। समाज को बचाना है तो ऐसे साम्प्रदायिक जहरीले सांप का डंक ही तोड़ना होगा।
आक थू..
Wednesday, April 10, 2019
Babul Inayat: न किसी यादव सम्मेलन में गया, न भूराबाल साफ करो कह...
Babul Inayat: न किसी यादव सम्मेलन में गया, न भूराबाल साफ करो कह...: लालू यादव भारतीय लोकतंत्र का चमत्कार भी हैं और एक पहेली भी. उनके जीवन को समझिए खुद उनके नजरिए से, क्योंकि उन्होंने पहली बार अपनी आत्...
न किसी यादव सम्मेलन में गया, न भूराबाल साफ करो कहा- लालू यादव
लालू यादव भारतीय लोकतंत्र का चमत्कार भी हैं और एक पहेली भी. उनके जीवन को समझिए खुद उनके नजरिए से, क्योंकि उन्होंने पहली बार अपनी आत्मकथा लिखी है.

उन्होंने नागेंद्र तिवारी जैसे अधिकारी को याद किया जिनकी वजह से वे पटना विश्वविद्यालय का चुनाव जीत पाये वरना दबंगों ने तो बैलेट बॉक्स तक नालियों और कचरे के डब्बे में डाल दिया था. उन्होंने आगे लिखा है कि भीख मांगते गरीब ब्राह्मण को देख कर भी मुझे बुरा लगता है.
एबीवीपी और आरएसएस को लालू यादव ने कभी पसंद नहीं किया. आरएसएस के लोग जेपी आंदोलन में कांग्रेस विरोधी लहर में रोटी तो सेंकना चाहते थे लेकिन आंदोलन के प्रति ईमानदार नहीं थे. जेपी के जेल भरो अभियान में लालू यादव ने उन्हें पूरी-जलेबी के भोज का लालच देकर भी जेल ले जाने की कोशिश की, लेकिन वे लोग रास्ते से ही भाग गए. उन्होंने लिखा कि ये लोग खोखली प्रतिबद्धता वाले लोग हैं.
चारा घोटाले पर भी उन्होंने अपना पक्ष रखा है. पत्रकार ए.जे. फिलिप के पत्र हवाले से उन्होंने यह बात सामने रखी कि जिस घोटाले का भंडाफोड़ करने का श्रेय उन्हें मिलना चाहिए उसके बदले उन्हें जेल में डाल दिया गया. लालू यादव ने पूरी कहानी बता कर यह भी दावा किया है कि उन्होंने वीपी सिंह को मण्डल लागू करने का सुझाव दिया था.
उन्होंने बहुत विस्तार से वीपी सिंह और देवीलाल के बीच प्रतिद्वंदिता का जिक्र किया है. उन्होंने ही इसके काट के रूप में वीपी सिंह को मण्डल लागू करने के सुझाव दिया और उसका गुणा-गणित समझाया, जबकि वे देवीलाल गुट के आदमी माने जाते थे. उन्होंने शरद यादव और रामविलास पासवान द्वारा श्रेय लेने के दावे को झूठी कहानी बताया. लालू यादव ने अपनी महत्वकांक्षाओं को किताब में छुपाया नहीं कि वे किसी भी कीमत पर सत्ता पाना चाहते थे. मंत्री बनने के लिए वे और नीतीश कुमार अपना सबसे अच्छा कुर्ता-पायजामा पहन कर प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास घूमा करते थे.
लालू यादव ने लिखा कि वे सिद्धांतों में कम और काम करने में ज्यादा यकीन करते हैं. उन्होंने अपने मुख्यमंत्री के पहले कार्यकाल में कई बार चौंकाने वाले फैसले लिए. एक बार तो वो हेट पहनकर रात में पुलिस के साथ ईंट के भट्टा पर पहुँच गए. वहाँ से अक्सर गरीब महिलाओं के यौन शोषण की खबरें आती रहती थी.
उन्होंने रात को ही छापा मार कर एक महिला को आजाद कराया और डीएम से कहकर उसको नौकरी भी दिलवाई. सामंतों ने गंगा नदी पर भागलपुर और पीरपैंती के बीच 80 किलोमीटर तक कब्जा करके ‘जल एस्टेट’ बना लिया था और मछुआरों से मछली मारने के एवज में टैक्स वसूलते थे. लालू यादव ने इस दबदबे को खत्म किया.
दरअसल लालू यादव को ऐसा बिहार मिला था जो सामंतों के कब्जे में था. सत्ता-संसाधन के हर क्षेत्र पर सवर्णों का कब्जा था. इस व्यवस्था को एक दिन में नहीं बदला जा सकता था. इसलिए लालू यादव तात्कालिक असर के लिए ‘अजीबोगरीब’ फैसले लेते थे, जिसे विरोधी नाटक का नाम देते थे.
वे रात को दलित बस्तियों में पहुंच जाते और दरवाजा खटखटा कर उनका हालचाल पूछते कि कोई तंग तो नहीं कर रहा. इस वजह से शोषक जातियों में डर फैला और वंचितों में बराबरी का एहसास हुआ. बाद के दिनों में यही बराबरी का एहसास था जिस पर नीतीश कुमार ने ‘विकास’ की फसल बोयी. एक बार तो उनहोंने एक ताड़ी इकट्ठा करने वाले को मंच पर भाषण देने के लिए बुला लिया. मंच पर बैठे सीपीआई के लोग इस ‘तमाशे’ से नाराज हो गए.
लालू यादव ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया था कि शिकायत दर्ज कराने आए गरीबों को सबसे पहले सम्मानपूर्ण थाने में बैठने की जगह दी जाय. उन्होंने अमीरों के लिए आरक्षित पटना क्लब को आम आदमी के लिए भी खोल दिया. उन्होंने कहा कि डोम, चमार जैसी जातियां रोड पर शादी करने को मजबूर है उनको भी पटना क्लब में शादी पार्टी करने का मौका मिले.
जब लाल कृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करना था तब लालू यादव रात भर नहीं सोये. उनकी पहली योजना लीक हो गयी थी और आडवाणी ने अपना रास्ता बदल लिया था. दूसरी योजना के तहत उन्होंने सुबह 4 बजे पत्रकार बनकर गेस्ट हाउस में फोन किया और कर्मचारी के हाथों आडवाणी जी के फोन का रिसीवर नीचे रखवा कर गिरफ्तारी का जाल बुन दिया. आडवाणी जी को भनक भी न लगी.
इस किताब में नीतीश कुमार मुख्य तौर पर लालू यादव के निशाने पर रहे हैं. नीतीश कुमार को लेकर इस किताब में बहुत कुछ है. कई अध्यायों में उनका जिक्र तो है ही साथ ही एक अलग चैप्टर भी है ‘छोटा भाई नीतीश’ नाम से. उस बात का जिक्र भी है जिसमें नितीश दुबारा लालू के साथ गठबंधन में वापस आना चाहते थे. अपने ऊपर जातिवादी होने के आरोप पर वे कहते हैं कि नीतीश और अन्य विरोधी नेता अपनी जाति के सम्मेलन में शामिल होते रहे हैं, लेकिन मैं आज तक किसी यादव सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ हूं.
अपने रेल मंत्री के कार्यकाल को लालू यादव ने सबसे सुखद माना है. रेलवे को घाटा से निकालने की पूरी कहानी उन्होंने लिखी है. अंतिम अध्याय उन्होंने तेजस्वी यादव पर केन्द्रित किया है. तेजप्रताप और मीसा भारती का जिक्र यदा कदा ही हुआ है. इस प्रकार उन्होंने सीधे-सीधे तेजस्वी के पक्ष में अपना राजनैतिक वसीयतनामा लिख दिया.
किताब में बार-बार इस बात का जिक्र मिलेगा कि कैसे कुलीन मीडिया ने उनकी छवि को गलत तरीके से पेश किया. इसलिए उन्होंने अपनी जनता से सीधा संवाद करने के लिए पटना में बड़ी-बड़ी रैलियां आयोजित की. उन्होंने अपनी गलतियों को भी ईमानदारी से स्वीकार किया है कि राजनीतिक सफलताओं ने मुझे अहंकारी बना दिया था. मैं लोगों से दूर हो गया था. बाद में उन्होंने इसमें सुधार किया.
लालू प्रसाद यादव की आत्मकथा ‘गोपालगंज से रायसीना’ प्रकाशित होते ही चर्चा में आ गयी. यह किताब उन्होंने पत्रकार नलिन वर्मा के साथ मिल कर लिखी है. 235 पेज की यह किताब रूपा पब्लिकेशन्स से हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुई है. इसकी प्रस्तावना सोनिया गांधी ने लिखी है. 36 तस्वीरों के सहारे भी उनके जीवन के विविध रंग इस किताब में देखे जा सकते हैं. प्रस्तावना और उपसंहार के अलावा इसमें तेरह अध्याय हैं.
(लेखक जेएनयू से ‘उपेक्षित जीवन के विविध आयाम’ विषय पर पीएचडी कर रहे हैं.)
Thursday, April 4, 2019
नीतीश कुमार जी आपने बिहारी भावनाओं का कत्ल कर दिया। राजद को जनता का सबसे अधिक प्यार मिला बावजूद इसके लालू जी ने आपको नेतृत्व का अवसर दिया : बाबुल इनायत
नीतीश कुमार जी आपने बिहारी भावनाओं का कत्ल कर दिया। राजद को जनता का सबसे अधिक प्यार मिला बावजूद इसके लालू जी ने आपको नेतृत्व का अवसर दिया : बाबुल इनायत
आपने नैतिकता का गला घोंट दिया और जनादेश का अपमान किया. आप नैतिक रूप बहुत ही कमजोर पड़ चुके हैं.
आपके 2019 के लोकसभा चुनाव में जनता के बीच जाकर जनादेश मांगने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. आपके चेहरे से नकाब उतर चुका है. जनता - जनार्दन आपको पहचान चुकी है. इस बार आम जनमानस आपको सबक सिखाने के लिए तैयार है.
बिहार की जनता साधारण अपमान बर्दाश्त नहीं करती. आपने तो जनादेश के साथ हैवानियत की है. इसका परिणाम आपको इस बार देखने को मिल जाएगा.
जय हिंद , जय बिहार , जय राजद , जय महागठबंधन.
Sunday, March 31, 2019
पुलवामा अटैक से 40 सैनिको की शहादत वाले दिन से लेकर अब तक प्रधान प्रचारक मोदी की एक दर्जन से ऊपर रैलियां हो चुकी हैं।
पुलवामा अटैक से 40 सैनिको की शहादत वाले दिन से लेकर अब तक प्रधान प्रचारक मोदी की एक दर्जन से ऊपर रैलियां हो चुकी हैं। फिर भी जनता में बीजेपी के पक्ष में कोई माहौल नही बन पा रहा है। स्टार प्रचारक योगी और अमित शाह की रैलियों में खाली कुर्सियां और खाली मैदान भक्तों को मायूस कर रहे हैं।
आज प्रधान चौकीदार का मेगा इवेंट भी टीवी पर लाइव चलता रहा लेकिन टीवी देखने वाले आईपीएल पर ज्यादा चर्चा करते पाए गए। कल अखबार में मुख्य पेज पर छापा जाएगा,लेकिन अब लोग हेडिंग पढ़कर पन्ना पलटने लगे हैं। करोड़ो रु की ये प्रयोजित नौटंकी भी फ्लॉप हो गई। यकीन न हो तो भक्तों की वाल चेक कर लीजिए।
आज के दिन सोशल मीडिया पर दो लोगों की फोटो बहुत वायरल हो रही हैं। एक मे ओएनजीसी को बरबाद करने वाला संबित पात्रा उड़ीसा में गरीब की झोपड़ी में बैठ कर मिट्टी से बने चूल्हे से बनाया गया भोजन कर रहा है। ये तस्वीर और इसका वीडियो प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्वला गैस योजना की पोल खोलती है। रैलियो में मोदी जी इन योजनाओं की सफलता के कितने भी दावे करें,किंतु यथार्थ के धरातल पर यही सच है,जो संबित पात्रा ने दिखाया है।
दूसरी तस्वीर मथुरा की सांसद हेमा मालिनी की है। कटे हुए गेहूँ की फसल काटने की एक्टिंग करके फोटो में खिलखिला रही हैं। सांसदी का अपना मजा भी है इसलिए ये एक्टिंग भी लाजमी है। एक आरटीआई से पता चला है कि मोदी सरकार ने हेमा मालिनी को 70 करोड़ की एक जमीन मात्र पौने दो लाख में बेच दी है।
छत्तीसगढ़ के भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का दामाद 50 करोड़ के घोटाले में फरार है, और रमन सिंह कह रहे है मैं भी चौकीदार हूँ। रॉबर्ट बाड्रा को जेल भेजने का भोंपू बजाने वाले अपने जीजा की करतूत पर शांत हैं।
पिछले 5 साल में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति 3 गुना और उनकी पत्नी की 16 गुना बढ़ गयी है। पुत्र जय शाह तो सम्पत्ति बढ़ाने के सभी पुराने रिकार्ड तोड़ चुके हैं। इसको भृष्टाचार न मानिए ये सब राष्ट्रवाद माना जाता है।
खैर इसको भी जाने दीजिए और एक बहुत महत्वपूर्ण बात सुनिए, इस चुनाव में बीजेपी को हर लोकसभा में 25 हजार से 1 लाख वोटों का नुकसान है लेकिन पत्तलकारों को एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर लिखने बोलने को ऊपर से मनाही है। शायद ये भारत का पहला ऐसा चुनाव है जिसमे सत्ता के विरुद्ध बनी स्वाभाविक एंटी इनकम्बेंसी लहर को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सात चरण में चुनाव कराने वाला चुनाव आयोग कह रहा है कि 50% VVPAT पर्ची गिनने से नतीजों में पाँच दिन देर होगी। फिर VVPAT का मतलब ही क्या रह गया ? पहले भी बैलेट पेपर डेढ़ दिन में गिन लिए जाते थे,तो अब पर्चियां क्यों नहीं गिनी जा सकती ? टी एन शेषन को इसी वजह से लोग आज भी भूले नही हैं। चुनाव आयोग तो खत्म ही समझिये, सुप्रीम कोर्ट से कुछ आस बची है।
एक और जरूरी बात जान लीजिए। इसे लेसन नम्बर 8 भी कह सकते हैं। वो रोज़ एक सराब, खराब टाइप का चुटकुला छोड़ेंगे और आप सब उस पर नए चुटकुले बनाने की योग्यता दिखाएँगे। सवालों को भटकाने का ये सबसे आसान तरीक़ा है। विपक्ष को इससे बचना चाहिए।आज के लिए इतना ही ठीक है।
Http://www.babulinayat.in
आज प्रधान चौकीदार का मेगा इवेंट भी टीवी पर लाइव चलता रहा लेकिन टीवी देखने वाले आईपीएल पर ज्यादा चर्चा करते पाए गए। कल अखबार में मुख्य पेज पर छापा जाएगा,लेकिन अब लोग हेडिंग पढ़कर पन्ना पलटने लगे हैं। करोड़ो रु की ये प्रयोजित नौटंकी भी फ्लॉप हो गई। यकीन न हो तो भक्तों की वाल चेक कर लीजिए।
आज के दिन सोशल मीडिया पर दो लोगों की फोटो बहुत वायरल हो रही हैं। एक मे ओएनजीसी को बरबाद करने वाला संबित पात्रा उड़ीसा में गरीब की झोपड़ी में बैठ कर मिट्टी से बने चूल्हे से बनाया गया भोजन कर रहा है। ये तस्वीर और इसका वीडियो प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्वला गैस योजना की पोल खोलती है। रैलियो में मोदी जी इन योजनाओं की सफलता के कितने भी दावे करें,किंतु यथार्थ के धरातल पर यही सच है,जो संबित पात्रा ने दिखाया है।
दूसरी तस्वीर मथुरा की सांसद हेमा मालिनी की है। कटे हुए गेहूँ की फसल काटने की एक्टिंग करके फोटो में खिलखिला रही हैं। सांसदी का अपना मजा भी है इसलिए ये एक्टिंग भी लाजमी है। एक आरटीआई से पता चला है कि मोदी सरकार ने हेमा मालिनी को 70 करोड़ की एक जमीन मात्र पौने दो लाख में बेच दी है।
छत्तीसगढ़ के भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का दामाद 50 करोड़ के घोटाले में फरार है, और रमन सिंह कह रहे है मैं भी चौकीदार हूँ। रॉबर्ट बाड्रा को जेल भेजने का भोंपू बजाने वाले अपने जीजा की करतूत पर शांत हैं।
पिछले 5 साल में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति 3 गुना और उनकी पत्नी की 16 गुना बढ़ गयी है। पुत्र जय शाह तो सम्पत्ति बढ़ाने के सभी पुराने रिकार्ड तोड़ चुके हैं। इसको भृष्टाचार न मानिए ये सब राष्ट्रवाद माना जाता है।
खैर इसको भी जाने दीजिए और एक बहुत महत्वपूर्ण बात सुनिए, इस चुनाव में बीजेपी को हर लोकसभा में 25 हजार से 1 लाख वोटों का नुकसान है लेकिन पत्तलकारों को एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर लिखने बोलने को ऊपर से मनाही है। शायद ये भारत का पहला ऐसा चुनाव है जिसमे सत्ता के विरुद्ध बनी स्वाभाविक एंटी इनकम्बेंसी लहर को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सात चरण में चुनाव कराने वाला चुनाव आयोग कह रहा है कि 50% VVPAT पर्ची गिनने से नतीजों में पाँच दिन देर होगी। फिर VVPAT का मतलब ही क्या रह गया ? पहले भी बैलेट पेपर डेढ़ दिन में गिन लिए जाते थे,तो अब पर्चियां क्यों नहीं गिनी जा सकती ? टी एन शेषन को इसी वजह से लोग आज भी भूले नही हैं। चुनाव आयोग तो खत्म ही समझिये, सुप्रीम कोर्ट से कुछ आस बची है।
एक और जरूरी बात जान लीजिए। इसे लेसन नम्बर 8 भी कह सकते हैं। वो रोज़ एक सराब, खराब टाइप का चुटकुला छोड़ेंगे और आप सब उस पर नए चुटकुले बनाने की योग्यता दिखाएँगे। सवालों को भटकाने का ये सबसे आसान तरीक़ा है। विपक्ष को इससे बचना चाहिए।आज के लिए इतना ही ठीक है।
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Saturday, March 30, 2019
आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी जब मुसहर महिला को पहचान कर बोला "सुखमनी तुम यहाँ"
babulinayat.in
लालू जी की याददाश्त बहुत ग़ज़ब की है. एक बार वो जिससे मिल लेते हैं, उनका नाम और चेहरा कभी नहीं भूलते।
"एक बार लालू जी एक पब्लिक मीटिंग में गए थे। वहाँ पर एक बड़ा सा लोहे वाला माइक लटका हुआ था। एक फटी दरी लगी हुई थी। 'ऑर्गनाइज़र' भी वहाँ से नदारद थे। नेता लोग अमूमन देर से पहुंचते हैं। लालू जी थोड़ा पहले पहुंच गए।"
"जब लालू जी पहुंचे तो मुसहर लोगों के टोले में रहने वाले लोगों ने सबसे पहले लालू जी सब को देखा। वो भागते हुए वहाँ पहुंचे। एक युवती लालू जी की नज़रों को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। उसके हाथ में एक बच्चा था। लालू जी ने उसको देखते ही पूछा, 'सुखमनी तुम यहाँ कैसे? तुम्हारी शादी यहीं हुई है क्या?' फिर लालू ने उसकी दूसरी बहन का नाम ले कर पूछा कि वो कहाँ है? उसने बताया कि बगल वाले गाँव में उसकी भी शादी हुई है। लालू जी ने तुरंत अपनी जेब से पाँच सौ रुपये का नोट निकाल कर उसे देते हुए कहा कि इससे बच्चे के लिए मिठाई वग़ैरह ख़रीद लेना।"
सबको बड़ा ताज्जुब हुआ कि एक ग़रीब औरत को लालू जी न सिर्फ़ नाम ले कर बुला रहे हैं, बल्कि उसकी बहन के बारे में भी पूछ रहे हैं। लालू जी बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने से पहले जब वो पटना के वेटरिनरी कॉलेज में रहा करते थे, तो उक्त महिला वहीं पास के मुसहर टोला में रहती थी। लालू यादव जी सालों गुज़र जाने के बाद भी उसे नहीं भूले थे। ये जो लालू जी की महान शख़्सियत है, यही उनकी ताक़त है।" हर गरीब के दिलों में लालू जी का नाम बसा है।
यह वाकया शिवानंद तिवारी जी ने बीबीसी को बताया था।
आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी जब मुसहर महिला को पहचान कर बोला ..... "सुखमनी तुम यहाँ"
लालू जी की याददाश्त बहुत ग़ज़ब की है. एक बार वो जिससे मिल लेते हैं, उनका नाम और चेहरा कभी नहीं भूलते।
"एक बार लालू जी एक पब्लिक मीटिंग में गए थे। वहाँ पर एक बड़ा सा लोहे वाला माइक लटका हुआ था। एक फटी दरी लगी हुई थी। 'ऑर्गनाइज़र' भी वहाँ से नदारद थे। नेता लोग अमूमन देर से पहुंचते हैं। लालू जी थोड़ा पहले पहुंच गए।"
"जब लालू जी पहुंचे तो मुसहर लोगों के टोले में रहने वाले लोगों ने सबसे पहले लालू जी सब को देखा। वो भागते हुए वहाँ पहुंचे। एक युवती लालू जी की नज़रों को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। उसके हाथ में एक बच्चा था। लालू जी ने उसको देखते ही पूछा, 'सुखमनी तुम यहाँ कैसे? तुम्हारी शादी यहीं हुई है क्या?' फिर लालू ने उसकी दूसरी बहन का नाम ले कर पूछा कि वो कहाँ है? उसने बताया कि बगल वाले गाँव में उसकी भी शादी हुई है। लालू जी ने तुरंत अपनी जेब से पाँच सौ रुपये का नोट निकाल कर उसे देते हुए कहा कि इससे बच्चे के लिए मिठाई वग़ैरह ख़रीद लेना।"
सबको बड़ा ताज्जुब हुआ कि एक ग़रीब औरत को लालू जी न सिर्फ़ नाम ले कर बुला रहे हैं, बल्कि उसकी बहन के बारे में भी पूछ रहे हैं। लालू जी बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने से पहले जब वो पटना के वेटरिनरी कॉलेज में रहा करते थे, तो उक्त महिला वहीं पास के मुसहर टोला में रहती थी। लालू यादव जी सालों गुज़र जाने के बाद भी उसे नहीं भूले थे। ये जो लालू जी की महान शख़्सियत है, यही उनकी ताक़त है।" हर गरीब के दिलों में लालू जी का नाम बसा है।
यह वाकया शिवानंद तिवारी जी ने बीबीसी को बताया था।
Thursday, March 28, 2019
महागठबंधन के उम्मीदवार श्री सरफराज आलम का नामांकन समारोह।
अररिया चले।। अररिया चले।। अररिया चले।।
प्रिय साथी,
श्री सरफराज आलम जी आज 29 मार्च दिन के 2:00 बजे बादे नमाज जुमा नेताजी सुभाष स्टेडियम अररिया में महागठबंधन की तरफ से अपना नॉमिनेशन देंगे।
महागठबंधन प्रत्याशी माननीय सांसद सरफराज आलम जी के नामांकन समारोह में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जी विकासशील इंसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी जी अररिया नेता जी स्टेडियम में 2:00 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे आप सभी से विन्रम निवेदन है भारी संख्या में उपस्थित होकर सरफराज आलम जी का हौसला अफजाई करें धन्यवाद।
श्री सरफराज आलम जी आज 29 मार्च दिन के 2:00 बजे बादे नमाज जुमा नेताजी सुभाष स्टेडियम अररिया में महागठबंधन की तरफ से अपना नॉमिनेशन देंगे।
महागठबंधन प्रत्याशी माननीय सांसद सरफराज आलम जी के नामांकन समारोह में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जी विकासशील इंसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी जी अररिया नेता जी स्टेडियम में 2:00 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे आप सभी से विन्रम निवेदन है भारी संख्या में उपस्थित होकर सरफराज आलम जी का हौसला अफजाई करें धन्यवाद।
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सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला की शिवहर के विधायक चेतन आनंद का पटना के एम्स में पिटाई कर दी गई यह कोई नई और पहली घटना नहीं है।इससे पहले भी चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप की भी पिटाई हो चुकी है। यह सब इसलिए खबर में आ जाता है क्योंकि यह लोग आम आदमी नहीं है तो सोचिए आम आदमी का क्या होता होगा रोजमर्रा की जिंदगी में जो खबर लोगों तक पहुंच ही नहीं पाती है।
सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला की शिवहर के विधायक चेतन आनंद का पटना के एम्स में पिटाई कर दी गई यह कोई नई और पहली घटना नहीं है।इससे पहले भ...
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बाबा साहेब की विचारधारा और संघर्ष आज भी हमें सामाजिक न्याय, समानता और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरणा देते हैं। उनके सिद्धां...
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अररिया जिला के 35 वाँ वर्षगांठ पर समस्त अररिया जिलावासियों को दिल की गहराई से मुबारकबाद पेश करता हूं। 14/01/1990 बाबुल इनायत जिला सचिव राष...


































