Wednesday, February 27, 2019
Tuesday, February 26, 2019
5 मार्च 2019 भारत बंद : बाबुल इनायत
भारत बन्द! भारत बन्द!! भारत बन्द!!!
5 मार्च 2019 को भारतबन्द।
आबादी के अनुपात में आरक्षण बढ़ाओ।
जातिगत जनगणना के आँकड़े प्रकाशित करो।
आदिवासी परिवारों को पुश्तैनी भूमि से बेदख़ल करना मंज़ूर नहीं.
13-पोईंट रोस्टर मंज़ूर नहीं।
अध्यादेश लाओ, सर्वोच्च अन्याय निरस्त करो।
न्यायपालिका में SC/ST/OBC आरक्षण सुनिश्चित करो।
मूलनिवासियों का शोषण बन्द करो!!!
बाबुल इनायत
9507860937
राजद नेता अररिया बिहार
Tuesday, February 19, 2019
पुलवामा हमले में 43 जवानों की शहादत के बाद मीडिया चैनलों की कौवा रार पर गौर कीजिए। क्या आपको एक भी चैनल इस हमले में सरकार से सवाल करता दिख रहा है कि भारी बर्फबारी के कारण जब सीआरपीएफ ने केंद्र सरकार से जवानों को वापस भेजने के लिए विमान यात्रा की मांग की तो कराने की 4 महीने तक गृह मंत्रालय इस मांग वाली फाइल को दबाए क्यों बैठा रहा ? जब सरकार के पास स्पष्ट इंटेलिजेंस इनपुट थे कि कार से विस्फोट करा कर जवानों को निशाना बनाया जा सकता है, फिर भी जवानों को 78 बसों के काफिले में क्यों भेजा गया ? जवानों के मूवमेंट की जानकारी लीक कैसे हुई ? देश मे इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक कहाँ से और कैसे आया ?
किसी चैनल की हिम्मत नही है कि वो प्रधानमंत्री से पूछ सके कि पुलवामा हमले के बाद वो उत्तराखंड में चुनावी रैली को फोन से क्यों सम्बोधित कर रहे थे, उसी शाम जिम कार्बेट नेशनल पार्क में डिस्कवरी चैनल के लिए डॉक्यूमेंट्री वीडियो की शूटिंग क्यो कर रहे थे ? क्या आपने किसी भी चैनल को प्रधानमंत्री द्वारा सर्वदलीय बैठक छोड़कर चुनावी रैलियों को महत्व देने पर उनकी आलोचना करते सुना ? नोटबन्दी से आतंकवाद की कमर टूट जाएगी ये किसी चैनल को याद क्यों नही आ रहा ? कोई चैनल मोदी जी के पुराने भाषणों के वीडियो याद दिला रहा हो तो बताइए जब वो आप की अदालत के सेट और चुनावी रैलियों के मंचो से ही पाकिस्तान को निपटा दिया करते थे।
ABP न्यूज तो बाकायदा स्टूडियो में ही वार रूम बनाकर बैठ गया है। ब्रेकिंग न्यूज़ चिल्लाते हुये ये भक्ति चैनल लाहौर,इस्लामाबाद, कराची पर कब्जा कर रहे हैं। कश्मीर संभल नही रहा और बलोचिस्तान की बाते हो रही हैं। सरकार से सवाल पूछने के बजाय इन चैनलों का जोर इशारों में सिद्धू,सानिया मिर्जा को देशद्रोही साबित करने में अधिक है।
याद रखिये हमारे देश मे पाकिस्तान के नाम पर ही देशभक्ति जगती है चीन के नाम पर नही। एक तयशुदा एजेंडे के तहत ये चैनल इस समय लोगों के गुस्से को उभार रहे हैं ताकि रष्ट्रवाद की ठेकेदार पार्टी के पक्ष में चुनावी माहौल बना सकें। हमले के फौरन बाद दनादन चुनावी रैलियां हो रही हैं। चैनल भी मस्त होकर बता रहे हैं कि आज मोदी जी ने फलानी जगह ये कहा,अलानी जगह वो कहा। अब पाकिस्तान की खैर नहीं। भक्त तो गीत गाते ही रहते हैं कि मोदी ये कर देगा,वो कर देगा। कद्दू में तीर मारा जा रहा है। आतंकवादी सेना को मारे तो पाकिस्तान जिम्मेदार, सेना आतंकियों को मारे तो क्रेडिट मोदी को।
लगभग हर आतंकी हमले के बाद सेना को खुली छूट देने का दावा किया गया था। फिर भी नतीजा सामने है। कुल मिलाकर 2014 के बाद कुएं में ऐसी भांग घोली गयी है जिसकी खुमारी अभी तक उतर नही पा रही और इसमें दुनिया मे विश्वनीयता के मापदंड पर 130वें स्थान वाली भारतीय मीडिया का बहुत बड़ा हाथ है।
किसी चैनल की हिम्मत नही है कि वो प्रधानमंत्री से पूछ सके कि पुलवामा हमले के बाद वो उत्तराखंड में चुनावी रैली को फोन से क्यों सम्बोधित कर रहे थे, उसी शाम जिम कार्बेट नेशनल पार्क में डिस्कवरी चैनल के लिए डॉक्यूमेंट्री वीडियो की शूटिंग क्यो कर रहे थे ? क्या आपने किसी भी चैनल को प्रधानमंत्री द्वारा सर्वदलीय बैठक छोड़कर चुनावी रैलियों को महत्व देने पर उनकी आलोचना करते सुना ? नोटबन्दी से आतंकवाद की कमर टूट जाएगी ये किसी चैनल को याद क्यों नही आ रहा ? कोई चैनल मोदी जी के पुराने भाषणों के वीडियो याद दिला रहा हो तो बताइए जब वो आप की अदालत के सेट और चुनावी रैलियों के मंचो से ही पाकिस्तान को निपटा दिया करते थे।
ABP न्यूज तो बाकायदा स्टूडियो में ही वार रूम बनाकर बैठ गया है। ब्रेकिंग न्यूज़ चिल्लाते हुये ये भक्ति चैनल लाहौर,इस्लामाबाद, कराची पर कब्जा कर रहे हैं। कश्मीर संभल नही रहा और बलोचिस्तान की बाते हो रही हैं। सरकार से सवाल पूछने के बजाय इन चैनलों का जोर इशारों में सिद्धू,सानिया मिर्जा को देशद्रोही साबित करने में अधिक है।
याद रखिये हमारे देश मे पाकिस्तान के नाम पर ही देशभक्ति जगती है चीन के नाम पर नही। एक तयशुदा एजेंडे के तहत ये चैनल इस समय लोगों के गुस्से को उभार रहे हैं ताकि रष्ट्रवाद की ठेकेदार पार्टी के पक्ष में चुनावी माहौल बना सकें। हमले के फौरन बाद दनादन चुनावी रैलियां हो रही हैं। चैनल भी मस्त होकर बता रहे हैं कि आज मोदी जी ने फलानी जगह ये कहा,अलानी जगह वो कहा। अब पाकिस्तान की खैर नहीं। भक्त तो गीत गाते ही रहते हैं कि मोदी ये कर देगा,वो कर देगा। कद्दू में तीर मारा जा रहा है। आतंकवादी सेना को मारे तो पाकिस्तान जिम्मेदार, सेना आतंकियों को मारे तो क्रेडिट मोदी को।
लगभग हर आतंकी हमले के बाद सेना को खुली छूट देने का दावा किया गया था। फिर भी नतीजा सामने है। कुल मिलाकर 2014 के बाद कुएं में ऐसी भांग घोली गयी है जिसकी खुमारी अभी तक उतर नही पा रही और इसमें दुनिया मे विश्वनीयता के मापदंड पर 130वें स्थान वाली भारतीय मीडिया का बहुत बड़ा हाथ है।
Sunday, February 17, 2019
एक जख्मी सैनिक अपने साथी से कहता है
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतों में बतला देना।
यदि हाल मेरी माता पूछें तो, जलता दीप बुझा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, दो आंसू तुम छलका देना।
यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, राखी तोड़ दिखा देना।
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना।
यदि हाल मेरा पापा पूछे तो, हाथों को सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना।
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सीने से उसको लगा देना।
यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सैनिक धर्म बता देना।।
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतों में बतला देना।
यदि हाल मेरी माता पूछें तो, जलता दीप बुझा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, दो आंसू तुम छलका देना।
यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, राखी तोड़ दिखा देना।
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना।
यदि हाल मेरा पापा पूछे तो, हाथों को सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना।
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सीने से उसको लगा देना।
यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सैनिक धर्म बता देना।।
पढिए....पुलवामा हमले के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह को इस्तीफा क्यो देना चाहिए?
आप यदि पुलवामा हमले से ठीक पहले जम्मू कश्मीर से आ रही खबरों को ध्यान से पढ़ेगे तो आप जान जाएंगे कि पुलवामा हमला मोदी सरकार की बहुत बड़ी विफलता है
फरवरी का मध्य हिस्सा पिछले कुछ सालो से जम्मू कश्मीर में बड़ा तनाव लेकर आ रहा है संसद भवन पर हमले के मामले में अफजल गुरु को नौ फरवरी 2013 को फांसी दी गई थी ओर जेकेएलएफ के संस्थापक मोहम्मद मकबूल भट्ट को भी 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी उसे भी अफजल की तरह ही तिहाड़ जेल में दफना दिया गया था मकबूल बट कश्मीर में अलगाववाद व आतंकवाद के जनक व जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के संस्थापक सदस्य माना जाता है इन दोनों की बरसी को लेकर आतंकवादियों के बड़ी वारदात करने की आशंका जताई जा रही थी
श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भू-स्खलन और बर्फबारी की वजह से करीब हफ्ते भर से बंद था ,कश्मीर के 2200 लोग जम्मू में फंसे थे जिसमे से कई छात्र भी थे जो एग्जाम देने के लिए सुदूर कश्मीर के इलाकों से जम्मू आए हुए थे वायुसेना के C17 ग्लोबमास्टर विमान से 8 से 12 फरवरी के 4 दिनों में अपनी उड़ानों में कुल 538 लोगों को एयरलिफ्ट किया था इनमें से 319 ऐसे छात्र थे, जिन्होंने गेट परीक्षा में हिस्सा लिया था।
इसी बीच खुफिया एजेंसियों ने एक बड़ा अलर्ट जारी करते हुए कहा कि आतंकी, जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों के डिप्लॉयमेन्ट और उनके आने जाने के रास्ते पर IED से हमला कर सकते हैं.14 फरवरी 2019 की सुबह आजतक की वेबसाइट यह स्टोरी पब्लिश की गई कमेन्ट बॉक्स में पर आप यह स्टोरी पढ़ सकते हैं
आजतक' के मौजूद खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है था कि सभी CRPF के कैम्प और पुलिस के कैम्प पर आतंकी बड़ा हमला कर सकते हैं, इसलिए सभी सुरक्षा बल सावधान रहें. इसके साथ ही एरिया को बिना सेंसिटाइज किए उस एरिया में ड्यूटी पर न जाएं
08-11 फरवरी तक जम्मू- श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के बंद होने के कारण छुट्टी बिताकर लौटे सैकड़ों जवान जम्मू के कई कैंपों में फंसे हुए थे जम्मू स्थित ट्रांजिट कैंप में जवानों की भीड़ बढ़ती जा रही थी.
आइजी अजय वीर सिंह चौहान, सीआरपीएफ, जम्मू सेक्टर ने कल यह साफ साफ कहा कि हमने एयरफोर्स से भी मांग की थी कि फंसे जवानों को जम्मू से एयरलिफ्ट किया जाए। ऐसा संभव न होने के कारण जवानों को शुक्रवार तड़के काफिले के जरिए श्रीनगर को रवाना किया गया
सीआरपीएफ जवानों को भी छात्रों की तरह एयरलिफ्ट किया जा सकता था, बशर्ते केंद्र में सीआरपीएफ अधिकारियों के विमान मुहैया करवाने के निवेदन को मान लिया जाता. बताया जाता है कि अधिकारी एक हफ्ते तक विशेष विमान की मांग करते रहे थे.
इसके बावजूद भी 2500 जवानों को 78 बसों में सड़क मार्ग से ही भेजने का निर्णय लिया गया.
लेकिन आपको पता होना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के बड़े जत्थे के आवागमन के लिए एक SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसीजर है, काफिला गुजरने से पहले संबंधित इलाके की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार रोड ओपनिंग पार्टी यानी ROP इसके लिए हरी झंडी देती है. आरओपी में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल होते हैं, ROP ने यह क्लीनचिट दी थी या उससे जबर्दस्ती दबाव डालकर यह क्लीनचिट दिलवाई गयी यह जांच का विषय है ?
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल विक्रम सिंह भी मानते हैं कि कहीं न कहीं लापरवाही हुई है उन्होंने कहा कि 'ऐसे हमले सतर्कता, स्टैंडर्ड आपरेशन प्रोसीजर का पालन करके ही रोके जा सकते है' साफ दिख रहा है कि जो इस केस में नही किया गया जबकि, हमले के बहुत स्पष्ट इनपुट मिले थे राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी इस लापरवाही को स्वीकार किया है!
जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती की सरकार को बर्खास्त किये जाने के बाद से ही राष्ट्रपति शासन लागू है सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की ही है हमले के बाद से देश भर में आम कश्मीरी से बदले का माहौल बनाया जा रहा है और ऐसा इसीलिए किया जा रहा है कि जनता इनसे ये सवाल न पूछने लगे जो इस पोस्ट में उठाए गए हैं..
Mr Girish Malviya
आप यदि पुलवामा हमले से ठीक पहले जम्मू कश्मीर से आ रही खबरों को ध्यान से पढ़ेगे तो आप जान जाएंगे कि पुलवामा हमला मोदी सरकार की बहुत बड़ी विफलता है
फरवरी का मध्य हिस्सा पिछले कुछ सालो से जम्मू कश्मीर में बड़ा तनाव लेकर आ रहा है संसद भवन पर हमले के मामले में अफजल गुरु को नौ फरवरी 2013 को फांसी दी गई थी ओर जेकेएलएफ के संस्थापक मोहम्मद मकबूल भट्ट को भी 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी उसे भी अफजल की तरह ही तिहाड़ जेल में दफना दिया गया था मकबूल बट कश्मीर में अलगाववाद व आतंकवाद के जनक व जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के संस्थापक सदस्य माना जाता है इन दोनों की बरसी को लेकर आतंकवादियों के बड़ी वारदात करने की आशंका जताई जा रही थी
श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भू-स्खलन और बर्फबारी की वजह से करीब हफ्ते भर से बंद था ,कश्मीर के 2200 लोग जम्मू में फंसे थे जिसमे से कई छात्र भी थे जो एग्जाम देने के लिए सुदूर कश्मीर के इलाकों से जम्मू आए हुए थे वायुसेना के C17 ग्लोबमास्टर विमान से 8 से 12 फरवरी के 4 दिनों में अपनी उड़ानों में कुल 538 लोगों को एयरलिफ्ट किया था इनमें से 319 ऐसे छात्र थे, जिन्होंने गेट परीक्षा में हिस्सा लिया था।
इसी बीच खुफिया एजेंसियों ने एक बड़ा अलर्ट जारी करते हुए कहा कि आतंकी, जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों के डिप्लॉयमेन्ट और उनके आने जाने के रास्ते पर IED से हमला कर सकते हैं.14 फरवरी 2019 की सुबह आजतक की वेबसाइट यह स्टोरी पब्लिश की गई कमेन्ट बॉक्स में पर आप यह स्टोरी पढ़ सकते हैं
आजतक' के मौजूद खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है था कि सभी CRPF के कैम्प और पुलिस के कैम्प पर आतंकी बड़ा हमला कर सकते हैं, इसलिए सभी सुरक्षा बल सावधान रहें. इसके साथ ही एरिया को बिना सेंसिटाइज किए उस एरिया में ड्यूटी पर न जाएं
08-11 फरवरी तक जम्मू- श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के बंद होने के कारण छुट्टी बिताकर लौटे सैकड़ों जवान जम्मू के कई कैंपों में फंसे हुए थे जम्मू स्थित ट्रांजिट कैंप में जवानों की भीड़ बढ़ती जा रही थी.
आइजी अजय वीर सिंह चौहान, सीआरपीएफ, जम्मू सेक्टर ने कल यह साफ साफ कहा कि हमने एयरफोर्स से भी मांग की थी कि फंसे जवानों को जम्मू से एयरलिफ्ट किया जाए। ऐसा संभव न होने के कारण जवानों को शुक्रवार तड़के काफिले के जरिए श्रीनगर को रवाना किया गया
सीआरपीएफ जवानों को भी छात्रों की तरह एयरलिफ्ट किया जा सकता था, बशर्ते केंद्र में सीआरपीएफ अधिकारियों के विमान मुहैया करवाने के निवेदन को मान लिया जाता. बताया जाता है कि अधिकारी एक हफ्ते तक विशेष विमान की मांग करते रहे थे.
इसके बावजूद भी 2500 जवानों को 78 बसों में सड़क मार्ग से ही भेजने का निर्णय लिया गया.
लेकिन आपको पता होना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के बड़े जत्थे के आवागमन के लिए एक SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसीजर है, काफिला गुजरने से पहले संबंधित इलाके की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार रोड ओपनिंग पार्टी यानी ROP इसके लिए हरी झंडी देती है. आरओपी में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल होते हैं, ROP ने यह क्लीनचिट दी थी या उससे जबर्दस्ती दबाव डालकर यह क्लीनचिट दिलवाई गयी यह जांच का विषय है ?
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल विक्रम सिंह भी मानते हैं कि कहीं न कहीं लापरवाही हुई है उन्होंने कहा कि 'ऐसे हमले सतर्कता, स्टैंडर्ड आपरेशन प्रोसीजर का पालन करके ही रोके जा सकते है' साफ दिख रहा है कि जो इस केस में नही किया गया जबकि, हमले के बहुत स्पष्ट इनपुट मिले थे राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी इस लापरवाही को स्वीकार किया है!
जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती की सरकार को बर्खास्त किये जाने के बाद से ही राष्ट्रपति शासन लागू है सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की ही है हमले के बाद से देश भर में आम कश्मीरी से बदले का माहौल बनाया जा रहा है और ऐसा इसीलिए किया जा रहा है कि जनता इनसे ये सवाल न पूछने लगे जो इस पोस्ट में उठाए गए हैं..
Mr Girish Malviya
Friday, February 15, 2019
सैनिकों पर बोलो तो इंटेलेक्चुअल आतंकवादी हैं और किसानों पर बोलें तो एसी में बैठे पत्रकार.
"युद्ध करा दो. बदला लो. एक के बदले 50 सिर. खून उबल रहा है. काट दो."
ये सारे बोल मध्यमवर्गीय शहरी लोग अपने लिविंग रूम में बैठे धड़ाधड़ छाप रहे हैं. इनसे पूछो कि इनसे घर से कितने सैनिक हैं, जिनके सिर कटवाने को ये आतुर हैं? इनसे ये भी पूछो कि तैयारी करके सैनिक क्यों नहीं बनते हैं? क्या शहरी लड़के सैनिक बनने के लिए सुबह चार बजे उठकर दौड़ लगा रहे हैं? शहरों से अफसर निकलते हैं. आंकड़े निकलवा कर देख लीजिए. जिस ग्रामीण परिवेश के सैनिक हर आतंकी हमले में मारे जाते हैं उन्हीं के पिताजी जब दिल्ली अपने हकों के लिए पहुँचते हैं तो ये ही मध्यमवर्गीय शहरी उन्हें भी आतंकी बोलते हैं. इन्हें लगता है कि किसान को अपने खेत में पड़े रहकर फावड़ा चलाना चाहिए यहां हमारे शहर को गंदा क्यों करने आए हैं.
जिस देशभक्ति का परिचय ये सोशल मीडिया पर दे रहे हैं अगर उसको जांचना है तो इनके निजी जीवन को खंगालिए. मैं छोटी सी थी तब से देख रही हूँ कि एक पड़ोस की बुआ के पति कारगिल में शहीद हुए थे. उन्हें सरकार ने पेट्रोल पम्प और मुआवजा दिया था. चार दिन की देशभक्ति के बाद ज़्यादातर लोगों को उनके लिए हमदर्दी कभी नहीं रही. ये ईर्ष्या रही कि इसके पास पेट्रोल पम्प है. उस बुआ ने दूसरी शादी की तो लोगों ने बातें बनाई. ये लोग शहीदों की पत्नियों को ताउम्र दुःख और यातनाओं में देखने के आदि हैं. ये है मध्यमवर्ग की देशभक्ति.
दिल्ली विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को मिले कोटे के लिए
लोगों को हीन भावना से ग्रस्त होते देखा है कि उनके दादा-परदादा कर गए तो ये लोग फायदा उठा रहे हैं. मतलब सैनिकों को युद्ध में भेजकर शहीद होने की वकालत भी और उनके बच्चे नौकरी या पढ़ाई में मिले कोटे को कोसते भी रहो. ये है मध्यमवर्ग की देशभक्ति.
हरियाणा के जिसे इलाके से मैं हूं इस इलाके के हर घर से तीन-तीन फौजी हैं. मेरे घर में मेरे पिताजी किसान, मेरे दादा जी बीएसएफ, मेरे ताऊजी बीएसएफ, मेरे चाचा सीआरपीएफ, मेरे फूफाजी सीआरपीएफ, मेरे ताऊजी के बेटे दोनों बेटे आर्मी, बुआ का बेटा आर्मी में हैं. मेरे एक और भाई अभी आर्मी में लगने की तैयारी कर रहा है, उससे छोटा एक और भाई भी बारहवीं करते ही फ़ौज में जाएगा.
जब पठानकोट बेस में हमला हुआ था तब मेरे भाईसाहब, भाभी और भतीजी उसी कैंप से महज 5 किलोमीटर दूर थे. मेरे ताऊ-ताई और दादी-दादी सबके हाल बुरे थे.
2010 के आस-पास मेरे फूफाजी की पोस्टिंग नक्सली एरिया में थी. उसी दौरान हुए एक नक्सली हमले में 76 जवान भी मारे गए थे. मेरी बुआ कितनी परेशान रही टीवी की खबरें देख-देख कर. लेकिन मैं कह रही हूं कि मेरे घर की औरतें अपने पतियों और बेटे को सही सलामत देखना चाहती हैं और युद्ध नहीं तो आपको दिक्कत है?
मैं हैरान-परेशान हूं कि ये कौन लोग हैं जो एक-एक घर के तीन-तीन फौजियों की लाशें देखने को तत्पर हैं. इनकी आईडी देखने पर तो ये आईआईएम से डिग्री लिए दिखते हैं. कोई महंगी कार के सामने खड़ा है. मलतब सब रसूखदार लोग हैं. नोट छापने वाले. लेकिन ये हमारे भाइयों को युद्ध के लिए भेजना चाहते हैं. हमारी बुआओं, चाचियों और भाभियों को विधवा और उनके बच्चों को अनाथ देखना चाहते हैं?
अभी दिसंबर में सीआरपीएफ के जवान कुछ मांगों को लेकर जंतर-मंतर आए थे. अगर इन तथाकथित लोगों की नज़र उनपर पड़ती तो तेज बहादुर की तरह उन्हें पागल घोषित करते. लेकिन याद आया बीएसएफ के तेज बहादुर ने जब आवाज़ उठाई कि हमें खाने में ये मिल रहा है तो वो भी देशद्रोही हो गया था.
सेना आवाज़ उठाए तो सेना देशद्रोही, किसानों के बच्चे आवाज़ उठाएं तो वो बच्चे भी देशद्रोही. इस देश में बस एक ही देशभक्त बचा है- वो है मध्यमवर्गीय शहरी.
ये समय ऐसी पोस्ट लिखने का तो नहीं है लेकिन पिछली पोस्ट्स पर आए कमेंट्स ने मज़बूर किया. कुछ ट्रोल करने वाले भाई साहब सोचते हैं कि मैं जेएनयू से हूं. अरे नहीं ताऊ, मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से हूं और बारहवीं तक गांव में ही पढ़ी हूं. किसान और फौजी परिवार से हूं.
- Jyoti Yadav
"युद्ध करा दो. बदला लो. एक के बदले 50 सिर. खून उबल रहा है. काट दो."
ये सारे बोल मध्यमवर्गीय शहरी लोग अपने लिविंग रूम में बैठे धड़ाधड़ छाप रहे हैं. इनसे पूछो कि इनसे घर से कितने सैनिक हैं, जिनके सिर कटवाने को ये आतुर हैं? इनसे ये भी पूछो कि तैयारी करके सैनिक क्यों नहीं बनते हैं? क्या शहरी लड़के सैनिक बनने के लिए सुबह चार बजे उठकर दौड़ लगा रहे हैं? शहरों से अफसर निकलते हैं. आंकड़े निकलवा कर देख लीजिए. जिस ग्रामीण परिवेश के सैनिक हर आतंकी हमले में मारे जाते हैं उन्हीं के पिताजी जब दिल्ली अपने हकों के लिए पहुँचते हैं तो ये ही मध्यमवर्गीय शहरी उन्हें भी आतंकी बोलते हैं. इन्हें लगता है कि किसान को अपने खेत में पड़े रहकर फावड़ा चलाना चाहिए यहां हमारे शहर को गंदा क्यों करने आए हैं.
जिस देशभक्ति का परिचय ये सोशल मीडिया पर दे रहे हैं अगर उसको जांचना है तो इनके निजी जीवन को खंगालिए. मैं छोटी सी थी तब से देख रही हूँ कि एक पड़ोस की बुआ के पति कारगिल में शहीद हुए थे. उन्हें सरकार ने पेट्रोल पम्प और मुआवजा दिया था. चार दिन की देशभक्ति के बाद ज़्यादातर लोगों को उनके लिए हमदर्दी कभी नहीं रही. ये ईर्ष्या रही कि इसके पास पेट्रोल पम्प है. उस बुआ ने दूसरी शादी की तो लोगों ने बातें बनाई. ये लोग शहीदों की पत्नियों को ताउम्र दुःख और यातनाओं में देखने के आदि हैं. ये है मध्यमवर्ग की देशभक्ति.
दिल्ली विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को मिले कोटे के लिए
लोगों को हीन भावना से ग्रस्त होते देखा है कि उनके दादा-परदादा कर गए तो ये लोग फायदा उठा रहे हैं. मतलब सैनिकों को युद्ध में भेजकर शहीद होने की वकालत भी और उनके बच्चे नौकरी या पढ़ाई में मिले कोटे को कोसते भी रहो. ये है मध्यमवर्ग की देशभक्ति.
हरियाणा के जिसे इलाके से मैं हूं इस इलाके के हर घर से तीन-तीन फौजी हैं. मेरे घर में मेरे पिताजी किसान, मेरे दादा जी बीएसएफ, मेरे ताऊजी बीएसएफ, मेरे चाचा सीआरपीएफ, मेरे फूफाजी सीआरपीएफ, मेरे ताऊजी के बेटे दोनों बेटे आर्मी, बुआ का बेटा आर्मी में हैं. मेरे एक और भाई अभी आर्मी में लगने की तैयारी कर रहा है, उससे छोटा एक और भाई भी बारहवीं करते ही फ़ौज में जाएगा.
जब पठानकोट बेस में हमला हुआ था तब मेरे भाईसाहब, भाभी और भतीजी उसी कैंप से महज 5 किलोमीटर दूर थे. मेरे ताऊ-ताई और दादी-दादी सबके हाल बुरे थे.
2010 के आस-पास मेरे फूफाजी की पोस्टिंग नक्सली एरिया में थी. उसी दौरान हुए एक नक्सली हमले में 76 जवान भी मारे गए थे. मेरी बुआ कितनी परेशान रही टीवी की खबरें देख-देख कर. लेकिन मैं कह रही हूं कि मेरे घर की औरतें अपने पतियों और बेटे को सही सलामत देखना चाहती हैं और युद्ध नहीं तो आपको दिक्कत है?
मैं हैरान-परेशान हूं कि ये कौन लोग हैं जो एक-एक घर के तीन-तीन फौजियों की लाशें देखने को तत्पर हैं. इनकी आईडी देखने पर तो ये आईआईएम से डिग्री लिए दिखते हैं. कोई महंगी कार के सामने खड़ा है. मलतब सब रसूखदार लोग हैं. नोट छापने वाले. लेकिन ये हमारे भाइयों को युद्ध के लिए भेजना चाहते हैं. हमारी बुआओं, चाचियों और भाभियों को विधवा और उनके बच्चों को अनाथ देखना चाहते हैं?
अभी दिसंबर में सीआरपीएफ के जवान कुछ मांगों को लेकर जंतर-मंतर आए थे. अगर इन तथाकथित लोगों की नज़र उनपर पड़ती तो तेज बहादुर की तरह उन्हें पागल घोषित करते. लेकिन याद आया बीएसएफ के तेज बहादुर ने जब आवाज़ उठाई कि हमें खाने में ये मिल रहा है तो वो भी देशद्रोही हो गया था.
सेना आवाज़ उठाए तो सेना देशद्रोही, किसानों के बच्चे आवाज़ उठाएं तो वो बच्चे भी देशद्रोही. इस देश में बस एक ही देशभक्त बचा है- वो है मध्यमवर्गीय शहरी.
ये समय ऐसी पोस्ट लिखने का तो नहीं है लेकिन पिछली पोस्ट्स पर आए कमेंट्स ने मज़बूर किया. कुछ ट्रोल करने वाले भाई साहब सोचते हैं कि मैं जेएनयू से हूं. अरे नहीं ताऊ, मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से हूं और बारहवीं तक गांव में ही पढ़ी हूं. किसान और फौजी परिवार से हूं.
- Jyoti Yadav
सभी सैनिकों को विन्रम श्रधांजलि। बाबुल इनायत
एक जख्मी सैनिक अपने साथी से कहता है
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतों में बतला देना।यदि हाल मेरी माता पूछें तो, जलता दीप बुझा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, दो आंसू तुम छलका देना।
यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, राखी तोड़ दिखा देना।
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना।
यदि हाल मेरा पापा पूछे तो, हाथों को सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना।
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका सहला देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सीने से उसको लगा देना।
यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना।
इतने पर भी वो ना समझे तो, सैनिक धर्म बता देना।।
Thursday, February 14, 2019
जनता का ही राज चलेगा लालू हरदम साथ चलेगा: बाबुल इनायत
बचपन से जिस कहानी को सुन कर युवा पीढ़ी में आया हूँ। उस कहानी के हीरो हमारे नेता लालू प्रसाद यादव जी के साथ जो साज़िश हुआ है उसके खिलाफ अब युवा बन लड़ने आया हूँ।
इस लड़ाई को लड़ने से पहले मैं उन तमाम लोगो से अपील करता हूँ। हमसे जो भी गलतिया हुई होगी उसके लिए माफ़ी चाहता हूँ और अब सब कुछ भुला कर अपने नेता के लिए लड़ाई लड़ना चाहता हूँ और आपलोग का प्यार और आशीर्वाद चाहता हूँ। हम लड़ना चाहते हैं संघर्ष करना चाहते हैं हम अपने पूर्वजों की लड़ाई को पूरा करना चाहते हैं हम अपने नेता गरीबों के मसीहा जन-जन के नेता श्री लालू प्रसाद यादव जी को वापस अपने बिहार के जनता के बीच चाहते हैं।
इस लड़ाई को लड़ने से पहले मैं उन तमाम लोगो से अपील करता हूँ। हमसे जो भी गलतिया हुई होगी उसके लिए माफ़ी चाहता हूँ और अब सब कुछ भुला कर अपने नेता के लिए लड़ाई लड़ना चाहता हूँ और आपलोग का प्यार और आशीर्वाद चाहता हूँ। हम लड़ना चाहते हैं संघर्ष करना चाहते हैं हम अपने पूर्वजों की लड़ाई को पूरा करना चाहते हैं हम अपने नेता गरीबों के मसीहा जन-जन के नेता श्री लालू प्रसाद यादव जी को वापस अपने बिहार के जनता के बीच चाहते हैं।
जनता का ही राज चलेगा।
लालू हरदम साथ चलेगा।।
Wednesday, February 13, 2019
तेजस्वी यादव जी का पूर्णिया के पावन धरती पर हार्दिक अभिनंदन: बाबुल इनायत
तेजस्वी जी का पूर्णिया की धरती पर हार्दिक अभिनन्दन: बाबुल इनायत
15 फरवरी 2019 समय 11:00 बजे
जीवन ज्योति केंद्र के तत्वावधान में संत कबीर नगर ,पूर्णिया कोर्ट में 38 वा अंतराष्ट्रीय कबीर महोत्सव पिछले अड़तीस वर्षों से पूज्य संत आचार्य धर्मस्वरूप साहेब की प्रेरणा से कबीर महोत्सव का आयोजन होता आया है जिसमे हर वर्ष हजारों की संख्या में कबीरपंथी भक्त शामिल होते रहे हैं उक्त कार्यक्रम में 15 फरवरी को बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी प्रसाद यादव भी शिरकत करेंगे।वे कटिहार ट्रेन से पहुंचेंगे जहां से सड़क मार्ग से पूर्णिया परिसदन पहुंचेंगे एवं 11:00 बजे कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए जीवन ज्योति के घर पहुंचेंगे जहां पहुंचकर सद्गुरु धर्मस्वरूप साहब से आशीर्वाद लेंगे।
तेजस्वी यादव एवं बाबुल इनायत
Tuesday, February 12, 2019
रसोइयों की सभी मांगो का राष्ट्रीय जनता दल पूर्ण समर्थन करती है : बाबुल इनायत
नीतीश सरकार शर्म करो,सामाजिक न्याय-महिला सशक्तिकरण का ढोंग बन्द करो। केंद्र-राज्य का बहाना बन्द करो-रसोइयों को न्यूनतम मजदूरी की गारंटी करो।
मध्यान भोजन रसोइयों को 18 हजार मनोदय,सरकारी कर्मी का दर्जा,सामाजिक सुरक्षा,वर्ष में 10 के बदले 12 माह का परिश्रमिक भुगतान।
राष्ट्रीय जनता दल अररिया इन सभी मांगो का पूर्ण समर्थन करती है।
मध्यान भोजन रसोइयों को 18 हजार मनोदय,सरकारी कर्मी का दर्जा,सामाजिक सुरक्षा,वर्ष में 10 के बदले 12 माह का परिश्रमिक भुगतान।
राष्ट्रीय जनता दल अररिया इन सभी मांगो का पूर्ण समर्थन करती है।
Saturday, February 2, 2019
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भोजपुर बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी श्री सोनू कुमार राय जी की प्रबल जीत पर उन्हें एवं समस्त राष्ट्रीय जनता दल के समस्त नेता, कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों को जीत की बधाई एवं शुभकामनायें।
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Babul Inayat जनहित में जारी - हमारी मांग, हमारा अधिकार आंधी-तूफान से हुई भारी क्षति हेतु मुआवजा एवं अविलंब बिजली आपूर्ति के लिए सरकार से हमा...
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अररिया जिला के 35 वाँ वर्षगांठ पर समस्त अररिया जिलावासियों को दिल की गहराई से मुबारकबाद पेश करता हूं। 14/01/1990 बाबुल इनायत जिला सचिव राष...









